
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी और समूचे एनसीआर में शुक्रवार की दोपहर ढलते ही एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। महानगर के प्रमुख बस टर्मिनलों, रेलवे स्टेशनों और हाईवे से सटे जंक्शनों पर अचानक मुसाफिरों का हुजूम उमड़ पड़ा। कश्मीरी गेट स्थित महाराणा प्रताप इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT), आनंद विहार, सराय काले खां और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं बची। टिकट खिड़कियों से लेकर प्लेटफॉर्म और बस बे तक यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें नजर आईं। हर कोई जल्द से जल्द शहर से बाहर निकलने की जद्दोजहद में लगा दिखा।
गांधी जयंती और वीकेंड का दुर्लभ संयोग
इस अप्रत्याशित भीड़ के पीछे की मुख्य वजह बनी कैलेंडर की तारीख और छुट्टियों का दुर्लभ संयोग। 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती शुक्रवार को पड़ने से कामकाजी लोगों और युवाओं को लगातार तीन दिन की मोहलत मिल गई। शुक्रवार, शनिवार और रविवार के इस तीन दिवसीय ‘लॉन्ग वीकेंड’ ने दिल्लीवासियों को रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से राहत पाने का सुनहरा मौका दे दिया। अक्टूबर की सुखद शुरुआत और बदलते मौसम के बीच मिले इस अवकाश को भुनाने के लिए लोगों ने पहले से ही योजनाएं बना रखी थीं, जिनका व्यापक असर शुक्रवार दोपहर बाद जमीनी स्तर पर दिखने लगा।
टिकटों की मारामारी और यात्रियों की जद्दोजहद
शाम 4 बजे के बाद से ही कश्मीरी गेट बस अड्डे पर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की ओर जाने वाली बसों के लिए यात्रियों की आपाधापी बढ़ गई। वहीं आनंद विहार बस अड्डे पर पूर्वांचल और बिहार जाने वाले लोगों की भीड़ से समूचा परिसर खचाखच भर गया। जिन लोगों को सामान्य दिनों में आसानी से सीटें मिल जाती थीं, उन्हें बसों के अंदर जाने के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। कई परिवारों को बच्चों और भारी-भरकम सामान के साथ घंटों अपनी बस या ट्रेन के आने का इंतजार करते देखा गया। कैब और ऑटो की उपलब्धता भी सीमित हो गई, जिससे कई यात्रियों को अतिरिक्त किराया चुकाना पड़ा।
हिल स्टेशनों की ओर युवाओं का रुख और होटल फुल
सप्ताहांत की इस हलचल में केवल अपने पैतृक गांव या गृहनगर लौटने वाले लोग ही शामिल नहीं थे, बल्कि एक बहुत बड़ा तबका उन युवाओं और कामकाजी पेशेवरों का था, जो प्रकृति की गोद में शांति तलाशने के लिए निकले। दिल्ली की दमघोंटू दिनचर्या से दूर शिमला, मनाली, कसौली, मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और जयपुर जैसे पर्यटन स्थलों के लिए युवाओं के समूहों ने निजी गाड़ियों, टैक्सियों और वॉल्वो बसों का रुख किया। पर्यटन से जुड़े जानकारों के मुताबिक, आसपास के प्रमुख हिल स्टेशनों और रिसॉर्ट्स में 90 प्रतिशत से अधिक कमरों की बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है।
जाम से निपटने के लिए सड़कों पर पुलिस की अग्निपरीक्षा
सड़कों पर उमड़े इस भारी दबाव को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए भी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा। दिल्ली के कई संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में पूर्व-निर्धारित प्रदर्शनों और सुरक्षा बंदोबस्त में जुटी दिल्ली पुलिस को इस ट्रैफिक दबाव के चलते दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ा। गाजीपुर बॉर्डर, कालिंदी कुंज, आश्रम चौक, मुकरबा चौक और धौला कुआं जैसे मुख्य निकासी मार्गों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई और लंबा जाम लग गया। ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई स्थानों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किया और महत्वपूर्ण चौराहों पर मैन्युअल सिग्नलिंग के जरिए वाहनों की निकासी कराई, ताकि लोगों को घंटों फंसे न रहना पड़े।
तनाव से दूर अपनों के साथ छुट्टियां बिताने का उत्साह
भीड़ और आपाधापी के बावजूद यात्रियों के चेहरों पर काम के तनाव से मुक्ति और अपनों के साथ छुट्टियां बिताने का उत्साह साफ झलक रहा था। त्योहारों के इस महीने में छुट्टियों का यह सिलसिला अभी सिर्फ शुरुआत भर है, लेकिन इस पहले लंबे वीकेंड ने राजधानी की धड़कनों को तेज करते हुए साबित कर दिया कि दिल्ली वाले जिंदगी से थोड़ा सा वक्त चुराकर घूमने और अपनों के करीब जाने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते।






