BRICS में क्यों नहीं बन पाई सहमति? भारत ने फिर दोहराया फिलिस्तीन समर्थन
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संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट को लेकर BRICS देशों की अहम बैठक में एकजुट रुख सामने नहीं आ सका। सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेदों के कारण कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया। हालांकि, इस बीच भारत ने एक बार फिर साफ किया कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर उसका रुख पहले जैसा ही है और वह फिलिस्तीनी जनता के समर्थन में खड़ा है।
क्यों नहीं बन पाई सहमति?
सूत्रों के अनुसार, BRICS देशों – ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। खासकर उन देशों के बीच मतभेद ज्यादा रहे जो सीधे तौर पर इस संघर्ष से जुड़े हैं। यही वजह रही कि बैठक के बाद कोई सर्वसम्मत दस्तावेज जारी नहीं किया जा सका।
भारत का रुख साफ – फिलिस्तीन को समर्थन जारी
भारत ने इस बैठक में भी अपना पुराना और संतुलित रुख दोहराया। सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलिस्तीन के मुद्दे पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। भारत लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का समर्थक रहा है और फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता का समर्थन करता है।
चेयर स्टेटमेंट से ही काम चलाना पड़ा
चूंकि सभी सदस्य देश एक राय पर नहीं पहुंच सके, इसलिए बैठक के अंत में केवल “चेयर स्टेटमेंट” जारी किया गया। इसमें चर्चा का सार दिया गया, लेकिन कोई ठोस सामूहिक रुख सामने नहीं आया।
संघर्ष से जुड़े देशों के कारण बढ़ी जटिलता
इस पूरे विवाद में ईरान, अमेरिका, इज़राइल और खाड़ी देशों के बीच चल रहे तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। BRICS के कुछ सदस्य इन घटनाओं से सीधे प्रभावित हैं, जिससे उनके रुख अलग-अलग रहे और सहमति बनाना मुश्किल हो गया।
भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन की चुनौती
भारत के लिए यह स्थिति एक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। एक ओर वह इज़राइल के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध रखता है, वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीन के समर्थन की अपनी ऐतिहासिक नीति भी जारी रखता है। ऐसे में भारत की कूटनीति “संतुलित और व्यावहारिक” नजर आती है।






