खाकी की वर्दी में छिपा तनाव: आगरा पुलिस के सर्वे ने उजागर की चौंकाने वाली हकीकत
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संवाद 24 संवाददाता। पुलिस की खाकी वर्दी सम्मान और अधिकार का प्रतीक मानी जाती है, लेकिन इसी वर्दी के पीछे छिपे तनाव की कहानी अब सामने आ रही है। आगरा पुलिस कमिश्नरेट में तैनात एक हजार पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर किए गए एक सर्वे ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सर्वे के अनुसार, अधिकांश पुलिसकर्मी लंबी ड्यूटी घंटों, कम छुट्टियों और लगातार दबाव के कारण गंभीर तनाव में जी रहे हैं। इसका सबसे बुरा असर उनके पारिवारिक रिश्तों पर पड़ रहा है, पत्नी और बच्चों से संबंध बिगड़ रहे हैं, घर में समय नहीं मिल पाता और नकारात्मक व्यवहार बढ़ रहा है।
सर्वे की मुख्य बातें: वर्दी ने बदल दिया व्यवहार
50% पुलिसकर्मी वर्दी का रौब दिखाते हैं: सर्वे में सामने आया कि आधे से ज्यादा पुलिसकर्मी वर्दी पहनते ही अपना व्यवहार बदल लेते हैं। पहले ट्रेनिंग के दौरान पीड़ितों की सेवा और अनुशासन की बात करने वाले जवान अब आम लोगों के सलाम न करने पर गुस्सा हो जाते हैं।
80% तनाव के शिकार: लंबी ड्यूटी, कम छुट्टियां और लगातार वीआईपी ड्यूटी जैसे कामों से 80 फीसदी पुलिसकर्मी तनावग्रस्त हैं। इसका असर घर पर पड़ता है बच्चे गलत राह पर जा रहे हैं, परिवार से दूरी बढ़ रही है।
केवल 20% में सकारात्मक सोच: मात्र 20 प्रतिशत पुलिसकर्मियों में ही सकारात्मक धारणा पाई गई। बाकी लोग नकारात्मकता और गुस्से से घिरे हैं।
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि थानों में आने वाले लोग अक्सर पुलिस के व्यवहार की शिकायत करते हैं – बात नहीं सुनना, पिटाई करना या रौब दिखाना। इन शिकायतों को कम करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया। व्यवहार विज्ञानी और लाइफ कोच डॉ. नवीन गुप्ता की टीम ने यह सर्वे किया, जिसमें पुलिसकर्मियों से उनके विचार, समस्याएं और व्यवहारिक दिक्कतें पूछी गईं।
प्रशिक्षण से बदलाव की कोशिश
तीन महीने के प्रशिक्षण में रोज 50-50 पुलिसकर्मियों के ग्रुप बनाए गए। समूह चर्चा में खुलकर बात हुई – घर में समय न दे पाना, नेताओं और अधिकारियों का दबाव, ट्रैफिक ड्यूटी पर लोगों का गलत व्यवहार। डॉ. गुप्ता ने पुलिसकर्मियों को समझाया कि अपना व्यवहार सुधारें तो लोगों की सोच भी बदलेगी। खेलों जैसे ‘टॉम एंड जैरी’ और ‘नींबू रेस’ के जरिए सिखाया गया कि जीवन में संतुलन बनाना जरूरी है परिवार और विभाग के बीच तालमेल रखें, गुस्से पर काबू पाएं।
पुलिसकर्मियों की अन्य शिकायतें भी सामने आईं: किराए पर मकान नहीं मिलता, बच्चों को स्कूल में दाखिला मुश्किल, शादी में समस्या। इन सबके पीछे तनाव ही मुख्य कारण है। डॉ. गुप्ता का कहना है, “जब हम अपनी सोच बदलेंगे, तो दुनिया भी बदलेगी।”
आगे की योजना: फीडबैक और बदलाव की जांच
प्रशिक्षण का असर जानने के लिए जल्द ही थानों में टीम जाएगी। ट्रेनिंग ले चुके पुलिसकर्मियों के व्यवहार में बदलाव कितना आया, यह उनके साथियों, अधिकारियों और आम लोगों से फीडबैक लेकर चेक किया जाएगा।
यह सर्वे न केवल आगरा पुलिस बल की आंतरिक समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि पूरे देश में पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाता है। लंबी ड्यूटी और दबाव के बीच सेवा देने वाले इन जवानों को बेहतर सुविधाएं, छुट्टियां और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत है। उम्मीद है कि यह पहल पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस में सकारात्मक बदलाव लाएगी।






