कोयले की आड़ में ₹1900 करोड़ का ‘काला खेल’ डायरी के पन्नों से खुला लौह अयस्क लेवी का महाघोटाला, IAS और सिंडिकेट का गठजोड़ बेनकाब!

​संवाद 24 छत्तीसगढ़। लंबे समय से सुर्खियों में रहे बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले की आंच अब केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसने प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों की सबसे बड़ी लूट का एक और खतरनाक राजफाश कर दिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की सघन जांच में सामने आया है कि कोयले के साए में सुनियोजित तरीके से लौह अयस्क (Iron Ore) पर भी अवैध वसूली का समानांतर सिंडिकेट चलाया जा रहा था। जांच एजेंसियों के हाथ लगी एक गुप्त डायरी और दस्तावेजी साक्ष्यों के प्रारंभिक गणितीय विश्लेषण के अनुसार, यह कथित ‘अयस्क लेवी घोटाला’ करीब 1,905 करोड़ रुपये के भारी-भरकम आंकड़े तक पहुंचता नजर आ रहा है।

​गुप्त डायरी और ₹100 प्रति टन की तयशुदा ‘कट मनी’
​जांच एजेंसियों के अनुसार, कोल लेवी मामले में जब्त दस्तावेजों और एक विशेष डायरी की सूक्ष्म पड़ताल के दौरान यह चौंकाने वाला सच उजागर हुआ। जांच में सामने आया कि कोयला सिंडिकेट के मुख्य चेहरे सूर्यकांत तिवारी के प्रभाव को खनिज संपदा के अन्य क्षेत्रों में भी पूरी तरह स्थापित कर दिया गया था। ​आरोप है कि तत्कालीन शासनकाल के दौरान आइएएस अधिकारी जयप्रकाश मौर्य ने उद्योगपतियों, प्लांट संचालकों और खनिज व्यापारियों के साथ बैठकें की थीं। इन बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि लौह अयस्क के परिवहन के एवज में सूर्यकांत तिवारी या उसके गुर्गों को प्रति टन 100 रुपये की अवैध लेवी अनिवार्य रूप से अदा करनी होगी। जो उद्यमी या ट्रांसपोर्टर इस वसूली को देने में आनाकानी करते, उनकी गाड़ियों और परिवहन अनुमतियों को अटका दिया जाता था।

​आंकड़ों का गणित: 19 करोड़ टन उत्पादन और 1900 करोड़ का हिसाब
​उपलब्ध प्रशासनिक और खनन आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 तक पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान राज्य में लगभग 19.05 करोड़ टन लौह अयस्क का खनन और सड़क व रेल मार्गों से परिवहन दर्ज हुआ था। ​यदि 100 रुपये प्रति टन की तय अवैध लेवी के दर पर इसका आकलन किया जाए, तो यह राशि 1,905 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। हालांकि, जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू का कहना है कि यह एक प्रारंभिक गणितीय अनुमान है और पूरी मात्रा पर वसूली से जुड़े पुख्ता सबूत, नकदी के लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों को क्रमबद्ध तरीके से जुटाने का काम अभी जारी है।

​14 दिसंबर 2021 का वह प्रस्ताव: नीति बनाकर बिछाया गया जाल
​ईओडब्ल्यू की जांच में यह गंभीर तथ्य भी सामने आया है कि अवैध वसूली तंत्र को प्रशासनिक नियमों का आवरण देने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार की गई थी। 14 दिसंबर 2021 को लौह अयस्क के परिवहन के लिए विशेष ‘परिवहन पास’ (Transportation Pass) की नई व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बाद 5 जनवरी 2022 को इस संबंध में आदेश जारी हुए और रेल व सड़क मार्ग से अयस्क की ढुलाई के लिए नए नियम प्रभावी हुए। ​जांच अधिकारियों का दावा है कि इसी नीतिगत बदलाव की आड़ में सिंडिकेट ने अपनी जड़ें मजबूत कीं। आरोप है कि आइएएस जयप्रकाश मौर्य न केवल सूर्यकांत तिवारी के नियमित संपर्क में थे, बल्कि अवैध वसूली तंत्र को सुचारू बनाए रखने, दबाव डालने और नकद रकम के लेन-देन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

​सियासी भूचाल और कानूनी शिकंजा
​इस नए खुलासे ने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक प्रतिशोध और मनगढ़ंत गणितीय आकलन बता रही है, वहीं जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके पास वसूली, डायरी एंट्रीज और हवाला नेटवर्क से जुड़े ठोस इनपुट्स हैं। ईओडब्ल्यू और एसीबी अब उन तमाम लौह अयस्क व्यापारियों और स्पंज आयरन प्लांट संचालकों के बयान दर्ज करने की तैयारी में हैं, जिनसे यह कथित वसूली की गई थी। आने वाले दिनों में इस मामले में कई अन्य प्रभावशाली चेहरों और नौकरशाहों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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