यूक्रेन युद्ध के बीच ग्लोबल आर्म्स मार्केट में भारत का ‘पावर पंच’: यूरोप को बेच डाले $850 मिलियन के हथियार

​संवाद 24 नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय सामरिक संतुलन के साथ-साथ हथियारों के वैश्विक व्यापार की दिशा भी पूरी तरह बदल दी है। लंबे समय तक दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातक के रूप में पहचाने जाने वाले भारत ने अब वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में एक शक्तिशाली निर्यातक के रूप में अपनी धाक जमा ली है। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से भारत ने यूरोपीय देशों को 850 मिलियन डॉलर (लगभग 7,000 करोड़ रुपये से अधिक) से ज्यादा मूल्य के गोला-बारूद और रक्षा सामग्री का निर्यात किया है। इस भारी निर्यात के साथ यूरोपीय देशों को भारतीय गोला-बारूद की आपूर्ति में 1600 प्रतिशत से अधिक की अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने वैश्विक रक्षा विश्लेषकों को चौंका दिया है।

​यूरोप का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता बना भारत
​हालिया रक्षा आंकड़ों और रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वी और मध्य यूरोपीय देश अपने घटते सैन्य भंडारों की भरपाई के लिए तेजी से भारतीय रक्षा कंपनियों का रुख कर रहे हैं। यूक्रेन संघर्ष शुरू होने से पहले भारत यूरोप के 13 प्रमुख देशों – जिनमें पोलैंड, रोमानिया, बुल्गारिया, चेक गणराज्य और बाल्टिक देश शामिल हैं – को गोला-बारूद और विस्फोटक आपूर्ति करने के मामले में 28वें स्थान पर था। ​हालांकि, युद्ध की तीव्रता और नाटो देशों के गोला-बारूद भंडार पर पड़े दबाव के कारण भारत छलांग लगाकर यूरोप के शीर्ष हथियार आपूर्तिकर्ताओं की श्रेणी में शामिल हो गया है। इस सूची में दक्षिण कोरिया शीर्ष पायदान पर बना हुआ है, जबकि भारत तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हुए दूसरे व तीसरे प्रमुख निर्यातकों की कतार में मजबूती से स्थापित हो चुका है।

​किन हथियारों की यूरोप में सबसे ज्यादा मांग?
​रिपोर्ट के मुताबिक, भारत द्वारा यूरोप को भेजे गए रक्षा निर्यातों का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पूर्वी और मध्य यूरोप के देशों को गया है। हालांकि इस निर्यात में कोई लड़ाकू जेट, मिसाइल या भारी टैंक शामिल नहीं हैं, लेकिन पारंपरिक युद्धक्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाने वाली बुनियादी सैन्य सामग्री की आपूर्ति बड़े पैमाने पर की गई है। इसमें मुख्य रूप से:
1- ​155 मिमी और अन्य कैलिबर के आर्टिलरी शेल (तोप के गोले)
2- ​मोर्टार शेल और छोटे-मध्यम हथियारों के गोला-बारूद
3- ​प्रोपेलेंट, मिलिट्री ग्रेड बारूद और भारी विस्फोटक सामग्री
​यूरोपीय देशों में इन बुनियादी गोला-बारूद की खपत जिस तेजी से बढ़ी है, उसकी पूर्ति पश्चिमी देशों की रक्षा विनिर्माण इकाइयां तुरंत करने में असमर्थ साबित हो रही थीं। ऐसे में भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों ने वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरने वाली सामग्री की समय पर आपूर्ति कर भरोसेमंद साझेदार का दर्जा हासिल किया।

​’आत्मनिर्भर भारत’ का असर: 38,424 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात
​रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के समग्र रक्षा निर्यात में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपये की तुलना में बहुत बड़ा इजाफा दर्शाता है। ​वर्तमान में भारत दुनिया के 80 से अधिक देशों को विभिन्न प्रकार के रक्षा उपकरण, हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट, रडार सिस्टम और कलपुर्जे निर्यात कर रहा है। देश में रक्षा विनिर्माण का एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित हुआ है, जिसमें 16 प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (DPSUs), लगभग 840 बड़े और मध्यम निजी उद्यम, तथा 17,000 से अधिक एमएसएमई (MSME) व स्टार्टअप्स सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

​वैश्विक कूटनीति और भारत का रक्षा संतुलन
​यूरोपीय देशों को बड़े पैमाने पर हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और कूटनीतिक संतुलन की भी परीक्षा रही है। रूस भारत का पारंपरिक रणनीतिक व सैन्य साझेदार रहा है, लेकिन भारत ने अपने वाणिज्यिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक नियमों के दायरे में रहकर रक्षा व्यापार का विस्तार किया है। ​विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद बने नए भू-राजनीतिक माहौल ने भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। जहां पहले पश्चिमी देश भारतीय हथियारों पर निर्भर नहीं थे, वहीं आज वे गंभीर आपूर्ति संकट के समय भारत की ओर देख रहे हैं। यह बदलाव ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की उस रणनीतिक सफलता का प्रमाण है, जिसने भारत को रक्षा आयातक की छवि से बाहर निकालकर दुनिया के शीर्ष हथियार निर्यातक देशों की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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