IPS Gaurav Tripathi Success Story: IIT Roorkee से UPSC तक का सफर, दो इंटरव्यू में असफलता के बाद चौथे प्रयास में AIR 226

संवाद 24 डेस्क। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी IAS, IPS और अन्य सेवाओं में जाने का सपना लेकर परीक्षा देते हैं, लेकिन अंतिम चयन तक पहुंचने वालों की संख्या सीमित रहती है। ऐसे में IPS अधिकारी गौरव त्रिपाठी की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए खास मायने रखती है, जो एक-दो असफलताओं के बाद अपने लक्ष्य को लेकर संशय में पड़ जाते हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से आने वाले गौरव ने IIT Roorkee से B.Tech किया, UPSC की तैयारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे और आखिरकार UPSC Civil Services Examination 2022 में चौथे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 226 हासिल की।

अखबार की एक खबर ने बदल दी करियर की दिशा
गौरव त्रिपाठी का सिविल सेवा की ओर झुकाव किसी पारिवारिक परंपरा से नहीं हुआ था। उनके पिता गोरखपुर में जनरल स्टोर चलाते थे। पढ़ाई के दौरान जब गौरव ने अखबारों में सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों की खबरें पढ़ीं, तो उनके मन में भी UPSC को लेकर जिज्ञासा पैदा हुई। यही जिज्ञासा आगे चलकर उनके करियर का लक्ष्य बन गई।
गौरव की शुरुआती पढ़ाई गोरखपुर में हुई और इसके बाद उन्होंने IIT Roorkee से B.Tech किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का निर्णय लिया। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि एक ओर उनके सामने इंजीनियरिंग करियर का स्पष्ट रास्ता था, वहीं दूसरी ओर UPSC जैसी अनिश्चित और बेहद प्रतिस्पर्धी परीक्षा थी। उन्होंने दूसरे रास्ते को चुना और धीरे-धीरे अपनी तैयारी को व्यवस्थित करना शुरू किया।

पहली बड़ी सीख—सिर्फ किताबें जमा करना तैयारी नहीं
UPSC की तैयारी शुरू करते समय गौरव ने भी बुनियादी पुस्तकों और NCERT से शुरुआत की। उनका जोर किताबों की संख्या बढ़ाने के बजाय सीमित और उपयोगी अध्ययन सामग्री को बार-बार समझने पर था। उन्होंने तैयारी में NCERT को आधार बनाया और टॉपर्स द्वारा सुझाई गई मानक पुस्तकों का इस्तेमाल किया। साथ ही नोट्स बनाने और समयबद्ध तरीके से प्रश्न हल करने पर ध्यान दिया।
उनकी रणनीति का एक अहम हिस्सा था कि पढ़ाई को केवल पढ़ने तक सीमित न रखा जाए। समय बांधकर प्रश्न हल करने से उन्हें अपनी गति और सटीकता दोनों को परखने में मदद मिली। यही तरीका आगे चलकर परीक्षा के दबाव से निपटने में उपयोगी साबित हुआ।

UPSC के पहले दो प्रयासों में इंटरव्यू तक पहुंचे, फिर भी नहीं हुआ चयन
गौरव की कहानी का सबसे प्रेरक पक्ष उनकी असफलताओं का सिलसिला है। उपलब्ध इंटरव्यू के अनुसार वह अपने शुरुआती दो प्रयासों में Prelims और Mains की बाधा पार करके इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। यानी उनकी तैयारी उस स्तर तक पहुंच चुकी थी जहां वह देश की सबसे कठिन परीक्षा के अंतिम चरण में प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, फिर भी मंजिल हाथ नहीं लगी।
ऐसे परिणाम के बाद बहुत से अभ्यर्थी परीक्षा छोड़ने का फैसला कर सकते हैं। लेकिन गौरव ने अपनी रणनीति की कमियों को पहचानने और उनमें बदलाव करने का रास्ता चुना। उनके लिए असफलता लक्ष्य छोड़ने का कारण नहीं, बल्कि तैयारी में सुधार का संकेत बनी।

PCS में सफलता के बावजूद UPSC का लक्ष्य नहीं छोड़ा
गौरव के करियर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव PCS परीक्षा से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 2020 में उन्होंने PCS में स्थान हासिल किया, लेकिन उसे ज्वाइन नहीं किया। उन्होंने UPSC के लक्ष्य को प्राथमिकता दी और अपनी तैयारी जारी रखी।
यह निर्णय आसान नहीं रहा होगा। एक सरकारी सेवा का अवसर हाथ में होने के बावजूद उसे छोड़कर फिर से UPSC की तैयारी करना जोखिम भरा फैसला था। लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि गौरव के लिए लक्ष्य केवल सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि अपनी पसंद की सिविल सेवा तक पहुंचना था।

हिंदी माध्यम की चुनौती के बीच बदली रणनीति
गौरव की तैयारी का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका हिंदी माध्यम से UPSC परीक्षा की ओर बढ़ना था। उनके अनुसार हिंदी माध्यम के लिए गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त अध्ययन सामग्री उपलब्ध होना एक चुनौती थी। इस समस्या के बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी।
उनके सामने एक और चुनौती वैकल्पिक विषय की थी। उपलब्ध विवरणों के अनुसार शुरुआती प्रयासों में Geography उनके लिए अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका। उन्होंने 2021 में ब्रेक लिया और चौथे प्रयास में अपने वैकल्पिक विषय में बदलाव किया। इसके साथ ही उन्होंने ऑनलाइन मार्गदर्शन और तैयारी के तरीके में भी परिवर्तन किया।
यह बदलाव उनकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा था। प्रतियोगी परीक्षा में केवल मेहनत करना पर्याप्त नहीं होता; यह भी देखना पड़ता है कि मेहनत सही दिशा में जा रही है या नहीं।

चौथे प्रयास में आया निर्णायक मोड़
लगातार असफलताओं और रणनीति में बदलाव के बाद गौरव ने UPSC CSE 2022 में अपना चौथा प्रयास किया। इस बार परिणाम उनके पक्ष में रहा और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 226 हासिल की। यही वह सफलता थी जिसने IIT से निकले एक इंजीनियर को IPS अधिकारी बनने की दिशा में आगे बढ़ाया।
उनकी सफलता को केवल एक परीक्षा में हासिल की गई रैंक के रूप में देखना अधूरा होगा। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने असफल प्रयासों के बाद अपनी तैयारी को दोबारा परखा, वैकल्पिक विषय में बदलाव किया और अपनी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश की।

101 किलो वजन से 85 किलो तक, मानसिक और शारीरिक संतुलन पर भी जोर
UPSC की तैयारी के दौरान गौरव को केवल अकादमिक चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ा। लगातार तनाव और पढ़ाई के दबाव के बीच उनका वजन एक समय 101 किलोग्राम तक पहुंच गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी शारीरिक फिटनेस पर भी ध्यान दिया और करीब तीन महीने में 16 किलोग्राम वजन कम करके लगभग 85 किलोग्राम तक पहुंचाया।
उनकी कहानी का यह हिस्सा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक पढ़ाई करते हुए यदि स्वास्थ्य, नींद और मानसिक संतुलन की अनदेखी की जाए तो तैयारी पर भी असर पड़ सकता है। गौरव ने अपने अनुभव से यह संकेत दिया कि परीक्षा की तैयारी के साथ शरीर और मन को स्वस्थ रखना भी जरूरी है।

परिवार का साथ बना मुश्किल दौर में ताकत
गौरव ने अपनी यात्रा में परिवार के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके पिता की सामान्य दुकान थी और परिवार की आर्थिक-सामाजिक परिस्थितियां किसी विशेष विशेषाधिकार वाली पृष्ठभूमि की नहीं थीं। इसके बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई और लक्ष्य का समर्थन किया। कठिन दौर में उनके भाइयों का सहयोग भी उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।
UPSC जैसी लंबी तैयारी में परिवार का भावनात्मक सहयोग कई बार अभ्यर्थी को असफलता के बाद दोबारा खड़े होने की ताकत देता है। गौरव की कहानी में यह पहलू भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

तैयारी के साथ बनाया UPSC Hindi 4 CS चैनल
UPSC की तैयारी के दौरान गौरव ने UPSC Hindi 4 CS नाम से एक चैनल भी शुरू किया। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआत में इसे बनाने के पीछे आर्थिक कारण भी थे। बाद में यह प्लेटफॉर्म UPSC अभ्यर्थियों तक तैयारी से जुड़ी जानकारी पहुंचाने का माध्यम बना।
यह पहल यह भी दिखाती है कि परीक्षा की तैयारी के दौरान अभ्यर्थी अपनी पढ़ाई के अनुभवों को किस तरह दूसरे विद्यार्थियों तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि किसी भी अभ्यर्थी को दूसरे व्यक्ति की रणनीति को हूबहू अपनाने के बजाय अपनी क्षमता, समय और कमजोरियों के अनुसार तैयारी की योजना बनानी चाहिए।

गौरव त्रिपाठी की कहानी से UPSC अभ्यर्थी क्या सीखें?
गौरव त्रिपाठी की यात्रा से सबसे बड़ी सीख यह है कि UPSC जैसी परीक्षा में पहली असफलता को अंतिम परिणाम मान लेना जरूरी नहीं। उन्होंने शुरुआती प्रयासों में इंटरव्यू तक पहुंचकर भी सफलता हासिल नहीं की, PCS में अवसर मिलने के बावजूद UPSC का लक्ष्य जारी रखा, वैकल्पिक विषय में बदलाव किया और चौथे प्रयास में AIR 226 हासिल की।
उनकी तैयारी के अनुभव से कुछ व्यावहारिक बातें सामने आती हैं—NCERT और मानक पुस्तकों से मजबूत आधार बनाना, सीमित अध्ययन सामग्री पर पकड़ बनाना, समयबद्ध प्रश्न अभ्यास करना, नोट्स तैयार करना, असफलता के कारणों का विश्लेषण करना और जरूरत पड़ने पर रणनीति बदलना। इसके साथ स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को नजरअंदाज न करना भी उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण संदेश है।

सफलता से ज्यादा महत्वपूर्ण है असफलता के बाद बदलाव
गौरव त्रिपाठी की कहानी को केवल “IIT से IPS” बनने की सफलता-कथा कहना आसान है, लेकिन इसकी असली ताकत उन वर्षों में छिपी है जब परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया। अखबार की एक खबर से शुरू हुआ सपना IIT Roorkee तक पहुंचा, फिर UPSC की तैयारी में असफलताओं का सामना हुआ और अंततः चौथे प्रयास में AIR 226 के साथ सफलता मिली।
उनकी यात्रा UPSC अभ्यर्थियों को यह संदेश देती है कि असफलता के बाद वही रणनीति दोहराते रहना और रणनीति की समीक्षा कर आगे बढ़ना—इन दोनों में बड़ा अंतर है। गौरव ने अपनी कमियों को पहचाना, वैकल्पिक विषय बदला, तैयारी के तरीके में सुधार किया और लक्ष्य पर टिके रहे। यही निरंतरता उनकी कहानी को उन हजारों युवाओं के लिए प्रासंगिक बनाती है, जो आज UPSC की तैयारी कर रहे हैं और किसी एक असफल परिणाम को अपनी पूरी यात्रा का अंत मान बैठते हैं।

Geeta Singh
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