
कन्नौज। कन्नौज के चर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण से जुड़े POCSO मामले में बुधवार को प्रस्तावित सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी। बताया गया है कि अधिवक्ताओं की हड़ताल के चलते न्यायिक कार्य प्रभावित रहा। मामले की सुनवाई अंतिम चरण की ओर बताए जाने के कारण आगामी तारीख पर होने वाली कार्यवाही पर निगाहें बनी हुई हैं।
2024 में सामने आया था मामला
यह प्रकरण अगस्त 2024 में सामने आया था। अभियोजन के अनुसार, 11 अगस्त 2024 की रात एक किशोरी की सूचना के बाद पुलिस तिर्वा क्षेत्र स्थित चौधरी चंदन सिंह महाविद्यालय पहुंची थी। पुलिस कार्रवाई के बाद नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और आरोपों से संबंधित धाराओं में वृद्धि की गई।
जांच और साक्ष्यों को लेकर भी सामने आए आरोप
मामले की जांच के दौरान साक्ष्यों को प्रभावित करने के प्रयास के आरोप भी सामने आए थे। पुलिस ने इस प्रकरण में नवाब सिंह यादव के भाई नीलू यादव तथा पूजा तोमर के विरुद्ध भी कार्रवाई की थी। हालांकि, किसी भी आपराधिक आरोप के अंतिम निर्धारण का अधिकार न्यायालय को ही है और POCSO मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
गैंगस्टर एक्ट मामले में मई में सुनाया जा चुका है फैसला
इसी प्रकरण से जुड़े गैंगस्टर एक्ट मामले में 29 मई 2026 को विशेष गैंगस्टर अदालत ने नवाब सिंह यादव और उनके भाई नीलू यादव को आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक पर 10-10 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। सह-आरोपी पूजा तोमर को छह वर्ष के कारावास और पांच लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले की पुष्टि स्वतंत्र रूप से हिन्दुस्तान, जागरण और अन्य मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी हाल में हुई थी सुनवाई
मामले से जुड़े एक अलग कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को आदेश पारित किया। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार शीर्ष अदालत ने संबंधित मामले में कन्नौज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रकरण पर नए सिरे से विचार कर कानून के अनुसार निर्णय लेने को कहा। यह कार्यवाही POCSO मामले की मुख्य सुनवाई से अलग कानूनी प्रक्रिया से संबंधित है।
अब 25 सितंबर की कार्यवाही पर नजर
POCSO मामले में अगली तारीख 25 सितंबर निर्धारित होने के बाद अब न्यायालय में होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल अदालत का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए मामले से जुड़े आरोपों और न्यायिक निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है। अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा प्रस्तुत साक्ष्यों का किस प्रकार मूल्यांकन किया।






