सीएसजेएमयू ने थाई ग्रीन पावर सॉल्यूशंस और ग्रीन कार्पेट फाउंडेशन के साथ एमओयू किया, रिन्यूएबल एनर्जी और उभरती तकनीकों में खुले नए अवसर
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संवाद 24 कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देते हुए थाई ग्रीन पावर सॉल्यूशंस और ग्रीन कार्पेट फाउंडेशन के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) पर हस्ताक्षर किए। यह समारोह विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एकेडेमिक्स में आयोजित किया गया, जिसकी अगुवाई कुलपति प्रो. डॉ. विनय कुमार पाठक ने की।
रिन्यूएबल एनर्जी से ब्लॉकचेन तकनीक तक—विस्तृत क्षेत्रों में सहयोग इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उभरती तकनीकों में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देना है। इसके तहत निम्न क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा:रिन्यूएबल एनर्जीइलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) तकनीकब्लॉकचेन टेक्नोलॉजीरिसर्च एवं डेवलपमेंटस्किल डेवलपमेंटस्टार्ट-अप मेंटरिंगफैकल्टी एम्पावरमेंटतकनीकी परामर्श (Technical Consultancy)इस साझेदारी के माध्यम से विश्वविद्यालय अपनी तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विस्तार देगा।
स्टूडेंट्स को मिलेगा ग्लोबल एक्सपोजर एमओयू के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को कई अंतरराष्ट्रीय अवसर प्राप्त होंगे, जिनमें शामिल हैं—इंटरनेशनल इंटर्नशिपट्रेनिंग प्रोग्राम है काथॉनइनोवेटिव प्रोजेक्टग्लोबल एक्सचेंज एवं एक्सपोजरइसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय छात्रों की भर्ती (International Student Recruitment) को भी इस एमओयू का एक प्रमुख लक्ष्य बनाया गया है, जिससे कैंपस वातावरण और अधिक वैश्विक और विविधतापूर्ण बनेगा।
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा—“रणनीतिक उपलब्धि है यह साझेदारी”कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने एमओयू को विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता सीएसजेएमयू की ग्लोबल पार्टनरशिप को मजबूत करेगा और छात्रों तथा शिक्षकों को उभरती तकनीकों में बेहतर अवसर प्रदान करेगा।उन्होंने यह भी कहा कि यह एमओयू विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा, विशेष रूप से ऐसे समय में जब रिन्यूएबल एनर्जी और स्मार्ट टेक्नोलॉजी भविष्य की आवश्यकताओं को पूर्ण रूप से बदल रही हैं।
सीएसजेएमयू की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी होगी मजबूत इस एमओयू के लागू होने के बाद सीएसजेएमयू ग्लोबल टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षणस्टार्टअप इनक्यूबेशन अत्याधुनिक रिसर्चमें अपनी भूमिका को और अधिक सशक्त करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस साझेदारी के परिणामस्वरूप कई नए प्रोजेक्ट, स्टार्टअप और रिसर्च पहल जन्म लेंगी।






