
संवाद 24 नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से ठीक पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में आबोहवा इस कदर जहरीली हो चुकी है कि लोगों का सामान्य रूप से सांस लेना भी दूभर हो गया है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के कई इलाकों में गंभीर और खतरनाक स्तर पार कर जाने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने फौरी कार्रवाई करते हुए पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का तीसरा चरण (GRAP-3) तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इसके तहत धूल उड़ाने वाली तमाम गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू करने पर विचार शुरू हो गया है।
दमघोंटू फिजाओं में ‘गंभीर’ श्रेणी पर पहुंचा प्रदूषण
राजधानी और उससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के वायुमंडल पर धुंध और जहरीले स्मॉग की मोटी चादर पसरी हुई है। कई निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक ‘गंभीर’ (Severe) स्तर पर पहुंच चुका है, जिसके चलते बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए हालात बेहद चिंताजनक बन गए हैं। आने वाले दिनों में मौसमी बदलाव और हवा की धीमी गति के कारण स्थिति में तुरंत बड़े सुधार की गुंजाइश न देखते हुए प्रशासन ने कड़े आपातकालीन कदम उठाने का फैसला लिया है।
निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर लगा कड़ा पहरा
GRAP-3 लागू होते ही पूरे एनसीआर में धूल पैदा करने वाले तमाम निजी व वाणिज्यिक निर्माण और तोड़फोड़ (Demolition) के कार्यों को रोक दिया गया है। इसके साथ ही स्टोन क्रशर और खनन से जुड़ी गतिविधियों पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा, मेट्रो, रेलवे, अस्पताल, हवाई अड्डे और आवश्यक जल आपूर्ति जैसी बेहद जरूरी जनहित की परियोजनाओं को दिशा-निर्देशों के पालन की शर्त पर छूट दी गई है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नियमों की अनदेखी करने वाली साइटों को सील कर भारी जुर्माना लगाया जाए।
50 प्रतिशत ‘वर्क फ्रॉम होम’ और स्कूलों पर हाइब्रिड मॉडल
सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने और कर्मचारियों को जहरीली हवा के सीधे संपर्क से बचाने के लिए दिल्ली और एनसीआर के राज्य प्रशासन को दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति नियंत्रित करने की सलाह दी गई है। सरकारी, नगर निगम और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत स्टाफ को घर से काम (Work From Home) कराने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके अलावा, प्राथमिक स्तर तक के बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों को ऑनलाइन अथवा हाइब्रिड मोड में संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुराने और प्रदूषणकारी वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी
सड़क यातायात से निकलने वाले धुएं पर लगाम कसने के लिए दिल्ली समेत गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल चालित चार पहिया वाहनों के संचालन पर सख्त पाबंदी लागू की गई है। साथ ही गैर-जरूरी डीजल चालित मध्यम व भारी मालवाहक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश को सीमित कर दिया गया है। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानकों वाले जरूरी वाहनों को ही बेरोकटोक आवाजाही की अनुमति रहेगी। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो का अधिकतम उपयोग करें तथा बहुत जरूरी न होने पर सुबह-शाम के वक्त खुले में निकलने से परहेज करें। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसमी परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में नियमों को और अधिक कड़ा किया जा सकता है।






