दरोगा नीतू प्रकरण में नया मोड़: इंस्पेक्टर को क्लीन चिट, अब अपर पुलिस आयुक्त करेंगे निष्पक्ष जांच
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संवाद 24 संवाददाता। थाना एत्मादपुर से जुड़ा महिला दरोगा नीतू शर्मा का प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है। वायरल ऑडियो के बाद उठे सवालों के बीच पुलिस विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए इंस्पेक्टर को क्लीन चिट दे दी है, जबकि मामले की निष्पक्ष जांच अब अपर पुलिस आयुक्त को सौंपी गई है। इस फैसले से स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन पूरे मामले की तह तक जाने के मूड में है।
पुलिस की मीडिया सेल के अनुसार, छेड़छाड़ के मामले में तत्कालीन विवेचक एसआई नीतू शर्मा ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में दो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिस पर विवेचक के हस्ताक्षर मौजूद हैं और इसे दाखिल करने से पहले थाना प्रभारी से भी सहमति ली गई थी। ऐसे में वायरल ऑडियो में विवेचक द्वारा बिना संज्ञान में लिए आरोप पत्र दाखिल करने का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत पाया गया है।
हालांकि, विवेचक की भूमिका को पूरी तरह स्पष्ट मानने के बजाय पुलिस प्रशासन ने इसे संदिग्ध करार दिया है। विवेचक और वादिया के बीच वायरल ऑडियो, साथ ही विवेचक की ओर से लगाए गए आरोपों को देखते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस की गई। इसी कारण पूरे प्रकरण की जांच अपर पुलिस आयुक्त को सौंपी गई है। जांच में विवेचक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी।
इस बीच, छेड़छाड़ के मामले में पीड़िता के पूर्व विवेचना से संतुष्ट न होने पर एक और अहम फैसला लिया गया है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी गई है, जहां अब एक महिला उपनिरीक्षक इस प्रकरण की विवेचना करेंगी। पुलिस आयुक्त पहले ही पीड़िता से इस संबंध में संवाद कर चुके हैं और भरोसा दिलाया गया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रंजिश की पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में
पुलिस मीडिया सेल के प्रेसनोट में मामले के पीछे की पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया गया है। वादिया मूल रूप से मैनपुरी की रहने वाली है और वर्तमान में ट्रांस यमुना क्षेत्र में रह रही है। आरोपी पक्ष से उसका पुराना विवाद चल रहा है और दोनों पक्ष आपस में रिश्तेदार भी हैं। बताया गया है कि महिला के भाई की ट्रांसपोर्ट कंपनी है, जिसमें एक ही नंबर प्लेट से दो ट्रक चलने की शिकायत आरोपी पक्ष ने की थी। इसी शिकायत के बाद से दोनों पक्षों के बीच रंजिश बढ़ी।
पुलिस के मुताबिक, मैनपुरी में पहले भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट की प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और राजीनामे की कोशिशें भी हुईं, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद महिला ने 30 सितंबर और 17 अक्तूबर को छेड़छाड़ की घटनाओं का आरोप लगाया। 25 अक्तूबर को थाना एत्मादपुर में दर्ज प्राथमिकी में छह लोगों को नामजद किया गया था।
विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन और सीडीआर विश्लेषण के बाद चार आरोपियों के नाम अभियोग से हटाए गए। विवेचक नीतू शर्मा ने इस संबंध में 16 दिसंबर को एसीपी एत्मादपुर से लिखित अनुमति भी ली थी। अंततः आशुतोष और अनूप कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
यह पूरा प्रकरण न सिर्फ एक आपराधिक मामले की जांच का सवाल है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और निष्पक्षता की भी परीक्षा है। अब सबकी नजरें अपर पुलिस आयुक्त की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस विवादास्पद मामले में सच क्या है और जिम्मेदारी किसकी।






