दिल्ली बनी छावनी: क्या जंतर-मंतर पर आज फिर होगा बड़ा घमासान? CJP के नए एलान से प्रशासन में हड़कंप, धारा 163 लागू

संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विपक्षी दलों के तेवर और ज्यादा तल्ख हो गए हैं। शनिवार को हुए व्यापक हंगामे और धरपकड़ के बाद सीजेपी ने रविवार को एक बार फिर जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन का एलान कर दिया है। इस घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं। संवेदनशील हालात को देखते हुए नई दिल्ली जिले, जंतर-मंतर और आसपास के सभी प्रमुख इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है और पूरी राजधानी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

​शनिवार को हुई थी अभूतपूर्व ‘किलेबंदी’
​बीते शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस का सख्त रुख देखने को मिला था। जुलाई माह में हुए पिछले आंदोलन से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तो क्या, लुटियंस दिल्ली की सीमाओं के भीतर भी कदम नहीं रख सके। चप्पे-चप्पे पर 35 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। ​शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया। वहीं प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी को उनके गुरुग्राम आवास से पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया। इसके साथ ही प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे चार पूर्व मुख्यमंत्रियों – अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनराई विजयन और माणिक सरकार समेत लगभग 4,000 प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग इलाकों से हिरासत में लिया गया। यद्यपि देर शाम अधिकांश नेताओं और समर्थकों को रिहा कर दिया गया, लेकिन सीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को लेकर गतिरोध बना रहा।

​’इस्तीफे तक नहीं थमेगा आंदोलन’
​पुलिस की सख्ती और शीर्ष नेताओं की हिरासत के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने स्पष्ट किया है कि जब तक चुनाव आयोग में जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती और सीईसी का इस्तीफा नहीं आ जाता, तब तक यह लड़ाई सड़क से संसद तक जारी रहेगी। संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से रविवार को फिर से शांतिपूर्ण ढंग से जंतर-मंतर की ओर कूच करने का आह्वान किया है। इस रुख ने दिल्ली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की पेशानी पर बल ला दिए हैं।

​सीमाओं पर सख्त चेकिंग, मेट्रो और रास्तों पर पहरा
​राजधानी में किसी भी प्रकार के अप्रिय घटनाक्रम और अव्यवस्था को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने सीमाओं पर पहरा कड़ा कर दिया है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद से आने वाले वाहनों की चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी और सरहोल बॉर्डर पर सघन तलाशी ली जा रही है, जिससे कई मार्गों पर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई है। ​यातायात पुलिस ने नई दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली के 30 से अधिक स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन जारी किया है। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों और बॉडी-वॉर्न कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे की निगरानी की जा रही है। सुरक्षा कारणों के मद्देनजर मध्य दिल्ली से जुड़े दर्जनों मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास नियंत्रित कर दिए गए हैं, जबकि कई प्रमुख स्टेशनों के गेट पूरी तरह बंद रखे गए हैं।

​लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और बढ़ता सियासी टकराव
​इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्तर पर घमासान छिड़ गया है। एक तरफ जहां विपक्षी दलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को दबाने का आरोप लगाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और स्थानीय प्रशासन की पूर्व अनुमति के बिना सार्वजनिक व्यवस्था को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा। ​रविवार को होने वाले इस दूसरे चरण के प्रदर्शन ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुरक्षा बलों की यह कड़ी घेराबंदी प्रदर्शनकारियों को रोक पाएगी, या फिर जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े सियासी घमासान का अखाड़ा बनेगा। फिलहाल दिल्ली की सड़कों पर सन्नाटे और सायरनों के बीच तनाव साफ महसूस किया जा सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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