रफ्तार की अंधी दौड़ या सुरक्षा में चूक? एक भीषण टक्कर और बिछ गईं लाशें

​संवाद 24 महाराष्ट्र। प्रदेश की जीवनरेखा माना जाने वाला ‘हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे समृद्धि महामार्ग’ एक बार फिर भीषण रक्तपात और चीख-पुकार का गवाह बना है। अमरावती जिले की सीमा के भीतर आधी रात के सन्नाटे को चीरती हुई तेज धमाके की आवाज ने वहां से गुजर रहे राहगीरों की रूह कंपा दी। जिले के धामनगांव रेलवे थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 97 पर एक अनियंत्रित और बेहद तेज रफ्तार भारी ट्रक ने सवारियों से भरी बोलेरो पिकअप वैन को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। यह टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि पिकअप वाहन के परखच्चे उड़ गए। इस दर्दनाक सड़क हादसे में 5 लोगों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि 21 अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

​आधी रात को पसरा मातम: कैसे घटा पूरा घटनाक्रम?
​पुलिस व स्थानीय प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह खौफनाक दुर्घटना देर रात लगभग 12:45 बजे पेश आई। उस वक्त समृद्धि एक्सप्रेसवे पर अन्य दिनों की तुलना में यातायात सामान्य गति से चल रहा था। बोलेरो पिकअप वाहन अपने गंतव्य की ओर अग्रसर था, जिसमें कई लोग सवार थे। ​प्रत्यक्षदर्शियों और गश्ती दल के अनुसार, चैनल नंबर 97 के पास पहुंचते ही पीछे से बेहद तेज गति में आ रहे एक भारी ट्रक ने बोलेरो पिकअप को इतनी बेरहमी से टक्कर मारी कि पिकअप कई मीटर तक घिसटती चली गई और अंततः सड़क किनारे पलट गई। वाहन का पिछला और बीच का हिस्सा बुरी तरह पिचक गया, जिससे अंदर बैठे लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। अंधेरी रात में चारों ओर केवल खून, बिखरा हुआ सामान और घायल मुसाफिरों की हृदयविदारक चीखें ही सुनाई दे रही थीं।

​राहत और बचाव कार्य: वर्धा मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए गंभीर घायल
​हादसे की सूचना मिलते ही समृद्धि महामार्ग पर तैनात क्विक रिस्पांस पेट्रोलिंग टीम, एंबुलेंस दस्ते और धामनगांव रेलवे थाने की पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। अंधेरा और क्षतिग्रस्त वाहन के मुड़े हुए लोहे के टुकड़े बचाव कार्य में भारी चुनौती बने हुए थे। राहत कर्मियों ने कटर और स्थानीय साधनों की मदद से वाहन के मलबे में फंसे घायलों और शवों को किसी तरह बाहर निकाला। ​प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सभी घायलों को बिना समय गंवाए प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी धामनगांव ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों द्वारा जांच के उपरांत 5 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। घायलों में से कई यात्रियों की नाजुक स्थिति, सिर में गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तुरंत वर्धा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां विशेष डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों के उपचार और निगरानी में जुटी हुई है।

​क्यों बार-बार ‘मौत का जाल’ साबित हो रहा है समृद्धि एक्सप्रेसवे?
​यह दुर्घटना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि देश के सबसे आधुनिक एक्सप्रेसवे पर लगातार घटित हो रही त्रासदियों की कड़ी का एक और काला पन्ना है। उद्घाटन के बाद से ही 701 किलोमीटर लंबा नागपुर-मुंबई समृद्धि कॉरिडोर लगातार गंभीर हादसों के कारण चर्चा और चिंता के केंद्र में रहा है। इस दुर्घटना के बाद एक बार फिर कुछ बुनियादी और गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
​’रोड हिप्नोसिस’ और चालक की थकान: रात के समय सीधे, चौड़े और बिना मोड़ वाले रास्तों पर लगातार गाड़ी चलाने से अक्सर भारी वाहनों के चालक ‘रोड हिप्नोसिस’ (सड़क सम्मोहन) या अचानक झपकी का शिकार हो जाते हैं। क्या ट्रक चालक नींद या थकान के वशीभूत था?
​ओवरस्पीडिंग और लेन अनुशासन का अभाव: एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा तक की गति अनुमन्य है, लेकिन भारी मालवाहक ट्रकों के लिए निर्धारित गति सीमा और लेन के कड़े नियमों की अनदेखी अक्सर घातक सिद्ध होती है।
​कमजोर सुरक्षा मानक और छोटे वाहनों की आवाजाही: रात के समय यात्रियों को लेकर चलने वाले छोटे व हल्के वाणिज्यिक वाहनों (जैसे पिकअप) की सुरक्षा क्षमता भारी ट्रकों की टक्कर को झेलने के अनुकूल नहीं होती।

​पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई
​धामनगांव रेलवे पुलिस ने दुर्घटनास्थल का विस्तृत पंचनामा तैयार कर लिया है और यातायात को सुचारू बनाने के लिए क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को एक्सप्रेसवे से हटाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ट्रक चालक के खिलाफ तेज गति, लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या से संबंधित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे पर लगे हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों और स्पीड सेंसर्स की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि टक्कर के समय वाहनों की सटीक गति और वास्तविक कारणों का विश्लेषण किया जा सके। ​यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर यह चेतावनी दे रहा है कि कंक्रीट के चौड़े गलियारे केवल गति के लिए नहीं हैं; जब तक वाहन चालक सड़क नियमों, लेन अनुशासन और थकान प्रबंधन को गंभीरता से नहीं लेंगे, तब तक ऐसे उन्नत कॉरिडोर जीवन के बजाय अकाल मृत्यु का मार्ग बनते रहेंगे।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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