14 सितम्बर 2026 का वैदिक पंचांग एवं राशिफल

वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 14 सितम्बर 2026, सोमवार

कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद

मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), भाद्रपद (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – तृतीया प्रातः 07:08 AM तक, तत्पश्चात् चतुर्थी (गणेश चतुर्थी / विनायक चतुर्थी)
वार – सोमवार

नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – चित्रा दोपहर 01:55 PM तक, तत्पश्चात् स्वाति
योग – ब्रह्म दोपहर 12:46 PM तक, तत्पश्चात् ऐन्द्र
करण – गर प्रातः 07:08 AM तक, तत्पश्चात् वणिज शाम 07:22 PM तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा)

सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 05:56 AM
सूर्यास्त – 06:18 PM
चन्द्रोदय – प्रातः 08:48 AM
चन्द्रास्त – रात 08:00 PM
चन्द्र राशि – तुला (पूरा दिन-रात)
अभिजित मुहूर्त – 11:42 AM से 12:31 PM तक
विजय मुहूर्त – 02:32 PM से 03:24 PM तक (दुर्मुहूर्त/राहुकाल रहित काल गणनानुसार)

अशुभ काल
राहुकाल – 07:29 AM से 09:01 AM तक
यमगण्ड – 10:34 AM से 12:07 PM तक
गुलिक काल – 01:39 PM से 03:12 PM तक
दुर्मुहूर्त – दोपहर 12:31 PM से 01:21 PM तक एवं दोपहर 03:00 PM से 03:49 PM तक
कंटक – 08:24 AM से 09:14 AM तक
कालवेला या अर्द्धयाम – 10:03 AM से 10:53 AM तक
यमघण्ट – 11:42 AM से 12:31 PM तक
गुलिक (दूसरा) – 03:00 PM से 03:49 PM तक

शुभ चौघड़िया
अमृत – 05:56 AM से 07:29 AM तक
शुभ – 09:01 AM से 10:34 AM तक
चर – 01:39 PM से 03:12 PM तक
लाभ – 03:12 PM से 04:45 PM तक

दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दर्पण देखकर या दूध-मिश्री का सेवन कर प्रस्थान करें।

व्रत-पर्व एवं विशेष योग
गणेश चतुर्थी (विनायक चतुर्थी / गणेश जन्मोत्सव) / कलंक चौथ
आज प्रातः 07:08 AM के बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पावन ‘गणेश चतुर्थी’ का महापर्व आरंभ होगा। घर-घर एवं भव्य पंडालों में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना होगी और 10 दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ होगा। आज मध्याह्न काल में गणेश पूजन का विशेष महत्व है। चतुर्थी तिथि के कारण आज चन्द्र-दर्शन वर्जित (मिथ्या कलंक योग) माना जाता है। दोपहर 12:46 PM तक ‘ब्रह्म योग’ रहेगा, जो सिद्धिदायक है। शाम 07:22 PM से भद्रा (विष्टि करण) प्रारंभ होगी।

चित्रा एवं स्वाति नक्षत्र का प्रभाव
दोपहर 01:55 PM तक चित्रा नक्षत्र रहेगा, जिसके स्वामी मंगल देव और अधिपति विश्वकर्मा जी हैं। यह शिल्प, रूप-रंग और नई योजनाओं के निर्माण के लिए श्रेष्ठ है। इसके बाद राहु के स्वामित्व वाले ‘स्वाति नक्षत्र’ का आगमन होगा, जो संतुलन, व्यापारिक सफलता, कूटनीति, स्वतंत्रता और नवीन उपक्रमों के लिए उत्तम माना जाता है।

विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन और रात शुक्र देव की राशि तुला में संचरण करेंगे। सोमवार को तुला राशि के चन्द्रमा और गणेश चतुर्थी का यह पावन संयोग बुद्धि, विवेक, कला, व्यापार और पारिवारिक सुख-समृद्धि में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा। शुभ कार्यों के संपादन के लिए दोपहर के अभिजित मुहूर्त का प्रयोग करें।

आज का राशिफल – 14 सितम्बर 2026 सोमवार

मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
सप्तम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में मधुरता और प्रेम बढ़ेगा। साझेदारी के व्यापार में बड़ा आर्थिक लाभ होने के योग हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा मजबूत होगी।
उपाय – भगवान गणेश को 21 दूर्वा दल अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं।

वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
षष्ठम भाव में चन्द्रमा के गोचर से शत्रुओं और विरोधियों पर आपका प्रभाव रहेगा। नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। स्वास्थ्य में सुधार होगा।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और अक्षत अर्पित करें।

मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
पंचम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से विद्यार्थियों और बौद्धिक कार्यों से जुड़े जातकों को शानदार सफलता मिलेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा। रचनात्मक कार्यों से लाभ होगा।
उपाय – ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें।

कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से घरेलू सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। प्रॉपर्टी, नया मकान या वाहन खरीदने से जुड़ी योजनाएं सफल होंगी। माता का पूरा आशीर्वाद मिलेगा।
उपाय – सोमवार के दिन शिव चालीसा का पाठ करें।

सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
तृतीय भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से पराक्रम और साहस में वृद्धि होगी। छोटे भाई-बहनों का पूरा सहयोग मिलेगा। संपर्क सूत्रों और छोटी यात्राओं से बड़ा लाभ होगा।
उपाय – मस्तक पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं।

कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
धन भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से आर्थिक स्थिति अत्यंत मजबूत रहेगी। फंसा हुआ धन वापस मिलेगा और बैंक बैलेंस बढ़ेगा। वाणी की मधुरता से बिगड़े काम बनेंगे।
उपाय – भगवान गणेश को बेसन के लड्डू चढ़ाएं।

तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में संचरण कर रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। आपके व्यक्तित्व और आकर्षण की सराहना होगी। सोचे हुए कार्य आसानी से पूरे होंगे।
उपाय – श्री सूक्त का पाठ करें और गणेश जी की आरती करें।

वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक और मांगलिक कार्यों में धन खर्च हो सकता है। सुदूर यात्रा के योग बन सकते हैं। वित्तीय लेन-देन में सतर्कता बरतें।
उपाय – शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।

धनु (ये, Yo, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
एकादश भाव में चन्द्रमा के गोचर से आय के नए मार्ग खुलेंगे। पुराने किए गए निवेश से बड़ा आर्थिक लाभ होगा। मित्रों और बड़े भाई-बहनों का भरपूर सहयोग मिलेगा।
उपाय – भगवान विष्णु और गणेश जी को पीले पुष्प अर्पित करें।

मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
दशम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से नौकरी और कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन मिलेगा। व्यापार में नए अनुबंध प्राप्त होंगे।
उपाय – महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जप करें।

कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक और मांगलिक गतिविधियों में मन लगेगा। किसी तीर्थ यात्रा की रूपरेखा बन सकती है। अटके हुए सरकारी काम पूरे होंगे।
उपाय – भगवान शिव को साबुत अक्षत और जल चढ़ाएं।

मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से स्वास्थ्य के प्रति थोड़ी सतर्कता बरतें और वाहन सावधानी से चलाएं। किसी गुप्त स्रोत से अचानक धन लाभ होने की संभावना है।
उपाय – संकट नाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें।

॥ शुभम भवतु ॥

Samvad 24 Office
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