17 सितंबर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 17 सितंबर 2026, गुरुवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), भाद्रपद (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – षष्ठी प्रातः 10:49 AM तक, तत्पश्चात् सप्तमी
वार – गुरुवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – अनुराधा सायं 07:54 PM तक, तत्पश्चात् ज्येष्ठा
योग – विष्कुम्भ दोपहर 12:49 PM तक, तत्पश्चात् प्रीति
करण – तैतिल प्रातः 10:49 AM तक, तत्पश्चात् गर रात्रि 11:53 PM तक, तत्पश्चात् वणिज

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 05:57 AM
सूर्यास्त – 06:14 PM
चन्द्रोदय – 11:43 AM
चन्द्रास्त – 10:02 PM
चन्द्र राशि – वृश्चिक
अभिजित मुहूर्त – 11:41 AM से 12:30 PM तक
विजय मुहूर्त – 02:09 PM से 02:58 PM तक

अशुभ काल
राहुकाल – 01:38 PM से 03:10 PM तक
यमगण्ड – 05:57 AM से 07:29 AM तक
गुलिक काल – 09:01 AM से 10:34 AM तक
दुर्मुहूर्त – 10:03 AM से 10:52 AM तक एवं 02:58 PM से 03:47 PM तक
कंटक – 02:58 PM से 03:47 PM तक

शुभ चौघड़िया
शुभ – 05:57 AM से 07:29 AM तक
रोग – 07:29 AM से 09:01 AM तक
उद्वेग – 09:01 AM से 10:34 AM तक
चर – 10:34 AM से 12:06 PM तक
लाभ – 12:06 PM से 01:38 PM तक
अमृत – 01:38 PM से 03:10 PM तक
शुभ – 04:42 PM से 06:14 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – दक्षिण
यात्रा उपाय – गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दही या जीरा खाकर अथवा भगवान विष्णु का स्मरण करके प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
ललिता सप्तमी एवं संतान सप्तमी व्रत
प्रातः 10:49 के बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन संतान के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि के लिए संतान सप्तमी/ललिता सप्तमी व्रत का विशेष विधान है। माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव
सायं 07:54 तक अनुराधा नक्षत्र रहेगा, जिसके स्वामी शनिदेव और अधिपति ग्रह मित्र (सूर्य) हैं। यह नक्षत्र मित्रता, सहयोग, संगठन और नए संकल्पों को सिद्धि तक पहुंचाने वाला माना जाता है। इसके पश्चात ज्येष्ठा नक्षत्र प्रारंभ होगा।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा दिन-रात वृश्चिक राशि (नीच राशि) में गोचर करेंगे। अतः भावुकता में आकर कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें। दिन के पूर्वार्ध में विष्कुम्भ योग होने से महत्वपूर्ण वित्तीय अनुबंधों में सावधानी बरतें, दोपहर 12:49 के बाद प्रीति योग बनने से सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यों में सफलता मिलेगी।

आज का राशिफल – 17 सितंबर 2026 गुरुवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
चन्द्रमा अष्टम भाव में होने के कारण स्वास्थ्य और वाहन संचालन में सावधानी बरतें। गुप्त शत्रुओं से सतर्क रहें। किसी भी नए निवेश से पूर्व वरिष्ठों की सलाह अवश्य लें।
उपाय – भगवान शिव को जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दाम्पत्य जीवन में सुख-समंजस्य बना रहेगा। व्यापारिक साझेदारी से लाभ मिलने के अच्छे योग हैं। मित्रों के सहयोग से कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
शत्रु और विरोधी परास्त होंगे। नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों से प्रोत्साहन मिलेगा। कानूनी मामलों में राहत के संकेत हैं।
उपाय – गाय को हरी घास या भीगी हुई चने की दाल खिलाएं।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए दिन अनुकूल रहेगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है। बौद्धिक क्षमता के बल पर जटिल कार्यों का समाधान निकालेंगे।
उपाय – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से भौतिक सुख-साधनों पर खर्च हो सकता है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यक्षेत्र में धैर्य से काम लें।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
पराक्रम और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। छोटी दूरी की व्यावसायिक यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी। भाई-बहनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
उपाय – श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आकस्मिक धन लाभ के योग बनेंगे। परिवार में मांगलिक वातावरण रहेगा। अपनी वाणी पर संयम रखें।
उपाय – जरूरतमंदों को पीले फल या भोजन का दान करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक चंचलता रह सकती है। महत्वपूर्ण निर्णय शांत मन से लें। कार्यक्षेत्र में मान-प्रतिष्ठा बनी रहेगी।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें।

धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के कारण अनावश्यक खर्चों में वृद्धि हो सकती है। विदेश अथवा दूरस्थ स्थानों से जुड़े कार्यों में लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय – केले के वृक्ष में जल अर्पित करें और दीपक जलाएं।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आय के नए स्रोत विकसित होंगे। पुराने मित्रों से भेंट मन को प्रसन्न करेगी। व्यावसायिक क्षेत्र में बनाई गई योजनाएं सफल सिद्ध होंगी।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
दशम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे। व्यापारियों को नए अनुबंध प्राप्त हो सकते हैं। पिता का सहयोग मार्ग प्रशस्त करेगा।
उपाय – चने की दाल और गुड़ किसी निर्धन व्यक्ति को दें।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
भाग्य का पूर्ण साथ मिलेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – गुरुजनों या वृद्धजनों का आशीर्वाद लें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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