रामलीला मैदान में 10 लाख की भीड़ का दावा या छावनी में तब्दील होगी राजधानी? जानिए दिल्ली पुलिस के 14 जोन वाले महासुरक्षा चक्र का सच

संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होने वाली विपक्षी गठबंधन (INDIA) की महारैली को लेकर सियासी सरगर्मियों के साथ सुरक्षा तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जहां एक तरफ आयोजकों और विपक्षी दलों ने रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने का जोरदार दावा किया है, वहीं दिल्ली पुलिस की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या लगभग 70 हजार के आसपास रहने का अनुमान है। दावों और इनपुट के बीच भारी अंतर के बावजूद दिल्ली पुलिस किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पूरे रामलीला मैदान और मध्य दिल्ली को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है।

14 सुरक्षा जोन में बंटा मैदान, 4 हजार जवानों का पहरा
महारैली के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा की कमान संभालने के लिए दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान को 14 अलग-अलग सुरक्षा जोनों में विभाजित किया है।
1- सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता रखने के लिए करीब 4,000 दिल्ली पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
2- प्रत्येक जोन की सीधी जिम्मेदारी असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जबकि हर दो जोन के समन्वय और निगरानी की कमान एडिशनल डीसीपी (Addl. DCP) रैंक के सीनियर अधिकारी संभालेंगे।
3- रैली का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक तय किया गया है, जिसके दौरान उच्चाधिकारी लगातार जमीनी हालात की मॉनिटरिंग करेंगे।
सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने खुद दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और विशेष पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) देवेश चंद्र श्रीवास्तव शनिवार दोपहर रामलीला मैदान पहुंचे। उन्होंने प्रवेश द्वारों, मेटल डिटेक्टरों और सुरक्षा चौकियों का बारीकी से मुआयना किया तथा अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रवेश और निकास द्वारों पर भगदड़ या अफरा-तफरी की स्थिति बिल्कुल न बनने पाए।

200 कैमरों की ‘तीसरी आंख’ और बॉडी-वॉर्न तकनीक से निगरानी
मैदान के अंदर और बाहर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 200 से अधिक हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, अग्रिम मोर्चे पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरों से लैस किया गया है, ताकि हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहे। किसी भी आकस्मिक टकराव अथवा अप्रिय घटना से तुरंत निपटने के लिए अत्याधुनिक दंगा-रोधी वाहन, त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और निगरानी उपकरण मैदान के निकट रणनीतिक स्थानों पर तैनात रखे गए हैं। राजधानी में सुरक्षा के व्यापक परिदृश्य को देखते हुए केंद्र सरकार ने पहले ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 270 कंपनियों की तैनाती दिल्ली में 16 नवंबर तक बढ़ा रखी है, जिससे सुरक्षा तंत्र को अतिरिक्त मजबूती मिल रही है।

आयोजकों को सख्त निर्देश: भड़काऊ भाषणों और रात रुकने पर पाबंदी
दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के शांतिपूर्ण संचालन के लिए आयोजकों को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि रैली समाप्त होने के बाद किसी भी समर्थक या कार्यकर्ता को रात के समय मैदान में रुकने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आयोजकों से कहा गया है कि वे अनुशासन बनाए रखने के लिए अपने स्वयंसेवकों को तैनात करें और सुनिश्चित करें कि मंच से ऐसा कोई भी भाषण न दिया जाए जिससे सामाजिक व सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रतिकूल असर पड़े। इसके साथ ही, बसों की आवाजाही और वाहनों की पार्किंग तय करने के लिए आयोजकों को यातायात पुलिस के साथ निरंतर तालमेल बनाए रखने को कहा गया है।

ट्रैफिक का व्यापक डायवर्जन, अस्पतालों के लिए ग्रीन कॉरिडोर
रैली के चलते मध्य दिल्ली और रामलीला मैदान से जुड़ने वाले प्रमुख चौराहों पर 150 अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। करीब 10 प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्ट किया गया है, जिससे आम जनता को जाम से बचाया जा सके। हालांकि, पैदल चलने वालों की आवाजाही को बाधित नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने मानवीय पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पास स्थित लोक नायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल और जीबी पंत अस्पताल की ओर जाने वाली एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों के लिए निर्बाध रास्ता (ग्रीन कॉरिडोर) सुनिश्चित करने के विशेष इंतजाम किए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया सेल ने इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे पुराने और भ्रामक वीडियो पर भी जनता को आगाह किया है, जहां ट्रेनों की पुरानी भीड़ दिखाकर माहौल बनाने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजधानी में इस सियासी शक्ति प्रदर्शन के बीच चप्पे-चप्पे पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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