
संवाद 24 महाराष्ट्र। लोक सेवा आयोग (MPSC) की कार्यप्रणाली, कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े विवादों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पुणे में पिछले 10 दिनों से लगातार दिन-रात आंदोलन कर रहे हज़ारों प्रतियोगी छात्रों के आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने आयोग में आमूलचूल प्रशासनिक सुधार और निष्पक्ष जांच के लिए एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इस समिति में अपनी कड़क और बेदाग कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व वर्तमान एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे को सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार के इस बड़े फैसले और ठोस आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना अनशन और आंदोलन समाप्त करने का ऐलान कर दिया।
पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच पैनल
राज्य सरकार द्वारा गठित इस जांच व सुधार समिति की कमान पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को सौंपी गई है। समिति में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाइक और पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। वहीं प्रशासनिक तंत्र को दुरुस्त करने और जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए तुकाराम मुंडे को इसका सचिव नियुक्त किया गया है। यह समिति एमपीएससी की मौजूदा परीक्षा प्रणाली में कमियों, भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली कथित धांधलियों, पेपर लीक की शिकायतों और परीक्षा कैलेंडर के क्रियान्वयन की गहन जांच करेगी। समिति को दो माह के भीतर अपनी व्यापक रिपोर्ट और सुधारों से जुड़ी सिफारिशें शासन को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
अध्यक्ष छुट्टी पर गए, तत्कालीन सचिव का तबादला
छात्रों के बढ़ते दबाव और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग के शीर्ष स्तर पर भी तुरंत कड़े प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक अवकाश (छुट्टी) पर जाने की घोषणा कर दी है, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी तरह के पक्षपात का संदेह न रहे। इसके अतिरिक्त, आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए आयोग के तत्कालीन सचिव महेंद्र हरपालकर का भी तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया है। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया पर भी सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया है, जिससे लंबे समय से तनावपूर्ण बना माहौल शांत हो सका।
पुणे की सड़कों से उठी थी बदलाव की आवाज़
पुणे को महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र माना जाता है। पिछले 10 दिनों से यहां हजारों छात्र सड़कों पर बैठकर पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, समय पर भर्ती प्रक्रिया और गड़बड़ियों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे थे। विपक्षी दलों के कई प्रमुख नेताओं ने भी धरना स्थल का दौरा कर छात्रों की मांगों का समर्थन किया था, जिससे यह मामला राज्यव्यापी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया था। छात्रों की विशेष मांग थी कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी ऐसे सख्त और ईमानदार अधिकारी की निगरानी में हो जिसकी छवि व्यवस्था सुधारक की रही हो। तुकाराम मुंडे की नियुक्ति को इसी भरोसे की बहाली के रूप में देखा जा रहा है। प्रतियोगी छात्रों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब प्रदेश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तंत्र में वास्तविक और स्थायी सुधार देखने को मिलेंगे।






