आगरा मंडल में रेलवे ट्रैक की सुरक्षा हुई हाई-टेक: अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन तकनीक ने बढ़ाया रेल यात्रियों का भरोसा

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आगरा। आगरा रेल मंडल यात्रियों की सुरक्षा और रेल संरचना के आधुनिकीकरण को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। मंडल रेल प्रबंधक गगन गोयल के मार्गदर्शन में ट्रैक की समय-समय पर वैज्ञानिक और तकनीकी जांच की प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है। इसी क्रम में अब रेल पटरियों की मजबूती जांचने के लिए अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन (UFD) तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिसने ट्रैक सुरक्षा को एक नए स्तर तक पहुंचा दिया है।

कैसे काम करती है अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन तकनीक?
यह तकनीक रेल पटरियों के भीतर मौजूद संभावित दरारों, कमजोरियों या संरचनात्मक दोषों का प्रारंभिक चरण में ही पता लगा लेती है। इससे ट्रैक में उभर रही समस्याओं को समय रहते ठीक किया जा सकता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम काफी कम हो जाता है। यह उपकरण अल्ट्रासोनिक तरंगों द्वारा पटरियों की गहराई तक जांच करता है और किसी भी असामान्यता को तुरंत डिजिटल रिपोर्ट में दर्ज कर देता है। इसके बाद इंजीनियरिंग टीम दोष वाली जगह पर तत्काल कार्रवाई करती है।

1509 किलोमीटर ट्रैक की नियमित हाई-टेक जांच
आगरा मंडल में लगभग 1509 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का परीक्षण वैक्यूम-कार्ड आधारित आधुनिक मशीनों से किया जा रहा है। इन मशीनों से प्राप्त डेटा न सिर्फ अत्यंत सटीक होता है बल्कि ट्रैक की वास्तविक स्थिति को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। हर चार महीने में इन ट्रैकों की विस्तृत समीक्षा की जाती है, ताकि किसी भी तकनीकी खतरे को समय रहते दूर किया जा सके।

पूरे आगरा मंडल में 99 UFD मशीनें तैनात
मंडल में कुल 99 अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन मशीनें उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से पटरियों की नियमित स्कैनिंग की जा रही है।
इसके लिए विशेष रूप से 13 प्रशिक्षित इंजीनियरों की टीम गठित की गई है। इन सभी इंजीनियरों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देकर बी-स्कैन और वैक्यूमस्कैन मशीनों से लैस किया गया है, जो ट्रैक की अंतरित समस्याओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करती हैं।

2025–26 में 3600 किलोमीटर से अधिक रेलवे ट्रैक की होगी जांच
रेल मंडल के अनुसार वर्ष 2025–26 में कुल 3612.1 किलोमीटर ट्रैक, 24,527 वेल्ड, 1673 टर्नआउट, और 1745 स्विच एक्सपेंशन जॉइंट्स की सुरक्षा जांच की जाएगी।
इस व्यापक जांच के दौरान, नई पाई गई फ्लॉ (दरारें/दोष) चिन्हित की जाएँगी। ट्रैक की कमजोरियों को प्राथमिकता पर ठीक किया जाएगा। संरचनात्मक लोड परीक्षण के आधार पर सुरक्षा प्रमाणन जारी किया जाएगा। इसके बाद ट्रैक को यात्रियों और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित माना जाएगा।

इंजीनियरों को दिया जा रहा है विशेष प्रशिक्षण
आगरा मंडल अपने इंजीनियरिंग स्टाफ को समय-समय पर RDSO लखनऊ, IRICEN पुणे जैसी संस्थाओं में प्रशिक्षण हेतु भेज रहा है, ताकि वे नई तकनीक के अनुरूप उन्नत ज्ञान और महारत हासिल कर सकें। इस प्रशिक्षण से इंजीनियर न सिर्फ आधुनिक मशीनों को संचालित करना सीख रहे हैं, बल्कि ट्रैक में सूक्ष्म दोषों की पहचान करने में भी सक्षम हुए हैं।

रेल पटरियों की सुरक्षा में बना राष्ट्रीय स्तर का मॉडल
UFD तकनीक का सुनियोजित उपयोग आज भारतीय रेल की परिचालन प्रणाली में एक अभूतपूर्व बदलाव लाने वाला मॉडल माना जा रहा है।
यह तकनीक:
ट्रैक की विश्वसनीयता बढ़ाती है
दुर्घटनाओं की आशंका को कम करती है
मालगाड़ियों की समयबद्ध आवाजाही सुनिश्चित करती है
रेल यातायात की गति व दक्षता में बढ़ोतरी करती है
आगरा मंडल ने इस दिशा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और कई श्रेणियों में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर उपलब्धता हासिल की है।

डिजिटल रिपोर्टिंग से बढ़ी पारदर्शिता
ट्रैक जांच के दौरान प्रत्येक कार्य को डिजिटल रिपोर्ट में दर्ज किया जाता है, जिससे निरीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी आधार पर संपन्न होती है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से वरिष्ठ अधिकारियों को ट्रैक की वास्तविक स्थिति का पल-पल का अपडेट मिलता है और सुधारात्मक कार्रवाई त्वरित गति से हो पाती है।

अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन तकनीक के उपयोग ने आगरा मंडल की ट्रैक सुरक्षा को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया है। वैज्ञानिक, डिजिटल और तकनीकी प्रणाली पर आधारित यह जांच प्रक्रिया भारतीय रेल की सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करती है। यात्रियों की सुरक्षा, मालगाड़ियों की सुचारू आवाजाही और रेल नेटवर्क की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए आगरा मंडल का यह प्रयास भारतीय रेलवे के भविष्य की दिशा तय करता है।

Samvad 24 Office
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