30 अप्रैल 2026 का वैदिक पंचांग
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आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री (वैदिक ज्योतिष, कर्मकांड एवं धर्मनिर्णय विशेषज्ञ)।
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 30 अप्रैल 2026, गुरुवार
कालगणना
सृष्टि संवत् – 1,95,58,85,127
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – उत्तरायण
ऋतु – ग्रीष्म
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – वैशाख
पक्ष – शुक्ल
तिथि – चतुर्दशी सुबह 09:13 तक, तत्पश्चात् पूर्णिमा
वार – गुरुवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – चित्रा रात्रि 01:17 (1 मई) तक, तत्पश्चात् स्वाति
योग – वज्र सुबह 09:15 तक, तत्पश्चात् सिद्धि
करण – वणिज सुबह 09:13 तक, फिर विष्टि (भद्रा) रात्रि 08:30 तक, तत्पश्चात् बव
चंद्र गोचर
चन्द्रमा – कन्या राशि में दोपहर 01:14 तक, तत्पश्चात् तुला राशि
सूर्य, काल एवं मुहूर्त (फर्रुखाबाद स्थानीय समय)
सूर्योदय – 05:46
सूर्यास्त – 07:05
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 11:58 से 12:43 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:05 से 12:57 तक (1 मई)
राहुकाल – दोपहर 01:30 से 03:00 तक
दिशाशूल – दक्षिण दिशा में (गुरुवार होने के कारण)
व्रत-पर्व विवरण
आज वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। आज वैशाख पूर्णिमा, जिसे बुद्ध पूर्णिमा और पीपल पूर्णिमा भी कहा जाता है, का पावन पर्व है। गुरुवार का दिन और पूर्णिमा का संयोग “सर्वार्थ सिद्धि” जैसा फल देता है। आज के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा, पीपल वृक्ष का पूजन और धर्म-कर्म के निमित्त दान करना महापुण्यदायी है। आज ही के दिन भगवान विष्णु ने बुद्ध अवतार लिया था।
विशेष जानकारी
चन्द्रमा आज दोपहर 01:14 पर तुला राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके स्वामी शुक्र देव हैं। आज सिद्धि योग होने से मंत्र दीक्षा और नवीन कार्य प्रारंभ करना अत्यंत शुभ रहेगा। रात्रि 08:30 तक भद्रा का प्रभाव रहेगा, अतः विशेष मांगलिक कार्य (विवाह, मुंडन आदि) इसके उपरांत ही करें। आज के दिन जल से भरा कुंभ (घड़ा) और सत्तू का दान पितरों की अक्षय तृप्ति करता है।

