आगरा में बोगस फर्मों के जरिए ITC चोरी का बड़ा मामला: चार व्यापारियों के खिलाफ FIR दर्ज
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संवाद 24 संवाददाता। राज्य कर विभाग ने जीएसटी व्यवस्था में फर्जीवाड़े का एक और बड़ा खुलासा किया है। बोगस (फर्जी) फर्में बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की चोरी करने के आरोप में चार व्यापारियों के खिलाफ थाना लोहामंडी में प्राथमिकी दर्ज की गई है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन फर्मों ने बिना किसी वास्तविक आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी कर ITC का अनुचित लाभ उठाया और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया।
संयुक्त आयुक्त राज्य कर (संभाग बी) गोपाल तिवारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कुछ व्यापारियों ने ITC का गलत फायदा लेने के लिए फर्जी फर्मों का पंजीकरण कराया। इन फर्मों ने अन्य बोगस फर्मों से बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के सप्लाई दिखाई और केवल कागजी प्रपत्रों का आदान-प्रदान किया। इस फर्जी इनवर्ड सप्लाई के आधार पर अर्जित ITC को क्लेम कर लिया गया।
जीएसटी अधिनियम की धारा 16 के अनुसार, बिना वास्तविक आपूर्ति के ITC का दावा करना पूरी तरह अवैध है। आरोपियों ने इस बोगस ITC का उपयोग अपनी आउटवर्ड सप्लाई की कर देयता निपटाने में किया, जिससे सरकार को राजस्व की क्षति हुई। पुलिस ने मामले में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।
नामजद आरोपी हैं:
बैंक कॉलोनी, ताजगंज निवासी रीतेश सिंह (फर्म: रीतेश एंटरप्राइजेज)
आगरा कैंट निवासी मनीषा मोतीलाल गेहानी (फर्म: मनीषा एंटरप्राइजेज)
देवरी रोड निवासी सोनिया रानी (फर्म: सुखमनी ट्रेडर्स)
ताजगंज निवासी जॉनी कुमार (फर्म: जॉनी ट्रेडर्स)
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। साक्ष्य संकलन के बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ITC चोरी का तरीका और इसका प्रभाव
जीएसटी में ITC एक महत्वपूर्ण सुविधा है, जो व्यापारियों को खरीद पर चुकाए गए टैक्स को बिक्री टैक्स से समायोजित करने की अनुमति देती है। लेकिन बोगस फर्मों का जाल बिछाकर फर्जी बिल जारी करना और ITC पास करना एक संगठित अपराध बन चुका है। ऐसे मामलों से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान होता है, बल्कि ईमानदार व्यापारियों के लिए भी असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होती है।
देशभर में ऐसे हजारों मामले सामने आ चुके हैं, जहां फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की ITC चोरी की गई है। राज्य कर विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से ऐसे रैकेट पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर जीएसटी व्यवस्था में पारदर्शिता और सख्त निगरानी की जरूरत को रेखांकित करता है। जांच पूरी होने पर आरोपियों को कड़ी सजा मिलने की उम्मीद है।






