
संवाद 24 मणिपुर। पूर्वोत्तर के सीमांत राज्य मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा का नया बवंडर खड़ा हो गया है। राज्य के नोनी जिले में सशस्त्र गुटों के बीच हुई भीषण गोलीबारी में कुकी-जो समुदाय के तीन ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो गई। जंगलों और पहाड़ियों से घिरे केकड़ू नगा गांव के पास हुई इस भीषण मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं।
घंटों गूंजती रहीं गोलियां, जंगल में चली मुठभेड़
स्थानीय सूत्रों व पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार तड़के नोनी जिले के केकड़ू नगा गांव के पास जंगलों में प्रतिद्वंद्वी सशस्त्र गुटों के बीच अचानक भारी गोलीबारी शुरू हो गई। यह गोलीबारी रुक-रुक कर कई घंटों तक चलती रही। दोनों पक्षों की ओर से अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है। गोलीबारी की चपेट में आने से तीन स्थानीय कुकी-जो युवक मौके पर ही ढेर हो गए। घटना की सूचना मिलते ही मणिपुर पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर घने जंगलों की आड़ लेकर भागने में सफल रहे। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और इलाके में सघन कांबिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
कुकी इनपी का आक्रोश: ‘सुरक्षा में चूक और शवों का अपमान’
इस दुखद घटना के बाद कुकी समुदाय की शीर्ष संस्था ‘कुकी इनपी मणिपुर’ (KIM) ने कड़ा रोष जताया है। संगठन ने इस घातक हमले के पीछे नगा उग्रवादी समूह एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) का हाथ होने का गंभीर आरोप लगाया है। कुकी इनपी के सूचना एवं प्रचार सचिव जंघाओलन हाओकिप ने बयान जारी करते हुए कहा कि प्रशासन को संभावित खतरों को लेकर बार-बार चेताया गया था, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। इसी प्रशासनिक विफलता के कारण स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम रक्षकों (Village Volunteers) को अपनी बस्तियों की आत्मरक्षा के लिए आगे आना पड़ा। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने तीनों युवकों की जान लेने के बाद उनके शवों के साथ अमानवीय बर्ताव किया और उनका अपमान किया। संगठन ने राज्य व केंद्र सरकार से मांग की है कि मामले की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों को बेनकाब कर सख्त सजा दी जाए और नोनी के संवेदनशील गांवों में सुरक्षा चौकियां स्थापित की जाएं।
राज्यभर में उबाल: सोओ (SoO) समझौते को खत्म करने की मांग तेज
यह खूनी संघर्ष एक ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है, जब मणिपुर में मैतेयी और नगा समुदाय के संगठन कुकी उग्रवादी समूहों के साथ हुए ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (SoO) समझौते को रद्द करने के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं। राजधानी इंफाल में शनिवार को ‘कोआर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ (COCOMI) के नेतृत्व में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विशाल विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री सचिवालय और राजभवन की ओर कूच करने का प्रयास किया, जिसके चलते पुलिस को बैरिकेडिंग कर आंसू गैस के गोले दागने पड़े। नगा संगठनों ने भी चंदेल और सेनापति जिलों में रैलियां निकालकर आरोप लगाया कि सोओ समझौते की आड़ में हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा दिया जा रहा है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकार को 2008 में किए गए इस समझौते को तुरंत निरस्त कर देना चाहिए। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले मैतेयी समुदाय के लोगों पर हुए घात लगाकर हमले में तीन लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद से घाटी और पहाड़ी दोनों इलाकों में आक्रोश चरम पर है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
नोनी जिले में हुई इस ताजा हिंसा ने राज्य प्रशासन और सुरक्षा तंत्र की पेशानी पर बल ला दिए हैं। पहले से ही मैतेयी और कुकी समुदायों के बीच जातीय तनाव झेल रहे राज्य में अब नगा बहुल क्षेत्रों के पास इस तरह की हिंसक वारदातों का बढ़ना एक नए और बड़े संकट की ओर इशारा कर रहा है। फिलहाल पूरे नोनी और सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।






