
संवाद 24 डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी का माहौल दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 100 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 22,550 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बना रहा। कारोबार आगे बढ़ने के साथ दोनों प्रमुख सूचकांकों की बढ़त और मजबूत हुई। सुबह करीब 10:15 बजे सेंसेक्स 72,716.88 के स्तर पर था और 334.41 अंक यानी करीब 0.46 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। इसी समय निफ्टी 22,661.15 पर था और इसमें 105.41 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
यह तेजी ऐसे समय आई है जब भारतीय शेयर बाजार हाल के दिनों में भारी दबाव से गुजर रहा था। लगातार आठ सप्ताह तक गिरावट के बाद सोमवार को बाजार ने राहत की सांस ली थी और मंगलवार को भी शुरुआती कारोबार में खरीदारी जारी रही। सोमवार को सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत चढ़कर 72,382.47 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,555.75 पर बंद हुआ। इस तरह मंगलवार की तेजी को बाजार में सुधार की लगातार दूसरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
निफ्टी ने फिर पकड़ा 22,600 का स्तर, निवेशकों की नजर अब 22,800 पर
निफ्टी के लिए 22,550 का स्तर हाल के कारोबार में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सोमवार को सूचकांक इसी स्तर के ऊपर बंद हुआ और मंगलवार को भी इसके ऊपर मजबूती बनी रही। सुबह के कारोबार में निफ्टी 22,650 के पार भी गया और दिन के शुरुआती हिस्से में 22,667.35 का अंतर-दिवसीय उच्च स्तर दर्ज किया गया। सेंसेक्स भी शुरुआती कारोबार में 72,732.92 तक पहुंचा।
तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से बाजार के लिए अब 22,800 का स्तर अगली महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार यदि निफ्टी इस क्षेत्र के ऊपर मजबूती के साथ टिकता है तो आगे 23,000 और उसके बाद 23,100-23,220 के क्षेत्र की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है। दूसरी ओर 22,400 और 22,200 महत्वपूर्ण सहारा स्तर के रूप में देखे जा रहे हैं।
हालांकि इन स्तरों को निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश, केंद्रीय बैंक की नीतियां और कंपनियों के तिमाही कारोबार जैसे कई कारक एक ही दिन में दिशा बदल सकते हैं।
बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने बाजार को दिया मजबूत सहारा
मंगलवार की तेजी में बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। प्रमुख निजी बैंकों में खरीदारी दिखाई दी। कारोबार के शुरुआती चरण में कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक में तेजी रही। रॉयटर्स के अनुसार सुबह 9:52 बजे तक एक्सिस बैंक करीब 1.4 प्रतिशत और कोटक महिंद्रा बैंक करीब 3.8 प्रतिशत ऊपर थे। दोनों कंपनियों के तिमाही कारोबार संबंधी सकारात्मक आंकड़ों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।
कोटक महिंद्रा बैंक के तिमाही आंकड़ों में अग्रिम ऋण और जमा में मजबूत वृद्धि की जानकारी सामने आई, जबकि एक्सिस बैंक को भी सकारात्मक कारोबार अद्यतन से समर्थन मिला। इसका असर व्यापक बैंकिंग सूचकांकों पर दिखाई दिया। सुबह के कारोबार में निफ्टी बैंक भी लगभग आधा प्रतिशत से अधिक ऊपर था।
बैंकिंग शेयरों में खरीदारी को बाजार की धारणा के लिए महत्वपूर्ण इसलिए माना जाता है क्योंकि निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में वित्तीय क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है। यदि बड़े बैंकिंग शेयरों में लगातार खरीदारी बनी रहती है तो इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ सकता है।
ट्रेंट के शेयर ने मचाई हलचल, करीब 10 प्रतिशत तक उछाल
मंगलवार के कारोबार में ट्रेंट का शेयर सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। कंपनी के सितंबर तिमाही के कारोबार संबंधी सकारात्मक अपडेट के बाद शेयर में करीब 10 प्रतिशत तक तेजी देखी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी ने सितंबर तिमाही में अपने स्वतंत्र कारोबार से आय में लगभग 23 प्रतिशत सालाना वृद्धि का अनुमान जताया है। इस खबर के बाद निवेशकों की दिलचस्पी ट्रेंट के शेयर में बढ़ गई।
सुबह के कारोबार में ट्रेंट सेंसेक्स के प्रमुख सकारात्मक योगदानकर्ताओं में शामिल रहा। लार्ज कैप शेयरों में इस तरह की तेज खरीदारी बाजार की व्यापक धारणा को भी प्रभावित करती है। हालांकि किसी एक कंपनी के शेयर में तेज उछाल को पूरे बाजार की मजबूती का संकेत मानना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी के वास्तविक तिमाही नतीजों, मूल्यांकन और भविष्य के कारोबार को भी देखना चाहिए।
कौन से क्षेत्र चमके और किन शेयरों पर रहा दबाव?
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी व्यापक थी, हालांकि सभी क्षेत्रों में समान उत्साह नहीं दिखा। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार धातु, ऊर्जा, वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग क्षेत्र में मजबूती रही। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर दबाव दिखाई दिया। सुबह के आंकड़ों में निफ्टी धातु सूचकांक करीब 0.83 प्रतिशत ऊपर था, जबकि निफ्टी सूचना प्रौद्योगिकी सूचकांक करीब 0.76 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था।
सेंसेक्स के प्रमुख सकारात्मक योगदानकर्ताओं में ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल रहे। दूसरी ओर टेक महिंद्रा, आईटीसी, टाइटन, इंफोसिस और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे कुछ शेयरों में गिरावट देखी गई।
इससे स्पष्ट होता है कि बाजार में खरीदारी भले ही लौटी है, लेकिन निवेशकों का रुझान हर क्षेत्र और हर कंपनी में एक जैसा नहीं है। बाजार अभी भी चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के दौर से गुजर रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से मिली राहत
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत हमेशा महत्वपूर्ण कारक रही है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार की धारणा को सहारा दिया था और मंगलवार को भी तेल की कीमतों को निवेशक करीब से देख रहे थे।
रॉयटर्स के अनुसार ब्रेंट कच्चा तेल मंगलवार को लगभग 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। पिछले सत्र में इसमें करीब 2 डॉलर की गिरावट आई थी। मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति में सुधार और जी7 देशों की आपूर्ति बढ़ाने संबंधी पहल ने बाजार की चिंताओं को कुछ कम किया।
हालांकि कच्चा तेल अभी भी ऊंचे स्तर पर है। इसलिए इसमें दोबारा तेज उछाल भारतीय बाजार के लिए चुनौती बन सकता है। महंगा तेल भारत के व्यापार घाटे, मुद्रास्फीति और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में तेल की दिशा शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी बड़ी चिंता
बाजार में तेजी लौटने के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यही वजह है कि विशेषज्ञ मौजूदा तेजी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
बाजार में लंबे समय तक लगातार गिरावट के बाद कुछ शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंच गए हैं। इससे निचले स्तरों पर खरीदारी बढ़ी है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की ओर से भी बाजार को समर्थन मिल रहा है। फिर भी विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना तेजी को सीमित कर सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि टिकाऊ तेजी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में पर्याप्त नरमी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी जरूरी होगी।
अमेरिकी बाजार और एशियाई बाजारों से भी मिला सकारात्मक संकेत
भारतीय बाजार की मंगलवार की तेजी को वैश्विक बाजारों से भी समर्थन मिला। सोमवार को अमेरिकी बाजारों में मजबूती रही और तकनीकी कंपनियों की अगुवाई में नैस्डैक ने रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद होने की खबरों के बीच निवेशकों की धारणा बेहतर हुई। एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
जापान का निक्केई भी बढ़त में रहा, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों में सामान्य सकारात्मक रुख दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में सुधार से भारतीय बाजार में भी शुरुआती खरीदारी को बल मिला। हालांकि अमेरिकी सरकारी बांड की लंबी अवधि की प्रतिफल दरें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जो वैश्विक निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।
अब सबसे बड़ा इंतजार भारतीय रिजर्व बैंक की नीति पर
भारतीय शेयर बाजार के लिए इस सप्ताह का सबसे बड़ा घरेलू घटनाक्रम भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक का निर्णय है। केंद्रीय बैंक का नीतिगत फैसला बुधवार को आने वाला है और बाजार की नजर इस पर टिकी हुई है।
बाजार में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि होगी। हालांकि बाजार के लिए केवल दर वृद्धि महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि केंद्रीय बैंक का रुख, महंगाई का अनुमान और आर्थिक वृद्धि को लेकर उसका आकलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर बैंकिंग, ऋण, आवास, उपभोक्ता मांग और कंपनियों की वित्तीय लागत पर पड़ सकता है। इसलिए बुधवार का निर्णय अगले कुछ कारोबारी सत्रों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों पर दबाव क्यों?
जहां बैंकिंग और धातु शेयरों में खरीदारी दिखाई दी, वहीं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती आंकड़ों में निफ्टी सूचना प्रौद्योगिकी सूचकांक लगभग 0.8 प्रतिशत नीचे था। प्रमुख कंपनियों में टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बांड प्रतिफल में बढ़ोतरी और महंगाई को लेकर चिंता जैसी परिस्थितियां बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वहां की कंपनियों के तकनीकी खर्च से जुड़े संकेत भी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आठ सप्ताह की गिरावट के बाद क्या बदला?
मौजूदा तेजी को समझने के लिए पिछले कुछ सप्ताह के बाजार प्रदर्शन पर नजर डालना जरूरी है। भारतीय शेयर बाजार ने लगातार आठ सप्ताह की गिरावट का दौर देखा, जिसे पिछले 25 वर्षों में सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट की श्रृंखलाओं में बताया गया है। इसके बाद सोमवार और मंगलवार को बाजार में राहत की खरीदारी दिखाई दी।
लंबी गिरावट के बाद कुछ शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक दिखने लगे हैं। यही कारण है कि निचले स्तर पर खरीदारी देखने को मिल रही है। तकनीकी संकेतकों में भी कुछ सुधार के संकेत सामने आए हैं। हालांकि यह अभी कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार ने पूरी तरह गिरावट का दौर समाप्त कर दिया है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,400 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण सहारा है, जबकि ऊपर की तरफ 22,800 और 23,000 प्रमुख बाधा हो सकते हैं। यदि सूचकांक इन स्तरों को मजबूती से पार करता है तो सुधार का दौर आगे बढ़ सकता है। दूसरी ओर 22,400 के नीचे कमजोरी लौटने पर बाजार में फिर से दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
मंगलवार की तेजी निश्चित रूप से बाजार के लिए राहत का संकेत है, लेकिन इसे नई तेजी की शुरुआत मानने से पहले कुछ और संकेतों का इंतजार करना बेहतर होगा। लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद दो दिन की तेजी बाजार की दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। बाजार को आगे बढ़ने के लिए विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, कंपनियों के मजबूत तिमाही परिणाम और अनुकूल घरेलू नीतिगत संकेतों की आवश्यकता होगी।
खुदरा निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल सेंसेक्स या निफ्टी की बढ़त देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला न किया जाए। अलग-अलग कंपनियों की वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन, कर्ज, आय वृद्धि और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है। बाजार में अस्थिरता बनी रहने की स्थिति में जोखिम क्षमता के अनुसार ही निर्णय लेना समझदारी होगी।
आगे की राह: तेजी की परीक्षा अभी बाकी
मंगलवार की शुरुआती तेजी ने भारतीय शेयर बाजार को हाल की भारी गिरावट से कुछ राहत जरूर दी है। सेंसेक्स 72,700 के आसपास पहुंचा और निफ्टी 22,650 के ऊपर गया। बैंकिंग शेयरों में मजबूत खरीदारी, ट्रेंट के शानदार कारोबार अद्यतन, वैश्विक बाजारों की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार को सहारा दिया।
लेकिन बाजार के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ऊंची वैश्विक बांड प्रतिफल दरें, कच्चे तेल की अनिश्चितता और भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी नीति बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। इसके साथ ही कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे भी अब बाजार की नजर में रहेंगे।
ऐसे में मौजूदा तेजी को राहत की तेजी कहना अधिक उचित होगा, न कि पक्की तेजी की वापसी। यदि निफ्टी 22,800 और उसके बाद 23,000 के स्तर को मजबूती से पार करता है तथा सेंसेक्स भी ऊंचे स्तरों पर टिकता है, तो बाजार में भरोसा और मजबूत हो सकता है। दूसरी ओर 22,400 के नीचे कमजोरी लौटती है तो हालिया सुधार पर सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल निवेशकों के लिए धैर्य, गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान और जोखिम प्रबंधन पहले से अधिक महत्वपूर्ण है।






