
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 24 सितंबर 2026, गुरुवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), भाद्रपद (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – त्रयोदशी रात्रि 11:20 PM तक, तत्पश्चात् चतुर्दशी
वार – गुरुवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – धनिष्ठा पूर्वाह्न 10:35 AM तक, तत्पश्चात् शतभिषा
योग – धृति अपराह्न 03:54 PM तक, तत्पश्चात् शूल
करण – कौलव पूर्वाह्न 11:11 AM तक, तत्पश्चात् तैतिल रात्रि 11:20 PM तक, तत्पश्चात् गर
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:00 AM
सूर्यास्त – 06:06 PM
चन्द्रोदय – 04:41 PM
चन्द्रास्त – अगले दिन (25 सितंबर) 04:26 AM
चन्द्र राशि – कुंभ
अभिजित मुहूर्त – 11:39 AM से 12:27 PM तक
विजय मुहूर्त – 02:04 PM से 02:53 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 01:34 PM से 03:05 PM तक
यमगण्ड – 06:00 AM से 07:31 AM तक
गुलिक काल – 09:02 AM से 10:32 AM तक
दुर्मुहूर्त – 10:02 AM से 10:51 AM तक एवं 02:53 PM से 03:41 PM तक
कंटक – 02:53 PM से 03:41 PM तक
शुभ चौघड़िया
शुभ – 06:00 AM से 07:31 AM तक
चर – 10:32 AM से 12:03 PM तक
लाभ – 12:03 PM से 01:34 PM तक
अमृत – 01:34 PM से 03:05 PM तक
शुभ – 04:36 PM से 06:06 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – दक्षिण
यात्रा उपाय – गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दही या जीरा खाकर अथवा भगवान विष्णु का स्मरण करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
गुरु प्रदोष व्रत
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि गुरुवार को पड़ने के कारण ‘गुरु प्रदोष व्रत’ का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, रोग-शोक से मुक्ति और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
शतभिषा नक्षत्र एवं पंचक
पूर्वाह्न 10:35 के बाद शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ होगा, जिसके स्वामी राहु और अधिपति देव वरुण हैं। चन्द्रमा के कुंभ राशि में संचरण करने से पंचक प्रभावी रहेगा। शतभिषा नक्षत्र चिकित्सा, औषधि निर्माण और गूढ़ अध्ययन के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
आज चन्द्रमा पूरे दिन-रात शनि की राशि कुंभ में गोचर करेंगे। दोपहर 03:54 तक धृति योग रहने से किए गए कार्यों में स्थिरता और सफलता प्राप्त होगी। गुरु प्रदोष का दुर्लभ संयोग आध्यात्मिक उन्नति और आर्थिक संकटों के निवारण के लिए श्रेष्ठ वातावरण निर्मित कर रहा है।

आज का राशिफल – 24 सितंबर 2026 गुरुवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नवीन साधन निर्मित करेंगे। मित्रों और वरिष्ठ सहयोगियों से भरपूर सहयोग मिलेगा। व्यापारिक विस्तार की योजनाएं सफल होंगी।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दशम भाव में चन्द्रमा कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान और पद-प्रभाव बढ़ाएंगे। उच्चाधिकारियों का समर्थन प्राप्त होगा। पिता के साथ संबंध प्रगाढ़ होंगे।
उपाय – भगवान विष्णु को पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
नवम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से भाग्य का पूर्ण साथ मिलेगा। धार्मिक यात्रा की रूपरेखा बन सकती है। उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को शुभ परिणाम मिलेंगे।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
अष्टम भाव में चन्द्रमा होने से स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। वाहन सावधानी से चलाएं और अनचाहे विवादों से दूरी बनाए रखें। किसी भी नए निवेश में जल्दबाजी न करें।
उपाय – ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
सप्तम भाव में चन्द्रमा दाम्पत्य जीवन में मधुरता और सामंजस्य बनाए रखेगा। साझेदारी के कार्यों में उत्तम लाभ होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
उपाय – शिवलिंग पर कच्चा दूध और गंगाजल चढ़ाएं।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा आपके विरोधियों और शत्रुओं को शांत रखेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का सकारात्मक फल मिलेगा। पुराने कर्जों में राहत मिलेगी।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
पंचम भाव में चन्द्रमा बौद्धिक क्षमता और रचनात्मकता में वृद्धि करेगा। संतान पक्ष से मन प्रसन्न रहेगा। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।
उपाय – किसी निर्धन व्यक्ति को पीले फल या अन्न का दान करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
चतुर्थ भाव में चन्द्रमा पारिवारिक सुख-सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित रखेगा। भूमि, भवन या वाहन से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और आत्मविश्वास में वृद्धि करेगा। भाई-बहनों और मित्रों का भरपूर सहयोग मिलेगा। छोटी और लाभकारी यात्राएं संभव हैं।
उपाय – श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण करें।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
धन भाव में चन्द्रमा आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करेगा। अटका हुआ धन मिलने की पूरी संभावना है। परिवार में उत्सव और प्रसन्नता का वातावरण रहेगा।
उपाय – पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय शक्ति मजबूत होगी। व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ेगा और सोचे हुए कार्य पूरे होंगे।
उपाय – भगवान शिव को जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के कारण अनावश्यक भागदौड़ या खर्च की स्थिति बन सकती है। विदेश अथवा दूरस्थ संपर्कों से लाभ संभव है। ध्यान और योग से मन शांत रखें।
उपाय – केले के वृक्ष में जल दें और गुरुजनों का आशीर्वाद लें।
॥ शुभम भवतु ॥

