
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 21 सितंबर 2026, सोमवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – भाद्रपद (अमांत), भाद्रपद (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – दशमी रात्रि 08:02 PM तक, तत्पश्चात् एकादशी
वार – सोमवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा पूर्ण रात्रि तक
योग – शोभन सायं 04:05 PM तक, तत्पश्चात् अतिगण्ड
करण – तैतिल प्रातः 07:00 AM तक, तत्पश्चात् गर रात्रि 08:02 PM तक, तत्पश्चात् वणिज
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 05:59 AM
सूर्यास्त – 06:10 PM
चन्द्रोदय – 02:58 PM
चन्द्रास्त – अगले दिन (22 सितंबर) 01:36 AM
चन्द्र राशि – धनु पूर्वाह्न 11:15 AM तक, तत्पश्चात् मकर
अभिजित मुहूर्त – 11:40 AM से 12:29 PM तक
विजय मुहूर्त – 02:06 PM से 02:55 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 07:30 AM से 09:02 AM तक
यमगण्ड – 10:33 AM से 12:04 PM तक
गुलिक काल – 01:36 PM से 03:07 PM तक
दुर्मुहूर्त – 12:29 PM से 01:17 PM तक एवं 02:55 PM से 03:43 PM तक
कंटक – 08:25 AM से 09:14 AM तक
शुभ चौघड़िया
अमृत – 05:59 AM से 07:30 AM तक
शुभ – 09:02 AM से 10:33 AM तक
चर – 01:36 PM से 03:07 PM तक
लाभ – 03:07 PM से 04:38 PM तक
अमृत – 04:38 PM से 06:10 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पूर्व
यात्रा उपाय – सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दर्पण (शीशा) देखकर अथवा दूध या मिश्री का सेवन करके प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
आशा दशमी व्रत एवं परिवर्तिनी एकादशी पूर्वार्ध
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को ‘आशा दशमी’ के रूप में मनाया जाता है। यह समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में नई आशाओं के संचार का दिन है। रात्रि 08:02 के उपरांत अत्यंत कल्याणकारी ‘परिवर्तिनी एकादशी’ (पद्मा एकादशी) तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का प्रभाव
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पूरे दिन-रात प्रभावी रहेगा। इसके स्वामी सूर्यदेव और अधिपति देव ‘विश्वेदेव’ हैं। यह नक्षत्र स्थिरता, यश, धर्मनिष्ठा, दीर्घकालिक विजय और नेतृत्व क्षमता प्रदान करने वाला माना जाता है। महत्वपूर्ण अनुबंधों और नए कार्यों के शुभारंभ के लिए यह शुभ नक्षत्र है।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
पूर्वाह्न 11:15 तक चन्द्रमा धनु राशि में रहेंगे और उसके बाद शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। दोपहर बाद चन्द्रमा के मकर राशि में आने से कर्मक्षेत्र में स्थिरता और गंभीरता आएगी। सायं 04:05 तक शोभन योग रहने से धार्मिक आयोजन व सामाजिक कार्य शुभ फलदायी सिद्ध होंगे।

आज का राशिफल – 21 सितंबर 2026 सोमवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
दोपहर के बाद चन्द्रमा दशम भाव में आएंगे, जिससे कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। पदोन्नति या नए प्रोजेक्ट के अवसर मिल सकते हैं। पिता का सहयोग लाभप्रद रहेगा।
उपाय – भगवान शिव को कच्चा दूध और अक्षत अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दोपहर तक कार्यों में थोड़ी सावधानी रखें। उसके बाद भाग्य भाव में चन्द्रमा के आने से रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। धार्मिक यात्रा या शुभ आयोजन के योग बनेंगे।
उपाय – शिवलिंग पर सफेद चंदन से त्रिपुंड लगाएं।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दोपहर के बाद अष्टम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से सेहत को लेकर सतर्कता बरतें। खानपान का विशेष ध्यान रखें। किसी भी प्रकार के अनावश्यक विवाद या जोखिम से बचें।
उपाय – ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
सप्तम भाव में चन्द्रमा के गोचर से व्यापार में नए अवसर प्राप्त होंगे। जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। साझेदारी के कार्यों में बड़ा आर्थिक लाभ हो सकता है।
उपाय – माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त पूजा करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
षष्ठ भाव में चन्द्रमा विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर आपका प्रभाव स्थापित करेगा। नौकरीपेशा लोगों को परिश्रम का पूर्ण फल मिलेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा।
उपाय – सूर्यदेव को जल में लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
पंचम भाव में चन्द्रमा संतान पक्ष से शुभ समाचार दिलाएगा। कला, शिक्षा और शोध कार्यों में उल्लेखनीय सफलता मिलेगी। निवेश से लाभ के अच्छे अवसर बनेंगे।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
दोपहर बाद चन्द्रमा चतुर्थ भाव में आने से पारिवारिक सुख-साधनों पर ध्यान केंद्रित रहेगा। भूमि या वाहन से जुड़ा काम पूरा हो सकता है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
उपाय – जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र या भोजन का दान करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
तृतीय भाव में चन्द्रमा आपके पराक्रम और आत्मविश्वास में वृद्धि करेगा। भाई-बहनों और मित्रों का भरपूर साथ मिलेगा। छोटी लेकिन लाभकारी यात्राएं संभव हैं।
उपाय – हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाएं।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
दोपहर तक चन्द्रमा आपकी राशि में रहेंगे, तत्पश्चात् धन भाव में प्रवेश करेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और अटका हुआ धन प्राप्त होगा। वाणी में मधुरता बनाए रखें।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
पूर्वाह्न 11:15 के बाद चन्द्रमा आपकी ही राशि में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक शांति और निर्णय क्षमता में सुधार होगा। सोची हुई योजनाएं समय पर पूरी होंगी।
उपाय – शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से विदेश या दूरस्थ क्षेत्रों से संबंधित कार्यों में लाभ होगा। खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण आवश्यक है। योग और ध्यान से लाभ मिलेगा।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
एकादश भाव में चन्द्रमा आय के नए स्रोत प्रदान करेगा। पुराने मित्रों और वरिष्ठों से सहयोग प्राप्त होगा। व्यापारिक विस्तार के लिए दिन काफी सकारात्मक रहेगा।
उपाय – भगवान विष्णु के मंदिर में पीले पुष्प अर्पित करें।
॥ शुभम भवतु ॥

