
संवाद 24 नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को लगे अप्रत्याशित और करारे झटके के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रशासनिक स्तर पर सबसे बड़ा सियासी फेरबदल कर दिया है। सत्ता के केंद्र व्हाइट हाउस में नियंत्रण मजबूत करने और भविष्य की रणनीति को आक्रामक धार देने के इरादे से ट्रंप ने अपने सबसे करीबी, विश्वस्त और कट्टर रणनीतिकार स्टीफन मिलर को नया ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ नियुक्त करने की औपचारिक घोषणा कर दी है। अब तक राष्ट्रपति के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ (नीति) और शीर्ष रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे स्टीफन मिलर आगामी सोमवार से औपचारिक तौर पर यह शक्तिशाली पद संभालेंगे। वहीं, अब तक इस महत्वपूर्ण ओहदे को संभाल रहीं सुसी वाइल्स को पदमुक्त करते हुए ट्रंप के व्यापक ‘पॉलिटिकल ऑपरेशंस’ की बागडोर सौंपी गई है।
चुनाव परिणाम आते ही एक्शन मोड में ट्रंप: आखिर क्यों बदला ‘कमांडर’?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न करने से ट्रंप बेहद आक्रामक मुद्रा में आ गए हैं। इस राजनीतिक झटके के तुरंत बाद लिया गया यह निर्णय केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे को अधिक आक्रामक और कठोर रूप से लागू करने का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। सुसी वाइल्स, जिन्होंने 2024 के आम चुनाव में ट्रंप की ऐतिहासिक जीत की पटकथा लिखने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी, व्हाइट हाउस के इतिहास में चीफ ऑफ स्टाफ बनने वाली पहली महिला थीं। ट्रंप के पहले कार्यकाल में जहां चीफ ऑफ स्टाफ का पद संभालने वाले चार चेहरे तेजी से बदलते रहे, वहीं सुसी वाइल्स ट्रंप प्रशासन में सबसे लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखने वाली प्रमुख सहयोगी बनकर उभरी थीं। उनके कार्यकाल के दौरान सीमा सुरक्षा, कर कटौती, और ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को जमीन पर उतारने के कई बड़े कदम उठाए गए। पद में आए इस बदलाव पर सुसी वाइल्स ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में काम करना उनके जीवन का सर्वोच्च सम्मान रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही प्रशासनिक तंत्र में उनकी जिम्मेदारी बदल रही हो, लेकिन राष्ट्रपति और उनके राष्ट्रीय मिशन के प्रति उनका समर्पण पहले की तरह ही अटूट रहेगा
कौन हैं स्टीफन मिलर और क्यों माना जा रहा है उन्हें ट्रंप का सबसे बड़ा दांव?
स्टीफन मिलर महज एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) अभियान की वैचारिक रीढ़ माने जाते हैं। साल 2016 के शुरुआती चुनावी अभियान के समय से ही मिलर एक प्रमुख भाषण लेखक और सलाहकार के रूप में ट्रंप के आंतरिक घेरे के सबसे प्रभावशाली सदस्य रहे हैं। प्रशासनिक राजनीति में आने से पहले मिलर ने कैपिटल हिल पर अलबामा के पूर्व सीनेटर जेफ सेशंस के साथ काम किया था, जो आगे चलकर ट्रंप प्रशासन के पहले अटॉर्नी जनरल बने। मिलर को ट्रंप की सबसे चर्चित और कठोर आव्रजन नीतियों (इमिग्रेशन पॉलिसी) का मुख्य वास्तुकार (आर्किटेक्ट) माना जाता है। अवैध प्रवासियों पर नकेल कसने, सीमाओं पर अभूतपूर्व सख्ती बरतने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कार्ययोजनाओं को तैयार करने में मिलर का दृष्टिकोण हमेशा से बेहद सख्त और समझौताविहीन रहा है।
क्या 2028 की तैयारी और विरोधियों पर सीधा प्रहार है यह फैसला?
व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ को अमेरिकी सरकार का दूसरा सबसे प्रभावशाली पद माना जाता है, जो यह तय करता है कि राष्ट्रपति तक किस सूचना और किस व्यक्ति की पहुंच होगी। ऐसे अहम पद पर स्टीफन मिलर जैसे विचारधारा-केंद्रित और आक्रामक रणनीतिकार की ताजपोशी यह साफ दर्शाती है कि आगामी महीनों में ट्रंप प्रशासन रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय और अधिक हमलावर रुख अख्तियार करेगा। राजनीतिक जानकारों का आकलन है कि सुसी वाइल्स को चुनाव अभियान और राजनीतिक प्रबंधन में वापस भेजना तथा मिलर को व्हाइट हाउस की संपूर्ण सत्ता सौंपना एक सोची-समझी दोतरफा रणनीति का हिस्सा है। एक तरफ जहां मिलर सरकारी मशीनरी को शत-प्रतिशत ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीतियों के अनुरूप चलाएंगे, वहीं दूसरी तरफ वाइल्स मध्यावधि चुनाव के नतीजों से उपजी राजनीतिक चुनौतियों को थामने और आगामी राष्ट्रपति चुनाव की जमीन तैयार करने में जुटेंगी। वाशिंगटन के राजनीतिक पंडित इस फैसले को शक्ति संतुलन के बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं, जिसका असर न केवल अमेरिकी संसद के साथ व्हाइट हाउस के रिश्तों पर पड़ेगा, बल्कि दुनिया भर की विदेश और आव्रजन नीतियों में भी इसकी गूंज सुनाई देगी।






