क्या आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएगी हवाई यात्रा? जेट फ्यूल में उबाल से विमान किराये बढ़ना तय

संवाद 24 नई दिल्ली। त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में हवाई यात्रा की योजना बना रहे लाखों यात्रियों के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए अप्रत्याशित उछाल के चलते उड़ानों के किराये में बढ़ोतरी करना अब अपरिहार्य हो चुका है। विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत में लगातार हो रही वृद्धि और वैश्विक तनाव के कारण विमानन कंपनियों के वित्तीय संतुलन पर भारी दबाव बन गया है।

वैश्विक तनाव और ईंधन का बढ़ता बोझ
विमानन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण तेल आपूर्ति व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इस उथल-पुथल की वजह से कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतों में तेजी से उछाल दर्ज किया गया है। किसी भी वाणिज्यिक एयरलाइन के कुल परिचालन व्यय में ईंधन का हिस्सा 40 से 45 प्रतिशत तक होता है। जब भी ईंधन की दरों में तीखा उछाल आता है, तो विमानन कंपनियों के लिए परिचालन लाभ को बरकरार रखना बेहद कठिन हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) के शीर्ष अधिकारियों ने भी वैश्विक स्तर पर इस अभूतपूर्व स्थिति को रेखांकित किया है। उनका मानना है कि दशकों में ईंधन लागत की ऐसी अप्रत्याशित और अस्थिर चाल विरले ही देखने को मिली है। इस दबाव के चलते दुनिया भर की एयरलाइंस को घाटे से बचने के लिए टिकट दरों में संशोधन करने और अपनी परिचालन लागत को नियंत्रित करने के कड़े फैसले लेने पड़ रहे हैं।

इंडिगो की उड़ान और रूट रणनीति में बदलाव के संकेत
घरेलू विमानन बाजार में 60 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाली प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि वह ईंधन के बढ़ते बोझ को संतुलित करने के लिए अपनी उड़ान क्षमता (कैपेसिटी डिप्लॉयमेंट) का पुनर्मूल्यांकन कर रही है। एयरलाइन उन मार्गों पर उड़ानों की संख्या को युक्तिसंगत बना सकती है जहां यात्रियों की संख्या कम रहती है, ताकि उड़ानों में सीटों की उपलब्धता और खपत का अनुपात बेहतर बना रहे। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का मानना है कि लंबे समय तक बढ़ी हुई ईंधन दरों का वित्तीय भार एयरलाइन स्वयं वहन नहीं कर सकती। वैश्विक बाजार में जब तक जेट फ्यूल की दरों में नरमी या स्थिरता नहीं आती, तब तक बेस फेयर अथवा फ्यूल सरचार्ज के जरिए टिकट की दरों में वृद्धि करना उड्डयन उद्योग की मजबूरी बन चुका है।

यात्रियों की जेब पर सीधा असर
आगामी हफ्तों में दीवाली, छठ पूजा और सर्दियों की छुट्टियों के चलते दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, पटना और कोलकाता जैसे प्रमुख मार्गों पर हवाई टिकटों की भारी मांग रहती है। डायनेमिक प्राइसिंग व्यवस्था के तहत मांग बढ़ते ही किराये पहले ही आसमान छूने लगते हैं। ऐसे में यदि बेस फेयर में भी इजाफा होता है, तो अंतिम समय पर टिकट बुक कराने वाले आम और मध्यमवर्गीय यात्रियों के यात्रा बजट पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ेगा।

उड्डयन उद्योग के सामने दोहरी चुनौतियां
भारतीय विमानन बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में गिना जाता है, जहां हर महीने लाखों नए यात्री हवाई सफर से जुड़ते हैं। हालांकि, हाल के महीनों में आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं, इंजनों की तकनीकी समस्याओं और कई विमानों के खड़े रहने से कंपनियां पहले ही जूझ रही थीं। अब जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस के वित्तीय प्रबंधन को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में यात्रा की योजना बना रहे मुसाफिरों के लिए यही समझदारी होगी कि वे ऐन वक्त पर टिकट बुक कराने के बजाय समय रहते अपनी यात्रा की व्यवस्था कर लें, क्योंकि आगामी हफ्तों में हवाई यात्रा पहले से अधिक महंगी साबित होने जा रही है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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