
संवाद 24 नई दिल्ली। बादलों के बीच 33,000 फीट की ऊंचाई पर जब एक यात्री विमान शांति से अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहा था, तभी कॉकपिट के बंद दरवाजों के पीछे एक खौफनाक साजिश रची जाने लगी। विमान में सवार करीब 180 यात्रियों को भनक तक नहीं थी कि अगले कुछ पलों में वे जिंदगी और मौत के किस भयानक मोड़ पर खड़े होने वाले हैं। लेकिन उस संकट की घड़ी में एक भारतीय जांबाज दीवार बनकर खड़ा हो गया – गंभीर रूप से लहूलुहान होने के बावजूद जिसने न केवल हमलावर के नापाक मंसूबों को नाकाम किया, बल्कि विमान को सुरक्षित जमीन पर उतारकर इतिहास रच दिया। इस अदम्य साहस और शौर्य की मिसाल पेश करने वाले फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार के जज्बे को अब पूरे देश के साथ-साथ दुनिया सलाम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित को राष्ट्र का ‘सच्चा हीरो’ बताते हुए उनके साहस की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
आसमान में खौफनाक मंजर: कॉकपिट में अचानक हुआ हमला
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ1073 में घटित हुई। यह वाणिज्यिक विमान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इजरायल के तेल अवीव स्थित बेन गुरियन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। विमान जब मध्य-पूर्व के हवाई क्षेत्र में 33,000 फीट की क्रूज़िंग ऊंचाई पर था, तभी कॉकपिट के भीतर मौजूद ओमान मूल के को-पायलट ने कथित तौर पर एक खतरनाक साजिश को अंजाम देने की कोशिश की। आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, सह-पायलट ने अचानक चाकू निकालकर मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मछार पर जानलेवा हमला बोल दिया। उसका मकसद विमान के नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर प्लेन को क्रैश कराना था। कॉकपिट में अचानक हुए इस अप्रत्याशित हमले में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए।
लहूलुहान होकर भी नहीं छोड़ा नियंत्रण, खोला दरवाजा
गंभीर घावों, बहते खून और असहनीय दर्द के बावजूद गुजरात के रहने वाले कैप्टन स्मित मछार ने अपने होश और हौसले को टूटने नहीं दिया। उन्होंने न सिर्फ अकेले ही हमलावर को-पायलट का डटकर मुकाबला किया, बल्कि अपनी जान को दांव पर लगाते हुए संघर्ष के बीच कॉकपिट का सुरक्षा दरवाजा अनलॉक करने में कामयाब रहे। दरवाजा खुलते ही केबिन क्रू और सतर्क यात्रियों को अंदर हो रहे खूनी संघर्ष का आभास हुआ। उन्होंने तुरंत कॉकपिट में घुसकर हमलावर को धर दबोचा और उसे काबू में कर लिया। अगर कैप्टन स्मित ने जरा भी कमजोरी दिखाई होती या कुछ पलों की भी देरी की होती, तो विमान एक भीषण और दर्दनाक हादसे का शिकार हो सकता था।
तबुक में आपात लैंडिंग और यात्रियों की नई जिंदगी
फ्लाइट ट्रैकिंग रडार के आंकड़ों के अनुसार, आपातकालीन स्थिति पैदा होते ही विमान ने फौरन ‘मेडे’ (Mayday) इमरजेंसी सिग्नल भेजा और ऊंचाई से तेजी से नीचे आया। इसके बाद कैप्टन स्मित ने विमान को बेहद कुशलता से सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा और रनवे पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग करा दी। विमान के पहिये जमीन को छूते ही 180 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सांस में सांस आई। लैंडिंग के तुरंत बाद दोनों को उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया।
”कैप्टन स्मित हमारे हीरो हैं”: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
इस हैरतअंगेज बहादुरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक भावुक और प्रेरक संदेश साझा करते हुए लिखा:
”कैप्टन स्मित मछार एक सच्चे हीरो हैं। अत्यधिक खतरे और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, उन्होंने दूसरों के जीवन की रक्षा के लिए अद्वितीय शौर्य और दृढ़ संकल्प प्रदर्शित किया। उनकी इस जांबाजी ने सैकड़ों निर्दोष जिंदगियों को बचाया और एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय त्रासदी को टाल दिया। पूरे भारत को कैप्टन मछार पर गर्व है। मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने और दीर्घायु की प्रार्थना करता हूँ।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजा भारतीय पायलट का पराक्रम
कैप्टन स्मित मछार भारतीय विमानन क्षेत्र के एक मंझे हुए पेशेवर हैं। उनके पास 9,500 से अधिक घंटों का उड़ान अनुभव है और वे फ्लाईदुबई से जुड़ने से पहले भारतीय विमानन कंपनी स्पाइसजेट में 11 वर्षों तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी इस बहादुरी की गूंज वैश्विक स्तर पर भी सुनाई दे रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित के पराक्रम को सैल्यूट करते हुए कहा कि एक भारतीय पायलट के त्वरित निर्णय और फौलादी इरादों ने 174 से अधिक नागरिकों को नया जीवन दिया है। दुनिया भर के विमानन विशेषज्ञ और आम नागरिक आज इस भारतीय जांबाज के पेशेवर समर्पण और निस्वार्थ वीरता के कायल हो चुके हैं।






