
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से तनाव का कारण बने खालिस्तान समर्थक तत्वों और अलगाववादी गतिविधियों पर भारत सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने एक साक्षात्कार के दौरान कड़े शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत किसी भी मुद्दे पर शांतिपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति या विचार रखने से भारत को कोई राजनीतिक आपत्ति नहीं है। हालांकि, अभिव्यक्ति की इस आड़ में आतंकवाद, हिंसक वारदातों, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उच्चायुक्त ने स्पष्ट किया कि अलगाववाद के नाम पर हिंसा फैलाने और आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
शांतिपूर्ण विचार और अपराध के बीच खींचनी होगी स्पष्ट लकीर
भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने सीपैक (CPAC) को दिए साक्षात्कार में कहा कि चाहे कनाडाई नागरिक हों, सिख समुदाय के लोग हों या भारतीय, सभी को अपनी विचारधारा और मान्यताओं को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत में भी पिछले चार दशकों से विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने विचार रखते रहे हैं, इसलिए राजनीतिक रूप से भारत को इससे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब इस आंदोलन में आपराधिक गिरोहों, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों के नेटवर्क और जबरन वसूली को शामिल कर लिया जाता है। उच्चायुक्त ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत के प्रधानमंत्री की हत्या दर्शाने वाले हिंसक पोस्टर और तस्वीरों के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि खुली हिंसा और नफरत का प्रदर्शन है। उन्होंने कनाडा सरकार से आग्रह किया कि वह समझे कि यह अलगाववादी और हिंसक गतिविधियां उसकी अपनी धरती पर फल-फूल रही हैं, न कि भारत में।
तथाकथित जनमत संग्रह से पहले भारत का कड़ा रुख
भारतीय उच्चायुक्त का यह स्पष्ट बयान इस महीने कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) द्वारा प्रस्तावित तथाकथित जनमत संग्रह से ठीक पहले सामने आया है। इससे पूर्व, नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया था कि भारत विदेशी धरती पर होने वाली सभी भारत-विरोधी गतिविधियों की कड़े शब्दों में निंदा करता है। हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया था कि अलगाववादी गुटों द्वारा हथियारों के साथ प्रशिक्षण और हिंसा भड़काने की साजिशें रची जा रही हैं, जिसको लेकर भारत ने कनाडा के सुरक्षा तंत्र के समक्ष गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
संबंधों में सुधार की संभावनाओं के बीच सुरक्षा समन्वय अहम
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में उभरे कूटनीतिक गतिरोध के बाद अब संबंधों को पटरी पर लाने के प्रयास चल रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच हाल ही में सुरक्षा संवाद का दौर आयोजित हुआ, जिसमें संगठित अपराध, आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ समन्वय मजबूत करने पर सहमति बनी है। भारतीय दूत ने स्पष्ट किया कि यदि कनाडा अपनी जमीन से संचालित हो रहे आपराधिक और चरमपंथी नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक साझेदारी और कूटनीतिक संबंध नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। भारत की यह दो टूक प्रतिक्रिया साफ संकेत देती है कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।






