फर्रुखाबाद में टीकाकरण अभियान को मिली रफ्तार, 17 जीरो डोज बच्चों तक पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

शहरी क्षेत्रों में नियमित टीकाकरण से छूट रहे बच्चों को सुरक्षा कवच देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। 10 अक्टूबर को आयोजित संयुक्त फील्ड विजिट एवं विशेष टीकाकरण सत्र के दौरान टीम ने 17 जीरो डोज एवं टीकाकरण से वंचित बच्चों को टीकाकरण सेवाओं से जोड़ा। इस पहल का उद्देश्य उन बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, जो किसी कारणवश नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन पाए थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान में बच्चों की पहचान करने के साथ उनके परिवारों से संपर्क स्थापित करने और टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने सामुदायिक सहभागिता और जनसंपर्क को अभियान का प्रमुख आधार बनाया, ताकि टीकाकरण से छूटे परिवारों तक पहुंच बनाकर बच्चों को आवश्यक टीके लगवाने के लिए प्रेरित किया जा सके।

स्थानीय लोगों के सहयोग से छूटे बच्चों तक पहुंची टीम

अभियान में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरसी माथुर, डीसी हिना खान, आईओ अक्षय, बीआरटी तथा गावी-सीएसओ टीम ने सहभागिता की। टीम ने क्षेत्र में भ्रमण कर ऐसे बच्चों की पहचान की, जिन्हें अब तक टीके नहीं लग पाए थे या जिनका टीकाकरण छूट गया था। परिवारों से संवाद कर उन्हें बच्चों के नियमित टीकाकरण के महत्व की जानकारी भी दी गई। इस दौरान बीसी अरफात, हसीन, संजीव और कविता ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों के सहयोग से परिवारों तक पहुंच बनाने में मदद मिली। स्वास्थ्य विभाग के इन समन्वित प्रयासों से 17 बच्चों को टीकाकरण सेवाओं से जोड़ने में सफलता मिली।

क्या होते हैं जीरो डोज बच्चे, इन्हें टीका लगाना क्यों जरूरी?

जीरो डोज बच्चों से सामान्यतः ऐसे बच्चों का आशय होता है, जिन्हें डीपीटी युक्त टीके की पहली खुराक भी नहीं मिली है। ऐसे बच्चों की पहचान और उन्हें टीकाकरण से जोड़ना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। नियमित टीकाकरण बच्चों को पोलियो, खसरा और अन्य टीके से रोकी जा सकने वाली गंभीर बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। यूनिसेफ के अनुसार, भारत में जीरो डोज बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए शहरी मलिन बस्तियों, प्रवासी आबादी और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित समुदायों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। घर-घर संपर्क, परिवारों की काउंसलिंग और स्थानीय लोगों की भागीदारी से टीकाकरण के प्रति विश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है।

नियमित टीकाकरण से जोड़ने पर स्वास्थ्य विभाग का जोर

स्वास्थ्य विभाग की पहल का उद्देश्य केवल विशेष टीकाकरण सत्र आयोजित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि छूटे हुए बच्चे आगे निर्धारित समय पर आवश्यक टीके लगवाते रहें। इसके लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और समुदाय के बीच समन्वय, बच्चों की पहचान तथा परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखना जरूरी है। भारत सरकार का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को आवश्यक टीकाकरण सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित किया जाता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर चलाए जाने वाले विशेष अभियान नियमित टीकाकरण की पहुंच बढ़ाने और छूटे हुए लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहायक हैं। फर्रुखाबाद में 10 अक्टूबर को आयोजित संयुक्त अभियान के तहत 17 बच्चों को टीकाकरण सेवाओं से जोड़ना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब इन बच्चों का आगे का टीकाकरण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रखना भी जरूरी होगा, ताकि कोई बच्चा आवश्यक टीकों से वंचित न रह जाए।

Anuj Singh
Anuj Singh

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