जब कांप उठी ‘दुनिया की छत’: तिब्बत में 7 तीव्रता के महाविनाशकारी भूकंप का तांडव, चीखों में बदली सर्द रात

​संवाद 24 नई दिल्ली। कुदरत के एक खौफनाक झटके ने एक पल में सब कुछ तहस-नहस कर दिया। जिसे दुनिया की सबसे शांत और ऊंची छत कहा जाता है, वही तिब्बती पठार गुरुवार की देर रात अचानक मौत की गूंज और चीख-पुकार से दहल उठा। रिक्टर पैमाने पर 7.0 की प्रचंड तीव्रता वाले इस महाविनाशकारी भूकंप ने समूचे इलाके को झकझोर कर रख दिया। अब तक 16 जिंदगियां मलबे के नीचे दम तोड़ चुकी हैं, जबकि 32 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी बताए जा रहे हैं। चारों तरफ मलबे का अंबार, रोते-बिलखते परिजन और शून्य से नीचे गिरते पारे के बीच जिंदगी बचाने की जद्दोजहद जारी है।

​जब 10 किलोमीटर नीचे डोली धरती
​चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के अनुसार, यह भयानक तबाही स्थानीय समयानुसार रात करीब 10:33 बजे आई। उस वक्त लोग कड़ाके की ठंड में अपने घरों में सोने की तैयारी कर रहे थे। अचानक जमीन के सीने से उठी गड़गड़ाहट और भयंकर झटकों ने पूरी आबादी को खौफ में डाल दिया। भूकंप का मुख्य केंद्र उत्तरी तिब्बत के नाग्चू (Nagqu) क्षेत्र में जमीन से महज 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर दर्ज किया गया। उथली गहराई होने के कारण जमीन की सतह पर झटकों का असर कई गुना ज्यादा घातक साबित हुआ। ​यह इलाका तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर समुद्र तल से औसतन 4,864 मीटर की भीषण ऊंचाई पर स्थित है। भौगोलिक जटिलता और अत्यधिक ऊंचाई के चलते पहले से ही यहां जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण है, और इस आपदा ने हालात को और अधिक हृदयविदारक बना दिया है।

​सेकंडों में जमींदोज हुए 339 आशियाने
​सरकारी सूत्रों और स्थानीय मीडिया कार्यालय से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस भूकंप ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती रिपोर्टों में 339 से ज्यादा मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए, जबकि सैकड़ों अन्य इमारतों की दीवारों में चौड़ी और खतरनाक दरारें आ गई हैं। ​अस्पतालों में लाए गए 32 घायलों में से 11 की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है, जिनका इलाज डॉक्टरों की विशेष टीम की निगरानी में चल रहा है। कई दूरदराज के पहाड़ी गांवों से जमीनी संपर्क टूट गया है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि मृतकों और घायलों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है।

​आफ्टरशॉक्स का खौफ: कारों और सड़कों पर कटी रात
​मुख्य झटके के बाद भी धरती की बेचैनी शांत नहीं हुई। मुख्य भूकंप के कुछ ही मिनटों और घंटों के भीतर 3 से 4 तीव्रता वाले कई शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स (झटके) दर्ज किए गए। इन झटकों के डर से खौफजदा लोग अपने आशियानों को छोड़कर शून्य डिग्री के तापमान में सड़कों, खुले मैदानों और कारों में रात बिताने को मजबूर हो गए। सोशल मीडिया और स्थानीय टीवी चैनलों पर प्रसारित वीडियो में बेबस लोग रोते-बिलखते और अपने अपनों को सुरक्षित तलाशते दिखाई दे रहे हैं। ​विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी 2024 के बाद से इस पूरे भूभाग में दर्ज किया गया यह सबसे भीषण और विध्वंसक भूकंप है।

​बर्फबारी और शून्य से नीचे तापमान के बीच ‘मिशन जिंदगी’
​हादसे की भयावहता को देखते हुए तिब्बत और बीजिंग से आपातकालीन आपदा प्रबंधन, अग्निशमन विभाग, पुलिस और पैरामेडिकल टीमों को तुरंत नाग्चू रवाना किया गया। ऊंचाई पर ऑक्सीजन की भारी कमी, बर्फीली हवाओं और दुर्गम रास्तों के बावजूद बचावकर्मी भारी मशीनों और खोजी कुत्तों के जरिए मलबे में दबी सांसों को तलाश रहे हैं। ​बेघर हुए सैकड़ों परिवारों के लिए प्रशासन ने तुरंत राहत शिविर और तंबू लगाने का काम शुरू कर दिया है। राहत सामग्री के रूप में गर्म कपड़े, कंबल, पोर्टेबल हीटर, डिब्बाबंद भोजन और दवाइयां प्रभावित इलाकों में एयरड्रॉप और सड़क मार्ग से पहुंचाई जा रही हैं।

​हिमालयी बेल्ट में फिर बढ़ा भूगर्भीय खतरा
​भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के निरंतर घर्षण के कारण हिमालयी और तिब्बती क्षेत्र दुनिया के सबसे संवेदनशील सीस्मिक जोन (भूकंपीय क्षेत्रों) में आते हैं। सतह के नीचे लगातार जमा हो रही भारी ऊर्जा जब अचानक बाहर निकलती है, तो इस तरह का महाविनाश देखने को मिलता है। तिब्बत का यह ताज़ा झटका इस बात की चेतावनी है कि हिमालयी पट्टी के नीचे प्रकृति किसी भी पल करवट ले सकती है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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