समझौता एक्सप्रेस से लाया था नकली नोटों की खेप: 14 साल बाद मेरठ कोर्ट ने ‘मेहरबान’ को सिखाया तगड़ा सबक!

संवाद 24 मेरठ। भारत की अर्थव्यवस्था को अंदरूनी रूप से खोखला करने और देश में नकली मुद्रा का जाल फैलाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कानूनी हंटर पूरी ताकत से चला है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक दशक से भी अधिक पुराने और बेहद गंभीर मामले में अदालत ने देशविरोधी साजिश रचने वाले एक बड़े अपराधी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पाकिस्तान के रास्ते भारत में जाली नोटों (Fake Currency) की तस्करी करने वाले शातिर आरोपी मेहरबान को मेरठ की एक विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए 5 साल के कड़े कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर भारी-भरकम अर्थदंड भी लगाया है।

क्या है पूरा मामला और कैसे हत्थे चढ़ा था आरोपी?
यह पूरा मामला साल 2012 का है, जब उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और मेरठ पुलिस की संयुक्त टीम को देश में जाली नोटों की एक बड़ी खेप खपाए जाने के इनपुट मिले थे। खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने जाल बिछाया और मेहरबान नाम के इस शातिर तस्कर को धर दबोचा था। अदालती दस्तावेजों और अभियोजन पक्ष के अनुसार, मैडीकल थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी (SO) धर्मेंद्रपाल ने मेहरबान के खिलाफ देश के खिलाफ साजिश रचने और जाली मुद्रा रखने की गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच में जो सच सामने आया, उसने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए थे। आरोपी मेहरबान भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली ऐतिहासिक ‘समझौता एक्सप्रेस’ ट्रेन का इस्तेमाल कर सीमा पार से जाली भारतीय नोटों की तस्करी करता था। वह पाकिस्तान से नकली नोट लाता और उन्हें मेरठ सहित देश के विभिन्न स्थानीय और व्यस्त बाजारों में असली नोटों के रूप में खपा देता था।

14 साल के लंबे इंतजार के बाद आया ऐतिहासिक फैसला
इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानून की चौखट पर न्याय मिलने में करीब 14 साल का लंबा समय लगा। आखिरकार, मेरठ के अपर जिला जज (ADJ) जयवीर सिंह नागर की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों को देखने के बाद मेहरबान को दोषी ठहराया। अदालत ने देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े इस खिलवाड़ को अक्षम्य मानते हुए मेहरबान को 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 1.80 लाख रुपये का भारी जुर्माना (अर्थदंड) भी लगाया गया है। सरकारी वकील (ADGC) फरजाना मकसूद ने बताया कि अदालत के इस कड़े रुख से जाली नोटों का कारोबार करने वाले सिंडिकेट को एक कड़ा संदेश जाएगा। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद पुलिस ने दोषी मेहरबान को कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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