NEET टॉपर ने बताया सफलता का राज बिना फिक्स टाइमटेबल के NEET में AIR 3, कौस्तव की तैयारी का अनोखा तरीका जानकर चौंक जाएंगे।

संवाद 24 डेस्क। NEET जैसी देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सफलता के लिए आमतौर पर लंबे घंटे पढ़ाई, सख्त टाइमटेबल और लगातार रिवीजन को जरूरी माना जाता है। लेकिन NEET UG 2023 में 716 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 3 पाने वाले कौस्तव बौरी की तैयारी की कहानी कुछ अलग थी। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए कोई कठोर फिक्स टाइमटेबल नहीं बनाया था। इसके बजाय उनका जोर था—जब पढ़ें, पूरी एकाग्रता से पढ़ें, छोटे लक्ष्य बनाएं, लगातार सवाल हल करें और हर मॉक टेस्ट के बाद अपनी गलतियों को पहचानकर उन्हें सुधारें। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के आधिकारिक परिणाम रिकॉर्ड में कौस्तव बौरी के 716/720 अंक, 99.9998528 परसेंटाइल और AIR 3 दर्ज है।

716 अंक और AIR 3, लेकिन तैयारी का तरीका था बेहद सरल
NEET UG 2023 में कौस्तव बौरी ने 720 में से 716 अंक हासिल किए। आधिकारिक परिणाम के अनुसार उनसे ऊपर दो अभ्यर्थियों ने 720-720 अंक प्राप्त किए थे, जबकि कौस्तव तीसरे स्थान पर रहे। उनका परसेंटाइल 99.9998528 दर्ज किया गया।
कौस्तव की कहानी इसलिए भी ध्यान खींचती है क्योंकि उन्होंने सफलता के लिए किसी एक जादुई तकनीक का दावा नहीं किया। उनके इंटरव्यू में सामने आया कि उनकी रणनीति लगातार पढ़ाई, विषयवार छोटे लक्ष्य, प्रश्नों की नियमित प्रैक्टिस, NCERT पर मजबूत पकड़ और मॉक टेस्ट के विश्लेषण पर आधारित थी। यानी उनकी तैयारी का केंद्र “कितने घंटे पढ़ा” से अधिक “जो पढ़ा, उसे कितनी एकाग्रता से समझा” था।

फिक्स टाइमटेबल नहीं, लेकिन पढ़ाई में पूरा फोकस
कौस्तव ने अलग-अलग बातचीत में बताया कि उनकी पढ़ाई का कोई कठोर दैनिक टाइमटेबल नहीं था। वह अपनी सुविधा और जरूरत के अनुसार पढ़ते थे, लेकिन पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकने नहीं देते थे। यही तरीका उनकी तैयारी की सबसे अलग विशेषताओं में से एक था।
यह रणनीति उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देती है जो टाइमटेबल बनाने में इतना समय लगा देते हैं कि वास्तविक पढ़ाई प्रभावित होने लगती है। कौस्तव के अनुभव से यह जरूर स्पष्ट होता है कि टाइमटेबल अपने आप में सफलता की गारंटी नहीं है। पढ़ाई के समय एकाग्रता, लक्ष्य की स्पष्टता और नियमित अभ्यास अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

बड़े सिलेबस को छोटे लक्ष्यों में बांटा
NEET का विशाल सिलेबस विद्यार्थियों के सामने अक्सर सबसे बड़ी चुनौती बनता है। कौस्तव ने इस समस्या का समाधान पूरे सिलेबस को एक साथ देखने के बजाय उसे छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटकर किया।
वह किसी महीने के लिए Human Physiology पूरा करने का लक्ष्य तय करते थे तो किसी सप्ताह के लिए Inorganic Chemistry के निर्धारित हिस्से को पूरा करने पर ध्यान देते थे। विषय या अध्याय पूरा करने के बाद उसी से जुड़े प्रश्नों की प्रैक्टिस भी करते थे। इससे पढ़ाई केवल किताब पढ़ने तक सीमित नहीं रहती थी, बल्कि तुरंत यह भी पता चलता था कि विषय कितना समझ में आया है।

NCERT को बनाया तैयारी का मजबूत आधार
कौस्तव की तैयारी में NCERT पुस्तकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने NEET अभ्यर्थियों को भी NCERT को पूरी तरह पढ़ने की सलाह दी थी। परीक्षा से कुछ महीने पहले उन्होंने NCERT की गहन पुनरावृत्ति पर विशेष ध्यान दिया। एक अन्य बातचीत में उन्होंने बताया कि परीक्षा से करीब तीन महीने पहले उन्होंने NCERT पुस्तकों को कई बार दोहराया।
यह रणनीति NEET की तैयारी में खास महत्व रखती है, क्योंकि विद्यार्थियों के सामने उपलब्ध अध्ययन सामग्री बहुत अधिक होती है। कौस्तव का तरीका इस बात पर जोर देता है कि पहले मूल पुस्तक और पाठ्यक्रम की अवधारणाओं पर मजबूत पकड़ बनाई जाए, उसके बाद अतिरिक्त प्रश्नों और टेस्ट के जरिए तैयारी को आगे बढ़ाया जाए।

Physics थी चुनौती, Chemistry बनी मजबूत ताकत
कौस्तव ने बताया कि उनकी तैयारी के दौरान Physics वह विषय था जिस पर उन्हें अपेक्षाकृत अधिक मेहनत करनी पड़ी। इसके विपरीत Chemistry में उन्होंने कक्षा 11 और 12 के दौरान लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। Physics के कठिन हिस्सों को उन्होंने सिलेबस पूरा होने के बाद भी दोबारा समय देकर मजबूत किया।
यह रणनीति भी महत्वपूर्ण है। कमजोर विषय से बचने के बजाय उसे पहचानना और उसके लिए अतिरिक्त अभ्यास करना किसी भी प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी का अहम हिस्सा है। कौस्तव ने पहले से मजबूत विषयों को बनाए रखते हुए कमजोर हिस्सों पर अतिरिक्त मेहनत की।

मॉक टेस्ट से खत्म किया परीक्षा का डर
NEET की तैयारी में केवल ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता। सीमित समय में बड़ी संख्या में प्रश्न हल करना और परीक्षा के दबाव को संभालना भी जरूरी है। कौस्तव ने इस समस्या के लिए मॉक टेस्ट को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
उन्होंने बताया कि परीक्षा से पहले नियमित मॉक टेस्ट देने से उनका परीक्षा-भय काफी कम हुआ। टेस्ट के दौरान प्राप्त अंकों से अधिक उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया कि गलतियां कहां हो रही हैं और किन विषयों पर अभी और काम करने की जरूरत है। एक अन्य बातचीत में कौस्तव ने बताया कि मॉक टेस्ट के बाद गलतियों का विश्लेषण और पेपर डिस्कशन से उन्हें अपनी कमजोरियों को पहचानने में मदद मिली।

कम अंक आए तो निराश हुए, लेकिन रुके नहीं
टॉप रैंक हासिल करने वाले विद्यार्थी भी तैयारी के दौरान उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं। कौस्तव ने स्वीकार किया कि कुछ मॉक टेस्ट में उनकी अपेक्षा के मुताबिक अंक नहीं आए और इससे वह निराश भी हुए। लेकिन ऐसे समय में उनके माता-पिता और शिक्षकों ने उन्हें प्रोत्साहित किया। उन्होंने खुद भी मेहनत जारी रखने पर भरोसा बनाए रखा।
यही पहलू उनकी कहानी को केवल एक टॉपर की सफलता-कथा नहीं रहने देता। प्रतियोगी परीक्षाओं में एक खराब टेस्ट को अंतिम परिणाम मान लेने के बजाय उसे तैयारी की कमियों का संकेत समझना अधिक उपयोगी हो सकता है।

पढ़ाई के साथ Chess और खेलों के लिए भी समय
लगातार पढ़ाई के दबाव के बीच कौस्तव ने अपनी रुचियों को पूरी तरह नहीं छोड़ा। वह Chess खेलते थे और Football तथा Badminton जैसे खेलों में भी रुचि रखते थे। उनके अनुसार इन गतिविधियों ने पढ़ाई के दौरान मानसिक रूप से संतुलित रहने में मदद की।
इससे उनकी तैयारी का एक और पहलू सामने आता है—सफलता के लिए हर समय किताबों के सामने बैठे रहना ही जरूरी नहीं। सीमित लेकिन प्रभावी ब्रेक मानसिक थकान कम करने और लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

कौस्तव की तैयारी से NEET अभ्यर्थी क्या सीख सकते हैं?
कौस्तव बौरी की तैयारी को किसी एक “टॉपर फॉर्मूले” में बांधना सही नहीं होगा। उनकी रणनीति के कई हिस्से ऐसे हैं जिन्हें विद्यार्थी अपनी परिस्थिति के अनुसार अपना सकते हैं। पहला, सिलेबस को छोटे और स्पष्ट लक्ष्यों में बांटना। दूसरा, पढ़े हुए विषय पर तुरंत प्रश्नों की प्रैक्टिस करना। तीसरा, NCERT को मजबूत आधार बनाना। चौथा, मॉक टेस्ट को केवल अंक देखने के लिए नहीं, बल्कि गलतियां खोजने के लिए इस्तेमाल करना और पांचवां, कमजोर विषय से भागने के बजाय उस पर अतिरिक्त मेहनत करना।
कौस्तव ने भविष्य के NEET अभ्यर्थियों को बैकलॉग जमा नहीं करने की सलाह भी दी थी। यदि बैकलॉग बन गया है तो पहले वर्तमान में पढ़े जा रहे विषयों को मजबूत करने और उसके बाद पुराने हिस्से को पूरा करने की रणनीति अपनाने की बात उन्होंने कही।

सफलता का संदेश: टाइमटेबल से ज्यादा जरूरी है एकाग्रता
कौस्तव बौरी की NEET UG 2023 की सफलता का सबसे दिलचस्प पक्ष यही है कि उनकी तैयारी पारंपरिक अर्थों में बेहद कठोर दैनिक टाइमटेबल पर आधारित नहीं थी। उन्होंने अपने अध्ययन को छोटे लक्ष्यों, नियमित अभ्यास और लगातार आत्म-मूल्यांकन के साथ आगे बढ़ाया। आधिकारिक परिणाम में दर्ज 716 अंक और AIR 3 इस रणनीति के परिणाम को प्रमाणित करते हैं।
हालांकि हर विद्यार्थी की सीखने की गति, परिस्थितियां और कमजोरियां अलग होती हैं। इसलिए कौस्तव की रणनीति की नकल करने के बजाय उसके मूल सिद्धांतों को समझना अधिक उपयोगी है। पढ़ाई का समय कम या ज्यादा होने से पहले यह देखना जरूरी है कि उस समय पढ़ाई कितनी प्रभावी हुई।
NEET जैसी परीक्षा में सफलता किसी एक किताब, एक कोचिंग या एक टाइमटेबल का परिणाम नहीं होती। कौस्तव बौरी की कहानी बताती है कि स्पष्ट छोटे लक्ष्य, NCERT की गहरी समझ, लगातार प्रश्न अभ्यास, मॉक टेस्ट का विश्लेषण और अपनी कमजोरियों पर ईमानदारी से काम करना तैयारी को मजबूत बना सकता है। 716 अंक और AIR 3 की यह कहानी आने वाले अभ्यर्थियों के लिए इस मायने में खास है कि इसमें “ज्यादा पढ़ने” से ज्यादा “सही तरीके से पढ़ने और अपनी गलतियों से सीखने” का संदेश छिपा है।

Geeta Singh
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