
संवाद 24 तेलंगाना। नलगोंडा जिले से गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को कलंकित और स्तब्ध कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहां एक निजी स्कूल की महिला डायरेक्टर एवं शिक्षिका की उनके ही घर में घुसकर बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने का आरोप उसी स्कूल में पढ़ने वाले 10वीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र और उसके साथियों पर लगा है। अनुशासन और पढ़ाई को लेकर लगाई गई एक मामूली डांट का अंजाम इतना वीभत्स होगा, इसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी।
अकेलेपन का फायदा उठाकर घर में दिया वारदात को अंजाम
घटना नलगोंडा जिले के कोंडामल्लेपल्ली मंडल की है। 49 वर्षीय कल्लू रूपा रेड्डी स्थानीय नागार्जुन स्कूल में बतौर डायरेक्टर और शिक्षिका कार्यरत थीं। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, वारदात के वक्त रूपा रेड्डी अपने घर पर अकेली थीं। उनके पति किसी निजी काम के सिलसिले में हैदराबाद गए हुए थे। जब पति ने कई बार फोन करने के बाद भी रूपा रेड्डी से कोई संपर्क नहीं हो पाया, तो उन्हें अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद उन्होंने पड़ोसियों को घर जाकर देखने के लिए कहा। जब पड़ोसियों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर देखा, तो घर के भीतर का खौफनाक मंजर देखकर सभी के होश उड़ गए। शिक्षिका का खून से लथपथ शव जमीन पर पड़ा हुआ था और उनके गले व पेट पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे।
सीसीटीवी फुटेज से खुला खौफनाक राज, नाबालिग हिरासत में
शुरुआत में बिना किसी सुराग के अंधे मोड़ पर दिख रही इस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए नलगोंडा पुलिस ने स्पेशल टीमों का गठन किया। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Footage) की गहन पड़ताल और करीब 80 से अधिक संदिग्धों व परिचितों से पूछताछ के बाद पुलिस को एक अहम सुराग मिला। जांच की सुई जब स्कूल के ही छात्रों की ओर घूमी, तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी छात्र सहित संलिप्त नाबालिगों को इब्राहिमपटनम इलाके से हिरासत में ले लिया। पुलिसिया पूछताछ में प्राथमिक तौर पर यह बात सामने आई है कि स्कूल में अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार को लेकर डायरेक्टर रूपा रेड्डी ने छात्र को डांट लगाई थी, जिससे वह गहरी व्यक्तिगत रंजिश पाल बैठा था। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने हत्या के बाद घर से नकदी भी गायब करने की कोशिश की थी।
समाज और शिक्षा जगत के सामने गंभीर सवाल
मृतका के बेटे की औपचारिक शिकायत पर कोंडामल्लेपल्ली थाने में हत्या का मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, इस खौफनाक घटना ने पूरे समाज, अभिभावकों और शिक्षण व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। अल्पायु में बच्चों के भीतर पनपता अनियंत्रित गुस्सा, हिंसक प्रवृत्ति और बदला लेने की मानसिकता एक बेहद गंभीर और विचारणीय मुद्दा बन चुकी है। शिक्षाविदों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों के मानसिक विकास और भावनात्मक संतुलन पर समय रहते ध्यान देना अब प्राथमिक जरूरत बन गया है, ताकि शैक्षणिक संस्थान ऐसे खौफनाक अपराधों की छाया से मुक्त रह सकें।






