
कन्नौज। पीएसएमपीजी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर्स ने अपनी वर्षों पुरानी सेवा संबंधी मांगों को लेकर गुरुवार को विरोध जताया। दोपहर करीब दो बजे शिक्षक कन्नौज कलक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौंपा। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध कैशलेस चिकित्सा सुविधा के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर है।
2000 से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में सेवा का दावा
शिक्षकों के अनुसार वे वर्ष 2000 से संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की व्यवस्था के तहत सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक मानदेय और सेवा शर्तों के नियमन से जुड़े मुद्दे लंबित हैं।स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन एवं सेवा शर्तों को लेकर उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2020 में शासनादेश भी जारी किया था।
विनियमितीकरण या यूजीसी वेतनमान की मांग
शिक्षकों का कहना है कि पिछले करीब नौ वर्षों से सरकार के समक्ष विनियमितीकरण अथवा यूजीसी वेतनमान के साथ सेवा सुरक्षा की मांग रखी जा रही है। संगठन की वेबसाइट पर भी विनियमितीकरण और यूजीसी न्यूनतम वेतनमान को प्रमुख मांग के रूप में दर्ज किया गया है।शिक्षकों के मुताबिक, लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें ऐसी सेवा व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है जिसमें मानदेय और सेवा सुरक्षा को लेकर उनकी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।
50 से अधिक जनप्रतिनिधियों के समर्थन पत्र भेजने का दावा
संगठन के अध्यक्ष डॉ. अरुणेश अवस्थी के अनुसार, उनकी मांगों के समर्थन में 50 से अधिक जनप्रतिनिधियों के समर्थन पत्र शासन को भेजे जा चुके हैं। शिक्षकों का कहना है कि उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के समक्ष भी कई बार अपनी मांगें रखी गई हैं।शिक्षकों ने कैशलेस चिकित्सा योजना के बहिष्कार को अपनी मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विरोध के एक माध्यम के रूप में बताया है।
45 से 60 वर्ष की उम्र में भी कम मानदेय पर काम करने का दावा
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि कई असिस्टेंट प्रोफेसर्स की उम्र अब 45 से 60 वर्ष के बीच हो चुकी है। उनका दावा है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें अपेक्षाकृत कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने विनियमितीकरण, यूजीसी वेतनमान अथवा जीविकोपार्जन के लिए निश्चित एवं सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था की मांग दोहराई।
उच्च शिक्षा में कैशलेस चिकित्सा सुविधा की पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग के नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों से जुड़े शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की है। राज्य के 2026-27 बजट दस्तावेज में सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों तथा राज्य विश्वविद्यालयों के नियमित एवं स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों के लिए इस सुविधा का उल्लेख है। इसके लिए बजट में ₹20 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
कलक्ट्रेट में मौजूद रहे शिक्षक
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. विकास त्रिपाठी, डॉ. आशीष सिंह, डॉ. श्याम बाजपेई, श्रद्धा मिश्रा, विभा तिवारी, कुलदीप सिंह, मुकेश गुप्ता, रवींद्र शुक्ला, सत्येंद्र सिंह, शालिनी कटियार, प्रीति शर्मा, पूजा मिश्रा, संगीता पांडे और डॉ. संजय शर्मा सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।शिक्षकों ने शासन से अपनी लंबित सेवा संबंधी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। अब इस ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई मांगों पर शासन स्तर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर शिक्षकों की नजर बनी हुई है।






