कानपुर कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी: हड़कंप के बाद जांच में कुछ नहीं मिला, साइबर टीम जुटी
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संवाद 24 संवाददाता। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में बुधवार को एक सनसनीखेज घटना ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह को उनके आधिकारिक ई-मेल पर धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें कलेक्ट्रेट परिसर को बम से उड़ा देने की बात कही गई थी। धमकी मिलते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस और बम निरोधक दस्ते ने पूरे कलेक्ट्रेट परिसर की गहन तलाशी ली, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।
सूत्रों के अनुसार, धमकी भरा ई-मेल बुधवार सुबह जिलाधिकारी के कार्यालय में पहुंचा। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा था कि कलेक्ट्रेट में बम रखा गया है और जल्द ही धमाका कर परिसर को उड़ा दिया जाएगा। यह जानकारी मिलते ही अतिरिक्त जिलाधिकारी (सिटी) राजेश कुमार ने तुरंत डीसीपी मुख्यालय एसएम कासिम आबिदी को सूचित किया। डीसीपी ने एलआईयू (लोकल इंटेलिजेंस यूनिट), सदर कोतवाली पुलिस और बम निरोधक दस्ते को मौके पर रवाना किया।
पुलिस टीम ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के अलावा स्टोर रूम, खाली जगहों और परिसर के हर कोने-कोने की बारीकी से जांच की। डॉग स्क्वॉड की मदद से भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन जांच के बाद राहत की सांस ली गई क्योंकि कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। डीसीपी मुख्यालय एसएम कासिम आबिदी ने बताया, “यह एक गंभीर धमकी थी, इसलिए हमने कोई रिस्क नहीं लिया। पूरी टीम ने सघन जांच की और अब ई-मेल की उत्पत्ति और भेजने वाले की पहचान के लिए साइबर सेल और इंटेलिजेंस टीम लगी हुई है।”
ऐसी धमकियां नई नहीं
यह पहली बार नहीं है जब कानपुर में सार्वजनिक स्थलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली हो। इससे पहले 29 जून को चकेरी एयरपोर्ट सहित देश के 41 एयरपोर्ट्स को इसी तरह की ई-मेल धमकी मिली थी। इसी प्रकार 23 जुलाई को शहर के लगभग 15 निजी स्कूलों को बम धमकी भरे ई-मेल आए थे, जो बाद में झूठे साबित हुए। ये धमकियां दिल्ली सहित कई अन्य शहरों में भी भेजी गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी धमकियां अक्सर शरारत या साइबर अपराधियों द्वारा अफरा-तफरी मचाने के उद्देश्य से की जाती हैं, लेकिन प्रशासन हर बार सतर्कता बरतता है ताकि कोई अनहोनी न हो।
साइबर सुरक्षा की चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा की कमियों को उजागर किया है। सरकारी ई-मेल आईडी पर ऐसी धमकियां पहुंचना चिंता का विषय है। पुलिस अब ई-मेल के आईपी एड्रेस, सर्वर और संभावित लोकेशन की ट्रेसिंग कर रही है। अतीत में ऐसी कई धमकियां विदेशी सर्वरों से भेजी गई पाई गई हैं, जिससे जांच में देरी होती है।
प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। फिलहाल कलेक्ट्रेट में कामकाज सामान्य रूप से जारी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि डिजिटल युग में सुरक्षा के नए खतरे लगातार सामने आ रहे हैं। उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी हो और दोषियों तक पहुंचा जा सके।






