
संवाद 24 डेस्क। हिमालय की ऊंची पहाड़ियों से अचानक उठे भारी जलसैलाब ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की धड़कनें तेज कर दी हैं। भूटान के गासा जिले में स्थित खतरनाक शिनटाफु ग्लेशियर झील (Shintaphu Glacial Lake) के अचानक फटने (GLOF – Glacial Lake Outburst Flood) से लाखों क्यूसेक पानी उफान पर आ गया। पहाड़ों से नीचे उतरती इस प्रलयंकारी जलधारा ने भारत-भूटान सीमा से सटे पश्चिम बंगाल और असम के निचले इलाकों में बाढ़ का जबर्दस्त खतरा पैदा कर दिया है। खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के नदी तटीय गांवों से करीब 15,000 ग्रामीणों को रातों-रात सुरक्षित राहत शिविरों और ऊंचे स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।
74 लाख घनमीटर पानी का सैलाब, पुल बहे
भूटान के राष्ट्रीय जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान केंद्र (NCHM) और स्थानीय आपदा प्रबंधन सूत्रों के अनुसार, मो-छू (Mo Chhu) बेसिन में स्थित वाकिला पर्वत के नीचे बनी इस ग्लेशियर झील से लगभग 74 लाख घनमीटर पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकला है। यह विशाल जलराशि मो-छू नदी से होते हुए पुनात्सांगछू नदी में समा गई, जो आगे चलकर भारत में संकोश नदी के रूप में प्रवेश करती है।
सैलाब की प्रचंड रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रास्ते में आने वाले दो बेली ब्रिज (Bailey Bridges) पानी के तेज बहाव में बह गए। पानी पुनाखा जोन्ग के पास से गुजरते हुए सीधे निचले इलाकों की तरफ बढ़ा, जिसके बाद भूटान प्रशासन ने नदी तट पर आपातकालीन चेतावनी सायरन बजाकर लोगों को सावधान किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुनात्सांगछू जलविद्युत परियोजना (PHPA-II) बांध के सभी गेट पहले ही खोल दिए गए ताकि जलाशय पर दबाव न बने।
संकोश नदी के मुहाने पर अलर्ट, युद्धस्तर पर रेस्क्यू
जैसे ही यह खबर भारतीय अधिकारियों तक पहुंची, पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी तथा असम के धुबरी जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। संकोश नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि की आशंका को देखते हुए कुमारग्राम ब्लॉक, पकड़ीगुड़ी, भोलका और कुमारग्राम चाय बागान समेत संवेदनशील जंगलों व नदी किनारे बसे गांवों में खाली कराने का अभियान छेड़ दिया गया। पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने देर रात प्रशासन को मैदान में उतारा और ग्रामीणों से तुरंत ऊंचे सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। आपदा प्रबंधन टीमें, नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक, पुलिस और ग्राम पंचायत प्रतिनिधि रातभर लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी देते रहे और लोगों को सुरक्षित शिविरों तक पहुंचाया। अलीपुरद्वार के सांसद मनोज तिग्गा ने भी नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नदी में किसी भी असामान्य हलचल की सूचना तत्काल प्रशासनिक नियंत्रण कक्ष को दें।
असम के धुबरी में भी बढ़ाई गई चौकसी
संकोश नदी बंगाल की सीमा पार कर असम के धुबरी में ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र में मिलती है। लिहाजा, असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) भी पूरी तरह सतर्क है। धुबरी जिला प्रशासन ने नदी किनारे बसे चर-क्षेत्रों (नदी के द्वीपों) पर रहने वाले लोगों और मछुआरों को नदी से दूर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन लगातार भूटान और बंगाल के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए है ताकि पानी के प्रवाह की गति और स्तर की सटीक जानकारी समय रहते मिल सके।
ग्लेशियर झीलों का बढ़ता संकट
पर्यावरण वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्र की हिमनद झीलें तेजी से अस्थिर हो रही हैं। मो-छू बेसिन की शिनटाफु झील भूटान की उन 17 अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक ग्लेशियर झीलों में शुमार है, जिनके फटने का खतरा हमेशा बना रहता है। जब इन झीलों के प्राकृतिक मोरेन (बर्फ व मलबे के तटबंध) कमजोर होकर टूटते हैं, तो कुछ ही मिनटों में लाखों टन पानी और मलबा घाटी में नीचे उतर आता है। फिलहाल दोनों देशों के जल संसाधन विभाग नदी के गेज स्टेशनों पर जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। राहत की बात यह है कि समय रहते सूचना मिलने और तत्परता से 15 हजार लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाए जाने के कारण अब तक किसी भी तरह की जनहानि की खबर नहीं आई है। प्रशासन स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर बनाए हुए है।






