‘विदेशी नागरिकता और भारतीय संस्थानों पर वार?’ : बेंगलुरु प्रदर्शन में ध्रुव राठी की मौजूदगी पर गहराया विवाद, गृह मंत्रालय से जांच की उठी मांग

संवाद 24 बेंगलुरु। जाने-माने यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी की भारत में राजनीतिक सक्रियता को लेकर एक नया और बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। बेंगलुरु में निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में ध्रुव राठी की प्रत्यक्ष भागीदारी के बाद अब यह सवाल गहराने लगा है कि क्या विदेशी नागरिकता रखने वाला कोई व्यक्ति भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों और संवैधानिक संस्थानों के खिलाफ आंदोलन का हिस्सा बन सकता है? इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) का दरवाजा खटखटाते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

​क्या है पूरा मामला और विरोध का आधार?
​दरअसल, बेंगलुरु के ऐतिहासिक फ्रीडम पार्क में नागरिक समाज संगठनों और ‘सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) के संयुक्त तत्वावधान में ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ नाम से एक बड़े विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। यह प्रदर्शन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के विरोध में था। ​इस मंच पर अभिनेता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज और अन्य प्रमुख चेहरों के साथ यूट्यूबर ध्रुव राठी भी मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग की नीतियों और कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए गए तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे व प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की गई। इसी मंच से ध्रुव राठी द्वारा दिए गए वक्तव्यों और उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी।

​पूर्व पुलिस कमिश्नर ने गृह मंत्रालय को लिखा कड़ा पत्र
​बेंगलुरु के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी भास्कर राव ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र भेजकर इस घटनाक्रम पर गंभीर कानूनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने पत्र के जरिए सवाल उठाया कि ध्रुव राठी, जिनके पास जर्मनी की नागरिकता होने की बात कही जाती है, वे किस विधिक अधिकार के तहत देश के संवैधानिक संस्थानों के कामकाज को चुनौती देने वाले संगठित धरने-प्रदर्शन में शामिल हुए।
​भास्कर राव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह मुद्दा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से कहीं अधिक आव्रजन और विदेशी अधिनियम के कड़े अनुपालन से जुड़ा है। उन्होंने गृह मंत्रालय से आग्रह किया कि निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं की तत्काल पड़ताल की जाए:
​नागरिकता और पासपोर्ट का विवरण: ध्रुव राठी की वर्तमान राष्ट्रीयता क्या है और उन्होंने भारत में प्रवेश के लिए किस देश के वैध पासपोर्ट का उपयोग किया?
​वीजा और आव्रजन की श्रेणी: वे किस श्रेणी के वीजा, ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड अथवा विशेष परमिट पर भारत आए हैं?
​यात्रा का घोषित उद्देश्य: भारत यात्रा के दौरान उन्होंने प्रवेश फॉर्म में क्या उद्देश्य दर्ज कराया था और क्या उनके धरने में शामिल होने से उस घोषित उद्देश्य का उल्लंघन हुआ है?
​संवैधानिक संस्थानों के खिलाफ प्रदर्शन की वैधता: क्या विदेशी नागरिक (फॉरेनर्स एक्ट, 1946) के तहत किसी अन्य देश का नागरिक भारत की लोकतांत्रिक व संवैधानिक प्रक्रियाओं के खिलाफ सार्वजनिक आंदोलन कर सकता है या इसके लिए किसी विशेष पूर्व-अनुमति की आवश्यकता थी?

​विदेशी अधिनियम और OCI नियमों के उल्लंघन का अंदेशा
​भारतीय कानून के तहत विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों के लिए राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर स्पष्ट सीमाएं तय की गई हैं। पूर्व पुलिस आयुक्त ने तर्क दिया कि यदि ध्रुव राठी की इस गतिविधि से विदेशी अधिनियम 1946, वीजा शर्तों या ओसीआई नियमों का कोई भी उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो गृह मंत्रालय को कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
​विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी नागरिकों के लिए भारत में राजनीतिक रैलियों, धरनों अथवा संस्थागत विरोध प्रदर्शनों को संबोधित करना वीजा शर्तों के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है, जिसके तहत वीजा रद्द करने से लेकर ब्लैकलिस्ट किए जाने तक के कड़े प्रावधान मौजूद हैं।

​राजनीतिक गलियारों में गरमाई बहस
​इस शिकायत के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। एक पक्ष इसे विदेशी धरती से जुड़े व्यक्तियों द्वारा देश के आंतरिक मामलों में गैर-कानूनी दखल मान रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देख रहा है। ​अब सबकी निगाहें केंद्रीय गृह मंत्रालय के रुख पर टिकी हैं कि क्या मंत्रालय पूर्व पुलिस कमिश्नर की इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए ध्रुव राठी के वीजा स्टेटस और बेंगलुरु प्रदर्शन की आधिकारिक रिपोर्ट तलब करता है या नहीं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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