
संवाद 24 फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद में ईद-मिलादुन्नबी के अवसर पर बुधवार को धार्मिक आस्था और उत्साह का एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। कटरी क्षेत्र के धर्मपुर कटरी और पंखियांन मड़ैया इलाके में बाढ़ के पानी के बीच लोगों ने पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिवस का जश्न मनाया। क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ की विकट परिस्थितियों के बावजूद उत्साह कम नहीं हुआ। स्थानीय लोगों ने स्टीमर और नावों को सजाया और पानी के रास्ते इस्लामी परचम के साथ धार्मिक आयोजन किया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सजी हुई नावों और स्टीमर पर सवार लोगों ने पानी के बीच जुलूस-ए-मोहम्मदी के रूप में यात्रा की। इस दौरान पैगंबर मोहम्मद साहब की शान में नारे लगाए गए और अमन, भाईचारे तथा आपसी सद्भाव का संदेश दिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भागीदारी बताई गई। हालांकि, इस संबंध में मऊदरवाजा थाना पुलिस का पक्ष अलग रहा। थानाध्यक्ष अजब सिंह ने नावों से किसी औपचारिक जुलूस के निकलने से इनकार किया है।
बाढ़ की विकट परिस्थितियों के बीच नहीं कम हुआ उत्साह
धर्मपुर कटरी और पंखियांन मड़ैया क्षेत्र इन दिनों बाढ़ के पानी से प्रभावित बताया गया है। कई स्थानों पर सामान्य आवागमन प्रभावित होने के कारण स्थानीय लोगों को नावों और अन्य जल साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसी परिस्थितियों के बीच ईद-मिलादुन्नबी का पर्व आने पर लोगों ने अपने स्तर से उत्सव मनाने की तैयारियां कीं। स्थानीय लोगों ने नावों को विशेष रूप से सजाया। नावों पर इस्लामी परचम लगाए गए और कई लोग एक साथ जलमार्ग से निकले। पानी के बीच धार्मिक परचमों के साथ चलती नावों का दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
लोगों का कहना था कि बाढ़ जैसी कठिन परिस्थितियां धार्मिक आस्था और सामूहिक उत्साह को कम नहीं कर सकीं। सामान्य वर्षों में जहां धार्मिक कार्यक्रम गलियों और सड़कों पर आयोजित किए जाते हैं, वहीं इस बार जलभराव की स्थिति के कारण आयोजन का स्वरूप अलग दिखाई दिया। बाढ़ के पानी के बीच नावों से लोगों का निकलना इस बात का भी प्रतीक रहा कि स्थानीय निवासियों ने परिस्थितियों के अनुरूप अपने धार्मिक उत्सव को मनाने का तरीका बदला।

नावों पर लहराए परचम, गूंजे धार्मिक नारे
स्थानीय लोगों के अनुसार, आयोजन के दौरान नावों पर इस्लामी परचम लगाए गए। सजे हुए जलयानों में सवार लोगों ने पैगंबर मोहम्मद साहब की शान में नारे लगाए। धार्मिक नारों के साथ लोगों ने ईद-मिलादुन्नबी की खुशियां साझा कीं। आयोजन के दौरान आपसी भाईचारे और अमन का संदेश भी दिया गया। ईद-मिलादुन्नबी के मौके पर लोग पैगंबर मोहम्मद साहब के जीवन, उनके संदेशों और शिक्षाओं को याद करते हैं। स्थानीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में भी धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया। बच्चों में भी पर्व को लेकर विशेष उत्साह नजर आया। कई बच्चे हाथों में परचम लेकर गलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों में दिखाई दिए। स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों और युवाओं ने भी उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
घरों में कुरानख्वानी, तिलावत और इबादत
ईद-मिलादुन्नबी के अवसर पर केवल बाहर के आयोजनों तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहे। स्थानीय परिवारों ने अपने घरों में भी धार्मिक आयोजन किए। घरों में कुरानख्वानी हुई, कुरआन की तिलावत की गई और इबादत का दौर चला। लोगों ने अपने परिवार और समाज की खुशहाली, अमन और भाईचारे के लिए दुआएं कीं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार कई घरों में विशेष पकवान भी तैयार किए गए और लोगों ने एक-दूसरे के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सामान्य जीवन भले ही प्रभावित रहा हो, लेकिन पर्व को लेकर लोगों ने अपनी आस्था और परंपराओं को बनाए रखने का प्रयास किया। घरों में आयोजित इबादत और सामूहिक धार्मिक गतिविधियों ने पर्व के माहौल को और विशेष बना दिया।
स्थानीय लोगों ने बताया जुलूस, पुलिस ने कहा नावों से जुलूस नहीं निकला
धर्मपुर कटरी और पंखियांन मड़ैया क्षेत्र में हुए आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस के बयान में अंतर सामने आया। स्थानीय लोगों के अनुसार, नावों और स्टीमर को सजाकर पानी के रास्ते जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वहीं, मऊदरवाजा थानाध्यक्ष अजब सिंह ने नाव का कोई औपचारिक जुलूस निकलने से इनकार किया। उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में नावों से कोई जुलूस नहीं निकाला गया। उन्होंने संभावना जताई कि कुछ लोग उधर से इधर किसी जुलूस या धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए आ रहे होंगे।
पुलिस के इस बयान के बाद यह स्पष्ट है कि जलमार्ग पर लोगों की मौजूदगी और धार्मिक उत्सव से जुड़ी गतिविधियां तो सामने आईं, लेकिन नावों की यात्रा को लेकर आधिकारिक और स्थानीय स्तर पर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। इसलिए समाचार में दोनों पक्षों को शामिल करना जरूरी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि सजे हुए जलयानों के माध्यम से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया, जबकि पुलिस इसे औपचारिक जुलूस मानने से इनकार कर रही है।
कटरी क्षेत्र में बदला आयोजन का स्वरूप
बाढ़ के कारण कटरी क्षेत्र में लोगों की दिनचर्या और आवागमन के साधनों में बदलाव आया है। जिन क्षेत्रों में सामान्य दिनों में सड़कें और गलियां मुख्य रास्ता होती हैं, वहां पानी भरने के बाद नावें आवागमन का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई हैं। ऐसे में ईद-मिलादुन्नबी के धार्मिक उत्सव का स्वरूप भी परिस्थितियों के अनुसार अलग नजर आया। जलभराव वाले क्षेत्र में नावों पर परचम लगाए जाने और लोगों के समूह में जलमार्ग से निकलने का दृश्य सामान्य आयोजनों से बिल्कुल अलग था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस आयोजन के माध्यम से लोगों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी सामाजिक एकजुटता और धार्मिक आस्था कायम रह सकती है। हालांकि, बाढ़ की स्थिति में किसी भी जलमार्ग गतिविधि के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक निर्देशों का पालन भी उतना ही आवश्यक है।
बच्चों से बुजुर्गों तक दिखा पर्व का उत्साह
ईद-मिलादुन्नबी को लेकर क्षेत्र के बच्चों और युवाओं में विशेष उत्साह रहा। बच्चों ने हाथों में परचम लेकर अपनी खुशी जाहिर की। वहीं, युवाओं और अन्य स्थानीय लोगों ने भी धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। परिवारों ने घरों में विशेष पकवान तैयार किए और आपस में पर्व की खुशियां बांटीं। धार्मिक इबादत, तिलावत और सामाजिक मेल-मिलाप के बीच ईद-मिलादुन्नबी का पर्व मनाया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ की कठिनाइयों के बावजूद समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे के सहयोग से आयोजन को उत्साहपूर्वक मनाया। कई परिवारों के लिए यह अवसर धार्मिक आस्था के साथ एकजुटता और सामुदायिक सहयोग का भी रहा।
अमन और भाईचारे के संदेश के साथ मनाया गया पर्व
ईद-मिलादुन्नबी के अवसर पर धार्मिक आस्था के साथ अमन और भाईचारे का संदेश भी प्रमुख रहा। पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों ने आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता पर जोर दिया। कटरी क्षेत्र में बाढ़ के पानी के बीच दिखा यह दृश्य सामान्य परिस्थितियों से अलग था। एक ओर जलभराव और बाढ़ से जुड़ी चुनौतियां थीं, वहीं दूसरी ओर लोगों ने अपनी धार्मिक परंपराओं को जारी रखने का प्रयास किया। सजे हुए नावों और स्टीमर पर लहराते परचम, धार्मिक नारे, घरों में कुरानख्वानी और तिलावत, बच्चों का उत्साह तथा विशेष पकवानों की तैयारी ने बुधवार को धर्मपुर कटरी और पंखियांन मड़ैया क्षेत्र में पर्व का अलग माहौल बनाया।






