लखनऊ में मतदाता सूची पुनरीक्षण के बाद बड़ा अंतर, करीब 11 लाख नाम रिकॉर्ड से बाहर
Share your love

संवाद 24 लखनऊ। राजधानी लखनऊ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद मतदाता सूची में बड़ा अंतर सामने आया है। पुनरीक्षण शुरू होने से पहले जिले में करीब 39.85 लाख मतदाता दर्ज थे, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिलहाल लगभग 28.85 लाख मतदाता ही सिस्टम में दिखाई दे रहे हैं। यानी करीब 11 लाख नाम अस्थायी रूप से सूची से बाहर हो गए हैं।
निर्वाचन विभाग के अनुसार, 26 दिसंबर तक गणना प्रपत्र जमा करने की समयसीमा थी। अब प्राप्त फॉर्मों का सत्यापन किया जा रहा है। जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों की अंतिम पुनरीक्षित मतदाता सूची 31 दिसंबर को जारी की जाएगी।
जिला निर्वाचन अधिकारी विशाख जी ने बताया कि जिन मतदाताओं के नाम फिलहाल सूची में नहीं दिख रहे हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। वे दावा-आपत्ति प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वा सकते हैं। इसके लिए पहचान और पते से जुड़े दस्तावेजों के साथ 2003 की मतदाता सूची से संबंधित पारिवारिक विवरण देना अनिवार्य होगा।
शहरी इलाकों में ज्यादा असर, ग्रामीण क्षेत्र आगे
SIR के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म जमा करने की स्थिति बेहतर रही। मोहनलालगंज और मलिहाबाद जैसी सीटों पर 82 प्रतिशत से अधिक प्रपत्र वापस मिले। वहीं लखनऊ उत्तर, मध्य और पूर्व जैसी शहरी विधानसभा क्षेत्रों में यह आंकड़ा 60 से 63 प्रतिशत के बीच रहा। सबसे कम फॉर्म लखनऊ उत्तर क्षेत्र से प्राप्त हुए।
क्यों घटे मतदाता
निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक, पुनरीक्षण से पहले मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं की संख्या काफी अधिक थी। SIR प्रक्रिया में ऐसे मतदाताओं के नाम स्वतः छंट गए, जिससे कुल संख्या में कमी आई। विभाग का कहना है कि इससे भविष्य में मतदाता सूची अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगी।
बीएलओ की भूमिका भी जांच के दायरे में
प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि सभी घरों तक गणना प्रपत्र पहुंचाए गए थे या नहीं। बीएलओ द्वारा किए गए कार्य और डिजिटल पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है, ताकि किसी तरह की लापरवाही सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।






