सेहत के साथ जानलेवा खिलवाड़! जांच में फेल हुईं 330 दवाएं और कॉस्मेटिक्स: क्या आपकी अलमारी में भी मौजूद है धीमा जहर?

संवाद 24 जमशेदपुर। बीमारियों से निजात दिलाने और जीवन की रक्षा करने का दावा करने वाली दवाएं यदि खुद सेहत के लिए खतरा बन जाएं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताजा मासिक गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे देश समेत झारखंड के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश और विदेश के विभिन्न दवा कारखानों में तैयार किए गए 330 दवाइयों और कॉस्मेटिक उत्पादों के सैंपल लैब टेस्ट में मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इस बड़े खुलासे के तुरंत बाद जमशेदपुर सहित पूरे कोल्हान प्रमंडल में औषधि नियंत्रण विभाग ने हाई अलर्ट जारी करते हुए एक व्यापक जांच और जब्ती अभियान शुरू कर दिया है।

रोजमर्रा की जरूरी दवाओं से लेकर कॉस्मेटिक्स तक फेल
जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच में सिर्फ दुर्लभ या विशेष दवाएं ही नहीं, बल्कि आम घरों में रोज इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह विफल पाई गई हैं। इनमें:
1- पैरासिटामोल व बुखार की दवाएं: सामान्य सर्दी, दर्द और तेज बुखार के समय ली जाने वाली गोलियां।
2- ब्लड प्रेशर (BP) और थायराइड की दवाएं: जीवनभर नियमित रूप से ली जाने वाली जरूरी दवाएं, जिनकी गुणवत्ता में कमी सीधे हृदय और अंगों पर असर डाल सकती है।
3- मधुमेह और वजन घटाने वाले इंजेक्शन: डायबिटीज और मोटापा नियंत्रित करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले इंजेक्टेबल प्रोडक्ट्स।
4- एंटीबायोटिक्स व बच्चों के सिरप: बच्चों के संक्रमण और बैक्टीरियल इन्फेक्शन में दिए जाने वाले सिरप व ड्राई सिरप।
5- सौंदर्य उत्पाद (कॉस्मेटिक्स): कई फेयरनेस क्रीम और बॉडी लोशन।

फेयरनेस क्रीमों में मिला जानलेवा ‘पारा’ और ‘हाइड्रोक्विनोन’
दवाइयों के साथ-साथ सौंदर्य प्रसाधनों की रिपोर्ट ने भी लोगों के होश उड़ा दिए हैं। सीडीएससीओ की जांच में पांच प्रमुख कॉस्मेटिक उत्पादों में तय सीमा से कई गुना अधिक जहरीला ‘पारा’ (Mercury) पाया गया है। इनमें गोरी ब्रांड के चार उत्पाद और एक बॉडी लोशन शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य फेयरनेस क्रीमों में खतरनाक केमिकल ‘हाइड्रोक्विनोन’ की मौजूदगी पाई गई है। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पारे और हाइड्रोक्विनोन युक्त क्रीम त्वचा को तुरंत गोरा करने का भ्रम तो देती हैं, लेकिन लंबे समय में यह जहर त्वचा के छिद्रों से शरीर में प्रवेश कर किडनी, लिवर और नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है।

कोल्हान प्रमंडल में औषधि विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई
जमशेदपुर और कोल्हान के पूरे इलाके में इन घटिया और असुरक्षित दवाओं के फैलाव को रोकने के लिए औषधि प्रशासन सक्रिय हो गया है। औषधि विभाग ने पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के सभी थोक व खुदरा दवा विक्रेताओं को आधिकारिक पत्र जारी कर गुणवत्ता जांच में फेल हुए सभी 330 उत्पादों और उनके संबंधित बैच नंबरों की विस्तृत सूची सौंप दी है।
विभाग ने दवा कारोबारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल रिपोर्ट मांगी है:
1- संबंधित संदिग्ध बैच की कितनी दवाएं जिले के स्टॉक में आईं।
2- अब तक उनमें से कितनी दवाओं की बिक्री मरीजों या ग्राहकों को हो चुकी है।
3- वर्तमान में गोदामों और दुकानों में इन दवाओं का कितना स्टॉक शेष बचा है।

‘दवाओं का होगा तत्काल रिकॉल, लापरवाही पर रद्द होगा लाइसेंस’
जमशेदपुर की ड्रग इंस्पेक्टर सोनी बारा ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि प्रशासन पूरे क्षेत्र में दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला पर पैनी नजर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि सभी दवा दुकानों को निर्देशित किया गया है कि वे संदिग्ध बैच की दवाओं की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोक दें। यदि किसी भी मेडिकल स्टोर या सप्लायर के पास ये दवाएं मिलती हैं, तो उन्हें तुरंत बाजार से वापस मंगाने (मार्केट रिकॉल) की कार्रवाई की जाएगी। ड्रग इंस्पेक्टर ने कहा कि जमशेदपुर एक बड़ा औद्योगिक और घनी आबादी वाला शहर है, जहां पैरासिटामोल, बीपी, शुगर और थायराइड की दवाओं की खपत बहुत ज्यादा है। ऐसे में घटिया दवाओं का बाजार में मौजूद रहना मरीजों के जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है। यदि कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक निर्देशों की अनदेखी कर प्रतिबंधित या घटिया बैच की दवा बेचता पाया गया, तो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत उसका लाइसेंस निलंबित या रद्द कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता के लिए जरूरी सावधानी
औषधि विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे दवा खरीदते समय हमेशा पक्का बिल अवश्य लें और दवा की पैकेजिंग पर अंकित बैच नंबर व एक्सपायरी तिथि की भलीभांति जांच करें। यदि किसी दवा के सेवन के बाद अप्रत्याशित दुष्प्रभाव नजर आएं, तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें और नजदीकी औषधि निरीक्षक कार्यालय में इसकी सूचना दें।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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