रुपये लेकर नाम निकालने के आरोपों से हड़कंप, महिला दरोगा लाइन हाजिर; जांच अपर पुलिस आयुक्त को सौंपी
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा के एत्मादपुर थाने में तैनात महिला दरोगा के वायरल ऑडियो ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। वायरल ऑडियो में महिला दरोगा अपने ही थाना प्रभारी, मुंशी और अन्य अधिकारियों पर रुपये लेकर आरोपियों के नाम मुकदमे से हटाने जैसे गंभीर आरोप लगाती सुनाई दे रही हैं। मामले को पुलिस आयुक्त ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, महिला दरोगा द्वारा लगाए गए आरोप अब तक की जांच में तथ्यात्मक रूप से गलत पाए गए हैं। उल्टा विवेचक की भूमिका ही संदिग्ध सामने आई है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर पुलिस आयुक्त को जांच सौंपी गई है। जांच पूरी होने तक महिला दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
पीड़िता का आरोप और पूरा घटनाक्रम
मामला थाना ट्रांस यमुना के कालिंदी विहार क्षेत्र की एक युवती से जुड़ा है, जो फिरोजाबाद के एक कॉलेज में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। पीड़िता ने 25 अक्तूबर को थाना एत्मादपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि 17 अक्तूबर को मायके से लौटते समय एत्मादपुर निवासी सगे भाई आशुतोष और हिमांशु ने अपने साथियों अनूप व रितेश के साथ जबरन उसे कार में बैठा लिया। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने दुष्कर्म की कोशिश की, कपड़े फाड़े और अश्लील हरकत की। पुलिस वाहन आता देख आरोपी मौके से भाग गए।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि 30 सितंबर को भी आरोपियों ने उसके साथ अश्लील हरकत की थी। दूसरी घटना के आठ दिन बाद उसने पुलिस से शिकायत की। मामले में आशुतोष, हिमांशु, अनूप, रितेश सहित दो अन्य अक्षय और सुमित के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना महिला दरोगा नीतू शर्मा को सौंपी गई और 16 दिसंबर को आरोप पत्र दाखिल किया गया।
चार नाम निकलने पर उठा विवाद
एडीसीपी कार्यालय से जब पीड़िता से फीडबैक लिया गया, तब उसे पता चला कि आरोप पत्र से चार आरोपियों के नाम निकाल दिए गए हैं। इस पर 17 दिसंबर को पीड़िता विवेचक से मिलने पहुंची और बातचीत के दौरान ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया। बाद में पीड़िता ने यह ऑडियो पुलिस आयुक्त दीपक कुमार को सौंपते हुए शिकायत की।
सोमवार को यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस विभाग में मामला और गंभीर हो गया। महिला दरोगा का कहना है कि 16 दिसंबर की रात वह करीब 9:30 बजे तक थाने में मौजूद थीं। बच्चे की तबीयत खराब होने पर वह घर चली गईं और उनके संज्ञान के बिना आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला दरोगा का यह दावा कि उनके बिना जानकारी के चार्जशीट दाखिल की गई, तथ्यात्मक रूप से असत्य है। प्रारंभिक जांच में विवेचक की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। वायरल ऑडियो, पीड़िता की शिकायत और विवेचक द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए अपर पुलिस आयुक्त को जिम्मेदारी दी गई है।
विवेचना बदली, क्राइम ब्रांच को सौंपा केस
पुलिस के अनुसार पीड़िता अपनी पूर्व विवेचना से संतुष्ट नहीं थीं। इसलिए मामले की दोबारा जांच के लिए विवेचना क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी गई है। अब क्राइम ब्रांच की महिला उपनिरीक्षक पूरे प्रकरण की नए सिरे से जांच करेंगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि मामले में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।






