
संवाद 24 पणजी। आधुनिक जीवनशैली, बदलते सामाजिक परिवेश और वैचारिक मतभेदों के कारण आज के समय में वैवाहिक रिश्तों में बिखराव और तलाक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर सामाजिक चुनौती को देखते हुए गोवा से एक बेहद सराहनीय और अपनी तरह की पहली पहल सामने आई है। गोवा के एक सरकारी कॉलेज ने युवा पीढ़ी को गृहस्थ जीवन की बारीकियों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझाने के लिए एक अनोखा कोर्स शुरू करने का फैसला किया है। इस पहल के तहत छात्र-छात्राओं को यह सिखाया जाएगा कि कैसे शादीशुदा जिंदगी के शुरुआती उतार-चढ़ावों को सूझबूझ से पार किया जाए और एक अटूट रिश्ता बनाया जाए।
गोवा होम साइंस कॉलेज की अनूठी शुरुआत
गोवा के पणजी (Panaji) स्थित ‘गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस’ (Goa College of Home Science) ने एक विशेष सर्टिफिकेट कोर्स तैयार किया है, जिसका नाम ‘मैरिज रेडीनेस’ (Marriage Readiness: Preparedness and Hard Work for Strong Relationships) यानी ‘विवाह की तैयारी’ रखा गया है। यह कोर्स इसी साल 2 दिसंबर से शुरू होकर 17 दिसंबर तक चलेगा। कॉलेज की कार्यवाहक प्राचार्य (Officiating Principal) डॉ. कालिजा कवाल्हो ने इस पहल की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आज के युवाओं को शादी से पहले मानसिक, भावनात्मक और व्यावहारिक रूप से तैयार करना है, ताकि वे आने वाले जीवन की चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
क्यों पड़ी इस कोर्स की जरूरत?
आजकल युवा करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बेहद सजग हैं, लेकिन कई बार आपसी समझ की कमी या उम्मीदों के भारी बोझ के कारण शादी के कुछ समय बाद ही वैवाहिक जीवन में कड़वाहट आ जाती है। डॉ. कालिजा के मुताबिक, “एक शादीशुदा जिंदगी को सफल बनाने के लिए केवल प्यार काफी नहीं होता, बल्कि इसके लिए सही तैयारी, समझदारी और लगातार प्रयास की जरूरत होती है। हमारा यह कोर्स छात्रों को जीवन के इस अहम पड़ाव के लिए व्यावहारिक समझ विकसित करने में मदद करेगा।”
कोर्स में क्या-क्या सिखाया जाएगा?
इस अल्पावधि (Short-term) सर्टिफिकेट कोर्स का पाठ्यक्रम बेहद व्यावहारिक और आज के दौर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
1- रिश्ते की नींव और आपसी संवाद: दो अलग-अलग विचारों वाले व्यक्तियों के बीच बेहतर बातचीत (Communication) और एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने के तरीके।
2- अपेक्षाओं का प्रबंधन (Managing Expectations): शादी के बाद परिवार, पार्टनर और समाज की उम्मीदों के साथ तालमेल बिठाना।
3- विवाद सुलझाना (Conflict Resolution): घरेलू कलह, असहमति या गुस्से की स्थिति में बिना रिश्ता कमजोर किए समस्याओं का समाधान निकालना।
4- पारिवारिक व आर्थिक जिम्मेदारियां: शादी के बाद वित्तीय प्रबंधन (Financial Management) और घरेलू कामों व जिम्मेदारियों का साझा बंटवारा।
5- भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य: वैवाहिक जीवन में एक-दूसरे के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना।
विशेषज्ञों और काउंसलर्स से सीखने का मौका
इस कोर्स में कॉलेज के प्राध्यापकों के अलावा बाहरी विशेषज्ञों, मैरिज काउंसलर्स (Marriage Counselors), मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों को भी आमंत्रित किया जाएगा। वे केस स्टडीज, इंटरैक्टिव सेशन और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए छात्रों की शंकाओं का समाधान करेंगे।
यह कोर्स केवल सैद्धांतिक नहीं होगा, बल्कि इसमें रोल-प्लेइंग और ग्रुप डिस्कशन भी शामिल होंगे, ताकि छात्र वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को समझ सकें।
क्या यह समय की मांग है?
सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि आज के समय में जहां शादियां बहुत जल्दी टूट रही हैं, वहीं इस तरह के पाठ्यक्रम युवाओं को शादी के प्रति अधिक गंभीर और जिम्मेदार बनाएंगे। पहले के समय में संयुक्त परिवारों में बुजुर्ग बच्चों को पारिवारिक जीवन के गुर सिखा देते थे, लेकिन अब एकल परिवारों (Nuclear Families) के दौर में युवाओं को इस मार्गदर्शन की कमी खलती है। गोवा कॉलेज की इस पहल को एक सकारात्मक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह कोर्स सफल रहता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी इस तरह के व्यावहारिक पाठ्यक्रमों को शामिल करने की मांग तेज हो सकती है। युवा पीढ़ी के लिए यह कोर्स न केवल उनके पारिवारिक जीवन को खुशहाल बनाने में मदद करेगा, बल्कि समाज में भी स्थिरता लाएगा।






