आईआईटी कानपुर को मिला ऐतिहासिक दान: 2000 बैच के पूर्व छात्रों ने दिए 100 करोड़ रुपये

संवाद 24 संवाददाता। कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के वर्ष 2000 बैच के पूर्व छात्रों ने अपनी सिल्वर जुबली (25 वर्ष पूरे होने) के पुनर्मिलन समारोह में गुरुदक्षिणा स्वरूप 100 करोड़ रुपये का सामूहिक दान देने की घोषणा की है। यह भारत के किसी भी शैक्षणिक संस्थान को किसी एक बैच से मिला अब तक का सबसे बड़ा योगदान है।

यह ऐतिहासिक दान संस्थान में मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी (MSTAS) की स्थापना के लिए उपयोग किया जाएगा। यह स्कूल तकनीकी नवाचार, नीति निर्माण और सामाजिक परिवर्तन को एकीकृत करेगा, जिससे छात्रों में गंभीर चिंतन, नेतृत्व क्षमता और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित होगा।

इस बैच को ‘मिलेनियम बैच’ भी कहा जाता है, जिसमें कई सफल उद्यमी और कॉर्पोरेट लीडर शामिल हैं। इनमें नवीन तिवारी (इनमोबी और ग्लांस के संस्थापक), अमित कुमार अग्रवाल (नोब्रोकर के संस्थापक), अमित गुप्ता (यूलू के संस्थापक) के अलावा नोव्लरिटी और कार्ड91 जैसे स्टार्टअप्स के फाउंडर्स भी हैं। इस बैच में एनवीडिया, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, इंटेल, बीसीजी और मॉर्गन स्टैनली जैसी कंपनियों के सीनियर लीडर्स भी शामिल हैं। खास तौर पर नवीन तिवारी ने व्यक्तिगत रूप से 30 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।

नवीन तिवारी ने कहा, “आईआईटी कानपुर ने हमें सिर्फ डिग्री नहीं दी, बल्कि बड़े सपने देखने, पुरानी धारणाओं पर सवाल उठाने और उद्देश्यपूर्ण निर्माण करने का साहस दिया। यह योगदान हमारी सामूहिक कृतज्ञता का प्रतीक है।”

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने इस योगदान की सराहना करते हुए कहा, “वर्ष 2000 बैच का यह 100 करोड़ रुपये का दान संस्थान और उसके पूर्व छात्रों के बीच अटूट बंधन का प्रमाण है। इससे शैक्षणिक और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।”
पुनर्मिलन समारोह में दुनिया भर से पूर्व छात्रों ने परिसर में आकर पुरानी यादें ताजा कीं और संस्थान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस बैच के कोऑर्डिनेटर तमाल दास ने कहा, “हम अपने अल्मा मेटर के साथ मिलकर भविष्य के संस्थान-निर्माताओं को आकार देने की उम्मीद करते हैं।”

यह दान आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्रों की बढ़ती उदारता को दर्शाता है। इससे पहले भी कई बैचों ने करोड़ों का योगदान दिया है, लेकिन एक बैच से 100 करोड़ का यह योगदान नया बेंचमार्क सेट करता है। इससे संस्थान न केवल अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता को बनाए रखेगा, बल्कि समाज के लिए नवाचारपूर्ण समाधान विकसित करने में आगे बढ़ेगा।

Pavan Singh
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