होर्मुज में 7 तेल टैंकरों पर भीषण हमला, ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ की गूंज से थर्राया मिडिल ईस्ट

संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल के सात विशाल टैंकरों पर हुए घातक हमलों के बाद पश्चिम एशिया में बारूद का ऐसा ढेर सुलग उठा है, जिसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस कर रही है। एक तरफ जहां ईरान समर्थित गुटों और सैन्य बलों की ओर से अमेरिका व उसके सहयोगी देशों के ठिकानों पर सीधे हमलों की खुली चेतावनी दी गई है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु और रणनीतिक ठिकानों पर दोबारा बड़े हमले की खुफिया रिपोर्टों ने खलबली मचा दी है। इसके जवाब में तेहरान ने दुनिया को दहला देने वाली धमकी देते हुए अपने सबसे विध्वंसक हथियार ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (Father of All Bombs) के इस्तेमाल का खुला अल्टीमेटम जारी कर दिया है।

होर्मुज की खाड़ी में बारूदी धुआं: 7 जहाजों पर निशाना
रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में अज्ञात हमलों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत के होश उड़ा दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारी मात्रा में कच्चा तेल लेकर जा रहे सात वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया, जिससे कई टैंकरों में भीषण आग लग गई और भारी नुकसान हुआ। यह समुद्री गलियारा वह रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर अशांति फैलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर भारत समेत सभी विकासशील और विकसित देशों की महंगाई पर पड़ना तय है। ईरान ने इस घटना के तुरंत बाद कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि पश्चिमी देशों ने उस पर दबाव बनाने या उसकी सीमाओं के आसपास उकसावे की कोई भी कार्रवाई की, तो वह इस पूरे जलमार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जमींदोज करने में एक सेकंड की भी देरी नहीं करेगा।

मिड-टर्म चुनावों के बाद बड़े सैन्य प्रहार की तैयारी
खुफिया और कूटनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, वाशिंगटन और तेल अवीव संयुक्त रूप से ईरान की सैन्य क्षमता को स्थायी रूप से पंगु बनाने के लिए एक बड़े संयुक्त सैन्य अभियान की योजना पर काम कर रहे हैं। अमेरिकी चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर इस संभावित सैन्य कार्रवाई को कुछ समय के लिए टाला गया था, लेकिन अब इस बात के पुख्ता संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में ईरान के भूमिगत मिसाइल साइलो और यूरेनियम संवर्धन केंद्रों पर भीषण हवाई हमले किए जा सकते हैं। सऊदी अरब में तनाव इतना गहरा गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी ‘अरामको’ ने ऐहतियात के तौर पर अपने कर्मचारियों को मुख्यालय खाली करने और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं, जिसने इस संघर्ष के विकराल रूप धारण करने की आशंका को और गहरा कर दिया है।

‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’: तेहरान का खौफनाक दांव
अमेरिका और इजरायल की किसी भी आक्रामकता का जवाब देने के लिए ईरान ने अपनी सबसे भयानक सैन्य तैयारी का प्रदर्शन किया है। ईरानी सैन्य कमांडरों ने दावा किया है कि यदि उनकी संप्रभुता पर हमला हुआ, तो वे गैर-परमाणु श्रेणी का सबसे महाविनाशक हथियार यानी ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ दागने से पीछे नहीं हटेंगे। यह एक थर्मोबेरिक (वैक्यूम) बम है, जो विस्फोट के समय हवा से ऑक्सीजन सोखकर भारी निर्वात और अल्ट्रासोनिक शॉकवेव पैदा करता है। इसकी जद में आने वाले बंकर, इमारतें और मानव शरीर सेकंडों में भाप बन जाते हैं। ईरान का यह सीधा संदेश है कि अब वह किसी छद्म युद्ध (Proxy War) के बजाय सीधे आर-पार के टकराव के लिए मानसिक और सामरिक रूप से तैयार है।

वैश्विक कूटनीति बेअसर, भारत पर क्या होगा असर?
संयुक्त राष्ट्र (UN) सुरक्षा परिषद में तनाव कम करने की अपीलों का कोई असर जमीन पर नहीं दिख रहा है। भारत के दृष्टिकोण से यह संकट बेहद चिंताजनक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग और खाड़ी देशों पर निर्भर है। साथ ही लाखों भारतीय नागरिक इस क्षेत्र में कार्यरत हैं। यदि यह संघर्ष व्यापक युद्ध में बदलता है, तो न केवल वैश्विक स्तर पर तेल का गंभीर संकट खड़ा होगा, बल्कि दुनिया भर के शेयर बाजारों और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में ऐतिहासिक तबाही देखने को मिल सकती है। दुनिया अब सांस रोके इस बात का इंतजार कर रही है कि महाशक्तियों की यह तनातनी शांति की मेज पर थमती है या तीसरे महायुद्ध के विस्फोट में तब्दील होती है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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