
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सुंदरता के दम पर दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। हालांकि, तकनीकी प्रगति और ई-वीजा (e-Visa) जैसी बेहतरीन आधुनिक सुविधाओं की शुरुआत के बावजूद, भारत का वीजा सिस्टम अब भी कई वैश्विक देशों की तुलना में बेहद जटिल बना हुआ है। अब इस व्यवस्था में एक बड़े और क्रांतिकारी बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। देश की नीति बनाने वाली शीर्ष संस्था ‘नीति आयोग’ (NITI Aayog) ने सरकार को अपनी एक ताजा रिपोर्ट में वीजा नियमों को पूरी तरह से सरल, व्यापक और पर्यटन-अनुकूल बनाने की एक मजबूत सिफारिश की है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत का दबदबा और अधिक बढ़ सके।
वैश्विक स्तर पर पिछड़ न जाए भारत, इसलिए जरूरी है सरलीकरण
नीति आयोग द्वारा जारी की गई ‘पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में वृद्धि की संभावनाएं सृजित करना’ शीर्षक वाली एक विशेष रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की पहुंच बढ़ाने के लिए भारत को अपने नियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना ही होगा। रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत वैश्विक पर्यटन बाजार में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना चाहता है, तो उसे वीजा मंजूरी की लंबी और थकाऊ प्रक्रियाओं को हर हाल में आसान बनाना होगा। नीति आयोग का मानना है कि दुनिया के तमाम टूरिस्ट हब देश अपने यहाँ पर्यटकों के स्वागत के लिए बेहद लचीली नीतियां अपनाते हैं, और भारत को भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
लाइसेंस राज और अनुपालन की जटिलताओं पर बरसे केंद्रीय मंत्री
इसी महत्वपूर्ण रिपोर्ट को जारी करने के मुख्य कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी पर्यटन और आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को खुलकर स्वीकार किया। केंद्रीय मंत्री ने बेबाकी से कहा कि वर्तमान में भारत के भीतर आतिथ्य उद्योग से जुड़े व्यवसायियों या होटल व्यवसाय शुरू करने वाले निवेशकों को कई अलग-अलग तरह के लाइसेंस लेने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि यह जटिल और लंबी अनुपालन प्रक्रियाएं निवेशकों के मन में एक प्रकार की अनिश्चितता और डर का माहौल पैदा करती हैं। इसकी वजह से कई बड़े निवेशक इस क्षेत्र में अपनी पूंजी लगाने से कतराने लगते हैं। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नियमों या सुरक्षा संबंधी अनुपालन आवश्यकताओं को पूरी तरह से खत्म करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। बल्कि उनका मुख्य जोर इस बात पर है कि इन सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शी, डिजिटल, समय-सीमा (Time-bound) के भीतर पूरा होने वाला और बेहद सरल बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे तमाम तरह की आवश्यक मंजूरियां काम शुरू होने से पहले ही एकल खिड़की (Single Window) के जरिए आसानी से मिल सकें।
गूगल के साथ हुआ ऐतिहासिक करार, अब एआई (AI) चमकाएगा भारतीय पर्यटन का चेहरा
पर्यटन क्षेत्र की इसी रफ्तार को पंख देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक और बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। नीति आयोग की रिपोर्ट के साथ-साथ पर्यटन मंत्रालय ने दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी ‘गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ एक बेहद ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। नई दिल्ली में आयोजित हुए एक विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की गरिमामयी उपस्थिति में इस डील को अंतिम रूप दिया गया। इस महत्वपूर्ण समझौते का सीधा उद्देश्य अत्याधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) और डेटा आधारित सटीक जानकारी (Data-driven Insights) का इस्तेमाल करके भारतीय पर्यटन स्थलों का वैश्विक स्तर पर डिजिटल प्रचार-प्रसार करना है। इस एमओयू के जरिए मंत्रालय और गूगल इंडिया मिलकर एक ऐसा आधुनिक ढांचा तैयार करेंगे, जिसके तहत डिजिटल पर्यटन संवर्धन (Digital Tourism Promotion), पर्यटन क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का क्षमता निर्माण और विदेशी पर्यटकों की भारत के प्रति सहभागिता बढ़ाने के लिए उभरती हुई नई तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जा सके। सरकार के इन दोहरे प्रयासों से साफ है कि आने वाले दिनों में भारत का पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह से हाईटेक होने जा रहा है।






