यूजीसी के खिलाफ कन्नौज कूच पर पुलिस का ब्रेक, सौरिख तिराहे पर बढ़ा तनाव; हाईवे पर बैठे प्रदर्शनकारी

कन्नौज। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में मंगलवार को छिबरामऊ से कन्नौज जिला मुख्यालय के लिए निकली सवर्ण समाज की पदयात्रा को पुलिस ने सौरिख तिराहे के पास रोक दिया। पदयात्रा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनातनी की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और लाठी चलाने का आरोप लगाया, हालांकि उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टों में इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कालिका देवी मंदिर से शुरू हुआ मार्च, हाथों में तख्तियां लेकर निकले प्रदर्शनकारी

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंगलवार दोपहर सवर्ण समाज से जुड़े बड़ी संख्या में लोग छिबरामऊ के मां कालिका देवी मंदिर परिसर में जुटे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में यूजीसी के विरोध और अपनी मांगों से जुड़ी तख्तियां थीं। यहां से उन्होंने कन्नौज जिला मुख्यालय की ओर पैदल मार्च शुरू किया। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारी यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे थे।छिबरामऊ में यूजीसी की नीतियों के खिलाफ पहले भी प्रदर्शन हो चुके हैं। फरवरी में हुए एक प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने तहसील पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था और यूजीसी की नई नीतियों को वापस लेने की मांग रखी थी।

सौरिख तिराहे पर पुलिस ने रोका रास्ता, सड़क पर बैठकर शुरू हुई नारेबाजी

पदयात्रा आगे बढ़ी तो पुलिस ने संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इसे रोक दिया। मौके पर एसडीएम ज्ञानेंद्र द्विवेदी, सीओ सुरेश मलिक और कोतवाल कपिल दुबे समेत पुलिस बल मौजूद रहा। पदयात्रा रोके जाने से नाराज प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शनकारी करीब दो घंटे तक मौके पर डटे रहे।

हाईवे पर जाम से यातायात प्रभावित, पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया

प्रदर्शनकारियों के सड़क पर उतरने के बाद एनएच-34 पर आवागमन प्रभावित हुआ। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक करीब 20 से 25 मिनट तक हाईवे पर जाम जैसी स्थिति बनी रही। पुलिस ने मौके पर मौजूद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया। बाद में अधिकारियों ने समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात बहाल कराया।

पुलिस के साथ झड़प और लाठीचार्ज के आरोप पर क्या सामने आया?

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें हटाने के दौरान पुलिस ने लाठी चलाई। वहीं उपलब्ध अन्य रिपोर्टों में मुख्य रूप से पदयात्रा रोके जाने, सड़क पर बैठकर नारेबाजी और पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी का उल्लेख है। इसलिए लाठीचार्ज को फिलहाल प्रदर्शनकारियों के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।

एसडीएम की समझाइश के बाद खुला जाम, प्रशासन ने दी यह हिदायत

मामले की सूचना मिलने पर एसडीएम और सीओ अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि प्रदर्शनकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दे सकते हैं, लेकिन सड़क जाम कर यातायात बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।समझाइश के बाद प्रदर्शनकारियों ने जाम समाप्त किया और आगे तहसील परिसर की ओर रवाना हुए।

कन्नौज पहुंचने से पहले ही बदला प्रदर्शन का रुख, सौंपा गया ज्ञापन

जाम समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारी तहसील स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी के नियमों में बदलाव को लेकर आपत्तियां दर्ज कराते हुए संबंधित मांगों पर कार्रवाई की अपील की गई।प्रदर्शन में पुनीत दुबे, अनुपम दुबे, डॉ. रजनीश दुबे, राजा शुक्ला, हिमांशु चौहान संदीप भदौरिया सनी राणा राज भदौरिया समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

कन्नौज में पहले भी उठ चुका है यूजीसी के खिलाफ विरोध का मुद्दा

छिबरामऊ में यूजीसी से जुड़े नियमों के विरोध का यह पहला मामला नहीं है। जनवरी और फरवरी 2026 में भी क्षेत्र में इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जाने की रिपोर्टें सामने आई थीं। जनवरी में सवर्ण आर्मी ने यूजीसी कानून के विरोध में प्रदर्शन किया था, जबकि फरवरी में सर्व समाज के लोगों ने यूजीसी की नई नीतियों के खिलाफ तहसील पहुंचकर ज्ञापन सौंपा था।

Shivpratap Singh
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