
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 01 अक्टूबर 2026, गुरुवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – कृष्ण
तिथि – पंचमी दोपहर 12:36 PM तक, तत्पश्चात् षष्ठी
वार – गुरुवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – रोहिणी अगले दिन (02 अक्टूबर) प्रातः 04:27 AM तक, तत्पश्चात् मृगशिरा
योग – सिद्धि रात्रि 09:18 PM तक, तत्पश्चात् व्यतीपात
करण – तैतिल दोपहर 12:36 PM तक, तत्पश्चात् गर रात्रि 11:26 PM तक, तत्पश्चात् वणिज
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:04 AM
सूर्यास्त – 05:58 PM
चन्द्रोदय – 09:12 PM
चन्द्रास्त – 10:46 AM
चन्द्र राशि – वृषभ
अभिजित मुहूर्त – 11:37 AM से 12:25 PM तक
विजय मुहूर्त – 02:00 PM से 02:48 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 01:30 PM से 02:59 PM तक
यमगण्ड – 06:04 AM से 07:33 AM तक
गुलिक काल – 09:02 AM से 10:32 AM तक
दुर्मुहूर्त – 10:02 AM से 10:49 AM तक एवं 02:48 PM से 03:35 PM तक
कंटक – 02:48 PM से 03:35 PM तक
शुभ चौघड़िया
शुभ – 06:04 AM से 07:33 AM तक
चर – 10:32 AM से 12:01 PM तक
लाभ – 12:01 PM से 01:30 PM तक
अमृत – 01:30 PM से 02:59 PM तक
शुभ – 04:29 PM से 05:58 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – दक्षिण
यात्रा उपाय – गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दही या जीरा खाकर अथवा भगवान विष्णु का स्मरण करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
पंचमी श्राद्ध (पितृपक्ष)
आश्विन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर पंचमी श्राद्ध संपन्न किया जाता है। जिन पितरों का देहावसान किसी भी मास के दोनों पक्षों की पंचमी तिथि को हुआ हो, उनका तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण भोजन आज कराया जाता है। अविवाहित मृत परिजनों का श्राद्ध भी पंचमी तिथि पर करना विशेष फलदायी माना जाता है।
रोहिणी नक्षत्र एवं चन्द्रमा का उच्च गोचर
रोहिणी नक्षत्र अगले दिन प्रातः 04:27 तक रहेगा, जिसके स्वामी चन्द्रमा और अधिपति देव ब्रह्माजी हैं। चन्द्रमा पूरे दिन-रात अपनी उच्च राशि वृषभ में संचरण करेंगे। यह योग सुख, समृद्धि, सौंदर्य, मानसिक स्थिरता और रचनात्मक कार्यों में भारी सफलता दिलाने वाला होता है।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज रात्रि 09:18 तक सिद्धि योग का प्रभाव रहेगा, जिससे किए गए धार्मिक व सांसारिक कार्य सिद्ध होंगे। चन्द्रमा के अपनी उच्च राशि में और अपने ही नक्षत्र (रोहिणी) में होने से मन में प्रसन्नता, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक सौहार्द बना रहेगा।

आज का राशिफल – 01 अक्टूबर 2026 गुरुवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
धन भाव में उच्च के चन्द्रमा के प्रभाव से आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ होगी। रुका हुआ धन वापस मिलेगा। परिवार में मांगलिक और आनंदमय वातावरण बना रहेगा।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में उच्च होकर गोचर कर रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास और आकर्षण में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में आपके निर्णयों की सराहना होगी।
उपाय – मस्तक पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से धार्मिक व शुभ कार्यों में धन व्यय होगा। दूरस्थ संपर्कों और विदेश से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। सेहत का ध्यान रखें।
उपाय – गाय को भीगी हुई चने की दाल या गुड़ खिलाएं।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
एकादश भाव में राशि स्वामी चन्द्रमा के उच्च होने से आय के नवीन साधन निर्मित होंगे। मित्रों और बड़े भाई-बहनों से पूरा सहयोग मिलेगा। महत्वाकांक्षाएं पूरी होंगी।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल अर्पित करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में आपकी मान-प्रतिष्ठा और प्रभाव को बढ़ाएंगे। उच्चाधिकारियों का पूरा समर्थन मिलेगा। नए व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स गति पकड़ेंगे।
उपाय – सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल में रोली मिलाकर अर्घ्य दें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
नवम भाव में चन्द्रमा भाग्य का पूर्ण सहयोग दिलाएंगे। धार्मिक अनुष्ठानों और तीर्थ यात्रा में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रयासरत जातकों को सफलता मिलेगी।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
अष्टम भाव में चन्द्रमा होने से स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें। वाहन सावधानी से चलाएं। जोखिम भरे वित्तीय फैसलों से आज दूरी बनाए रखें।
उपाय – किसी जरूरतमंद को पीले फल या भोजन का दान करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
सप्तम भाव में उच्च के चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में अपार मधुरता लाएंगे। साझेदारी के व्यापार में उत्तम लाभ के योग हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपकी विजय सुनिश्चित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूर्ण फल मिलेगा। पुराने कर्जों से राहत मिलेगी।
उपाय – केले के वृक्ष में जल अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक कार्यों और रचनात्मक योजनाओं में सफलता दिलाएगा। विद्यार्थियों को अध्ययन में उत्कृष्ट परिणाम मिलेंगे। संतान पक्ष से प्रसन्नता होगी।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि करेगा। भूमि, भवन या वाहन से जुड़ा काम पूरा हो सकता है। माताजी से विशेष स्नेह और सहयोग मिलेगा।
उपाय – भगवान विष्णु के मंदिर में कपूर जलाएं।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और साहस में वृद्धि करेगा। भाई-बहनों और मित्रों का पूर्ण सहयोग मिलेगा। छोटी लेकिन अत्यंत फलदायी यात्राएं संभव हैं।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
॥ शुभम भवतु ॥

