नए साल से पहले धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं का सैलाब, वृंदावन में अपील तो काशी-अयोध्या में कड़े प्रतिबंध
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संवाद 24 मथुरा/वाराणसी/अयोध्या। नववर्ष से पहले देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों—वृंदावन, काशी और अयोध्या—में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई इलाकों में पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
वृंदावन: बांके बिहारी मंदिर ने की अपील
मथुरा-वृंदावन में अत्यधिक भीड़ को देखते हुए बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से 29 दिसंबर से 5 जनवरी तक मंदिर न आने की अपील की है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि नए साल के कारण भीड़ असामान्य स्तर पर पहुंच गई है, जिससे दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, संकरी गलियों में भीड़ के चलते रोजमर्रा की जिंदगी भी बाधित हो रही है और कई इलाकों में लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

काशी: स्पर्श दर्शन बंद, सुरक्षा सख्त
वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में प्रतिदिन करीब 3 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हालात को संभालने के लिए स्पर्श दर्शन और गर्भगृह प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। मंदिर के 2 किलोमीटर दायरे में वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं।
बीते एक सप्ताह में यहां 20 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जिससे सावन या महाकुंभ जैसे हालात बन गए हैं।

अयोध्या: राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में भारी भीड़
अयोध्या में राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। रामलला के दर्शन के बाद बड़ी संख्या में भक्त सरयू तट की ओर भी जा रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग, स्वयंसेवकों की तैनाती और ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है।

प्रशासन अलर्ट, ट्रैफिक डायवर्जन लागू
तीनों शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। मथुरा में 2 जनवरी तक भारी वाहनों की एंट्री पर रोक है, जबकि वाराणसी और अयोध्या में मंदिर क्षेत्रों के आसपास चारपहिया वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी गई है। सीसीटीवी के जरिए लगातार निगरानी की जा रही है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले स्थानीय निर्देशों की जानकारी लें, संयम बनाए रखें और अनावश्यक भीड़ से बचें, ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम दर्शन कर सकें।






