
कन्नौज/तिर्वा। तिर्वा स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2018 में सामने आए छेड़छाड़ के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोनों को छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता की मृत्यु हो चुकी थी।
कान की दवा लेने मेडिकल कॉलेज पहुंची थी छात्रा
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 22 फरवरी 2018 की दोपहर करीब दो बजे की है। औरैया जिले के बिधूना क्षेत्र की रहने वाली बीएससी की छात्रा कान की दवा लेने तिर्वा स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंची थी। वहां उसकी मुलाकात मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में कार्यरत बताए गए संजीव उर्फ संदीप कुमार और रामनिवास से हुई। दोनों को छात्रा पहले से जानती थी।
घूमने के बहाने तीसरी मंजिल पर ले जाने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, दोनों कर्मचारियों ने छात्रा से बातचीत के बाद उसे मेडिकल कॉलेज घूमने के लिए साथ चलने को कहा। छात्रा उनके साथ मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल पर पहुंची। वहां गैलरी में दोनों ने उसकी इच्छा के विरुद्ध छेड़छाड़ की। छात्रा द्वारा विरोध किए जाने के बाद दोनों के वहां से चले जाने की बात सामने आई।
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की थी विवेचना
घटना के बाद छात्रा ने तिर्वा कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया और जांच पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान हुई पीड़िता की मौत
मामले की सुनवाई के दौरान ही पीड़िता की मृत्यु हो गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार घटना के करीब दो वर्ष बाद अगस्त 2020 में उसकी मौत हुई थी। इसके बावजूद न्यायालय में मामले की सुनवाई जारी रही और उपलब्ध साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया।
अदालत ने लगाया जुर्माना, पिता को मिलेगी राशि
विशेष पॉक्सो न्यायालय ने दोनों दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कारावास के साथ 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। आदेश के अनुसार, पीड़िता की मृत्यु हो जाने के कारण जुर्माने की राशि उसके पिता को दिए जाने का निर्देश दिया गया है। दोनों द्वारा अर्थदंड जमा न करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
छह वर्ष से अधिक समय बाद आया फैसला
वर्ष 2018 में दर्ज हुए इस मामले में करीब छह वर्ष से अधिक समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत का फैसला सामने आया। मामले ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में शिकायत, पुलिस विवेचना, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत अंतिम निर्णय सुनाती है।






