यूपी SIR अभियान में BJP ने झोंकी पूरी ताकत, अब सांसद भी उतरेंगे मैदान में
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21 दिसंबर को लखनऊ में बड़ी रणनीतिक बैठक, सीएम योगी समेत सभी दिग्गज होंगे शामिल
संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को लेकर भारतीय जनता पार्टी अब आक्रामक मोड में आ गई है। पार्टी नेतृत्व को चिंता है कि बड़ी संख्या में ऐसे पात्र मतदाता हैं, जिन्होंने अब तक गणना प्रपत्र नहीं भरा है। इसी को देखते हुए भाजपा ने तय किया है कि अब सिर्फ कार्यकर्ता ही नहीं, सांसद और विधायक भी सीधे इस अभियान में उतरेंगे।
21 दिसंबर को लखनऊ में होगी अहम बैठक
SIR को गति देने के लिए 21 दिसंबर को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्रदेश स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस बैठक में
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक
- प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी
- संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह
के साथ-साथ सभी सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष और जिला प्रभारी मौजूद रहेंगे।
दिल्ली बैठक में तय हुई सांसदों की भूमिका
हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान के संयोजन में भाजपा सांसदों की बैठक हुई थी। इसी बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद सभी सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर SIR अभियान को प्राथमिकता देंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सांसदों से कहा गया है कि वे
- बूथ स्तर तक निगरानी रखें
- छूटे हुए पात्र मतदाताओं को जोड़ें
- और गलत नामों को सूची में शामिल होने से रोकें
प्रदेश अध्यक्ष ने जताई चिंता
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी पहले ही यह चिंता जता चुके हैं कि SIR के मामले में उत्तर प्रदेश अपेक्षित गति से पीछे चल रहा है। इसी कारण अब संगठन और जनप्रतिनिधियों—दोनों स्तर पर अभियान को तेज किया जा रहा है। पंकज चौधरी शनिवार से लखनऊ में रहकर बैठक की तैयारियों और मीडिया रणनीति पर भी काम करेंगे।
CM योगी का स्पष्ट संदेश: एक भी सही वोटर न छूटे
इससे पहले गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों और बूथ कार्यकर्ताओं से साफ कहा था—
“मतदाता सूची में कोई भी अपात्र नाम नहीं जुड़ना चाहिए और कोई भी पात्र नागरिक छूटना नहीं चाहिए।”
सीएम ने कार्यकर्ताओं से डोर-टू-डोर अभियान चलाकर गणना प्रपत्र भरवाने और लोकतंत्र को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
भाजपा का फोकस
भाजपा का साफ मानना है कि
- शुद्ध वोटर लिस्ट = मजबूत लोकतंत्र
- और SIR में की गई मेहनत का सीधा असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा।
इसी वजह से पार्टी अब इस अभियान को सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक प्राथमिकता के रूप में देख रही है।






