पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में बंद, वकील सड़कों पर उतरेमेरठ में स्कूल-कॉलेज बंद, ओपीडी ठप; बोले—हाईकोर्ट बेंच मिले बिना आंदोलन नहीं रुकेगा
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संवाद 24 मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बुधवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में बंद का आह्वान किया गया। यह बंद हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति के नेतृत्व में किया गया, जिसे 22 जिलों के अधिवक्ता संगठनों और 1200 से अधिक सामाजिक-व्यापारिक संगठनों का समर्थन मिला है।

मेरठ में ऐतिहासिक बंद का असर
मेरठ में बंद का असर सुबह से ही व्यापक स्तर पर दिखाई दिया।
- खैरनगर, सुमित बुढ़ाना गेट, जिमखाना मैदान सहित प्रमुख बाजारों में सुबह 11 बजे तक दुकानों के शटर बंद रहे।
- स्कूल और कॉलेज पूरी तरह बंद रखे गए।
- डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं स्थगित कर दीं, हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं।
- सार्वजनिक परिवहन और निजी प्रतिष्ठानों पर भी बंद का असर दिखा।
सड़कों पर उतरे वकील, जगह-जगह प्रदर्शन
सुबह से ही अधिवक्ता जुलूस, धरना-प्रदर्शन और जनसभाओं के जरिए अपनी मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। कचहरी परिसरों के बाहर नारेबाजी हुई और सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की गई।
वकीलों ने साफ शब्दों में कहा—
“बेंच नहीं, तो वोट नहीं।”
उनका कहना है कि पश्चिमी यूपी की बड़ी आबादी और मुकदमों की संख्या के बावजूद यहां हाईकोर्ट बेंच न होना न्याय तक पहुंच में बड़ी बाधा है।
क्यों है हाईकोर्ट बेंच की मांग
अधिवक्ताओं का तर्क है कि पश्चिमी यूपी के लोगों को इलाहाबाद या लखनऊ तक जाना पड़ता है, जिससे
- समय और पैसे की भारी बर्बादी होती है,
- गरीब और ग्रामीण तबके को न्याय मिलने में देरी होती है,
- मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है।
वकीलों का कहना है कि मेरठ, आगरा या पश्चिमी यूपी का कोई केंद्रीय स्थान बेंच के लिए पूरी तरह उपयुक्त है, लेकिन वर्षों से मांग के बावजूद सरकार कोई ठोस फैसला नहीं ले रही।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो
- आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा,
- अनिश्चितकालीन बंद,
- और राजनीतिक स्तर पर भी दबाव बढ़ाया जाएगा।
संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा—
“यह सिर्फ वकीलों का नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी यूपी के नागरिकों का आंदोलन है। जब तक हाईकोर्ट बेंच नहीं मिलेगी, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।”
फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया गया है।






